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महर्षि वाल्मीकि जयंती : आदि काव्य 'रामायण' के रचयिता महान ऋषि वाल्मीकि

बुधवार,अक्टूबर 20, 2021
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आश्विन मास का दूसरा प्रदोष व्रत 17 अक्टूबर 2021, रविवर को आ रहा है। इस व्रत में पूजन सूर्यास्त के समय करने का महत्व है। यह व्रत करने वाले की स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं... यहां प्रस्तुत हैं रवि प्रदोष व्रत की पूजन विधि-
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इन दिनों नवरात्रि का पर्व जारी है और प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि के आश्विन शुक्‍ल पंचमी को ललिता पंचमी पर्व मनाया जाता है। ललिता देवी को 'त्रिपुर सुंदरी' के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष ललिता पंचमी या उपांग ललिता व्रत 10 अक्टूबर 2021, रविवार को ...
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हिंदू पंचांग के अनुसार, अक्टूबर माह में कई प्रमुख व्रत व त्योहार आ रहे हैं, इस माह जहां पितरों की विदाई होगी, वहीं त्योहार का सीजन शुरू हो जाएगा। इस माह इंदिरा एकादशी, गांधी जयंती, सर्वपितृ अमावस्या, नवरात्रि, दशहरा और करवाचौथ समेत कई खास पर्व और ...
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हिंदू धर्म में हर माह आने वाली शिवरात्रि का शिव आराधकों के लिए बड़ा महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि को ही भगवान शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे।
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इस वर्ष आश्विन माह का पहला प्रदोष व्रत 4 अक्टूबर, दिन सोमवार को रखा जाएगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन आने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
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प्रतिवर्ष आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। इसे जितिया या जिउतिया व्रत के नाम भी जानते हैं। माताएं अपनी संतान के स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं।
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प्राचीन समय की बात है, कि एक बार एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह ब्राह्मण नियमित रुप से श्री विष्णु का पूजन किया करता था। उसकी पूजा-भक्ति से प्र
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हिंदी पंचांग के अनुसार, इस बार गजलक्ष्मी व्रत 29 सितंबर 2021 दिन बुधवार को रखा जाएगा। अश्विन मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि आरंभ- 28 सितंबर 2021 दिन मंगलवार को शाम 06 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होकर 29 सिंतबर 2021 दिन बुधवार रात 08 बजकर 29 मिनट पर समाप्त ...
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इस वर्ष व्रत जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत 29 सितंबर 2021, बुधवार को किया जाएगा। सनातन धर्मावलंबियों में जिउतिया (जीमूतवाहन) व्रत का खास महत्व है। आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत करने का बड़ा महात्म्य है।
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जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद अश्वथामा अपने पिता की मृत्यु की वजह से क्रोध में था।
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आप जानते हैं कि इन दिनों श्राद्ध चल रहे हैं और हम बताने जा रहे हैं श्राद्ध के दिनों में आने वाले पर्व गजलक्ष्मी व्रत के बारे में... दोस्तों यह व्रत इस बार मत मतांतर से 28 और 29 को माना जा रहा है....अलग अलग पंचांगों में इसकी तिथि अलग बताई जा रही है ...
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अर्जुन ने बाण के द्वारा स्वर्ग से ऐरावत हाथी को बुला लिया। इधर सारे नगर में शोर मच गया कि कुंती के महल में स्वर्ग से इन्द्र का ऐरावत हाथी पृथ्वी पर उतारकर पूजा जाएगा। समाचार को सुनकर नगर के सभी नर-नारी, बालक एवं वृद्धों की भीड़ एकत्र होने लगी। उधर ...
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इस वर्ष श्री महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ सोमवार, 13 सितंबर 2021 को हुआ था। यह व्रत 16 दिनों तक चलता है। इस व्रत का समापन मंगलवार, 28 सितंबर 2021 को होगा। प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से भी महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ होता है,
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श्राद्ध पक्ष में आने वाली अष्टमी को लक्ष्मी जी का वरदान प्राप्त है। यह दिन विशेष इसलिए भी है कि इस दिन सोना खरीदने का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा सोना आठ गुना बढ़ता है। साथ ही शादी की खरीदारी के लिए भी यह दिन उपयुक्त माना गया है। इस दिन ...
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महालक्ष्मी पर्व यानी गजलक्ष्मी व्रत है। इस दिन को दीपावली से भी अधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत में अगर अपनी राशि अनुसार विधि-विधान से पूजन किया जाए तो महालक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं और जीवन में धन-समृद्धि आती है।
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गजलक्ष्मी व्रत के दिन हाथी की पूजा और महालक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस साल यह व्रत मत-मतांतर से 28 और 29 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस व्रत में मिट्टी के गज बनाए जाते हैं।
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भाद्रपक्ष की शुक्ल अष्टमी (राधा अष्टमी) से लेकर श्राद्ध की अष्टमी तक महालक्ष्मी के विशेष आशीष झरते-बरसते हैं।
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पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत पूजन की सरल प्रामाणिक विधि... व्रत को 16 वर्षों तक ही पूरे करना चाहिए। यदि परिस्थितिवश 16 वर्ष के बाद उद्यापन नहीं कर सकें, तो व्रत को आगे भी किया जाता रहे, जब तक कि उद्यापन न हो। यह व्रत आश्विन (क्वांर) कृष्ण ...
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इन दिनों 16 दिवसीय श्राद्ध पर्व चल रहा है। 20 सितंबर भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर यह पर्व आश्विन मास की अमावस्या तक मनाया जाता है। इन 16 दिन श्राद्ध-तर्पण इत्यादि कार्य किए जाते हैं।
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