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अमेरिका में गूंजी भारत के पूर्व बाल मजदूरों की गूंज

शुक्रवार,सितम्बर 23, 2022
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जैसे लहरें बातें करते आईं हैं किनारों से आज तक, दिवा स्वप्न था बैठे थे पास पास और मूंदी (बंद) आंखों से, सपने संजोने लग गए हम जनम-जनम के साथ के, साथ न छूटेगा अपना और हम रहेंगे बन के आपके, झकझोर दी किसी आहट ने सपनो की वो दुनिया, टूटा सपना, जगे अचानक ...
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फैला बादल दल, गगन पर मस्ताना, सूखी धरती भीगकर मुस्काई। मटमैले पैरों से हल जोत रहा, कृषक थका गाता पर उमंग भरा। 'मेघा बरसे, मोरा जियरा तरसे, आंगन देवा, घी का दीप जला जा।' रुनझुन-रुनझुन बैलों की जोड़ी, जिनके संग-संग सावन गरजे। पवन चलाए बाण, बिजुरिया ...
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सनन-सनन हवा से तुम, भूमि पर अडिग मैं, कलकल बहते पानी तुम किनारे से जुड़ी मैं, चंद्र कभी-कभी सूर्य तुम, आकाश सी स्थायी मैं मौसम से बदलते तुम, वृक्ष सी खड़ी मैं, कल्पना से तरल तुम, सत्य सी अटल मैं
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Rain Poems पावस ऋतु नारी, नर सावन, रस रिमझिम संगीत सुहावन, सारस के जोड़े सरवर में, सुनते रहते बादल राग…सत रंग चूनर नव रंग पाग। उपवन-उपवन कांत कामिनी गगन गुंजाए मेघ दामिनी... पत्ते-पत्ते पर हरियाली, फूल-फूल पर प्रेम पराग… सत रंग चूनर नव रंग पाग। पवन ...
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वो सपने सुनहरे भविष्य के हमने, किस आस पर किस सहारे पे देखे। वो शक्ति वो प्रेरणा आपकी थी, एक हारे हुए मन का बल आपसे था। ओ कान्हा! जब-जब मानव मन हारा, तब-तब तुमने भरा जोश व दिया सहारा।
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क्या भारत मेरा देश नहीं है? क्या मैं भारत का लाल नहीं हूं? क्यों तन पर चिथड़े हैं मेरे? क्यों मन मेरा रीता उदास है? क्यों ईश्वर मुझसे छिपा हुआ है? क्यों जीवन बोझ बना हुआ है? Desh Bhakti Kavita in Hindi
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Poem on 15 August कहते थे बरसों पहले तुम हैं हिन्दी-चीनी भाई-भाई, फिर सीमा पर चुपके-चुपके किसने थी आग लगाई। फेंगशुई का बहाना करके क्यों अंधविश्वास फैलाया, नकली और घटिया चीजों का भारत में जाल बिछाया। लड़ियां, घड़ियां और पटाखे, टीवी व एसी दे गए, सस्ती ...
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यह अनमोल जिंदगी, इसकी अपनी पहचान है, जब इसने जन्म लिया, पतन हुआ गुलामी का, यह एक गर्वित एहसास है आजादी का, इसका अपना ठोस अस्तित्व है संसार में, यह जिंदगी सफल है, बिंदास मुस्कुराती है, चाय संग आलस में पांव पसार सुस्ताती है...
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वर्ष 2022 में भारत अपनी स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो अमृत महोत्सव के नाम से जाना जा रहा है। इस अवसर पर विदेशों में बसे भारतीय कवियों द्वारा एक काव्य-संग्रह का प्रकाशन किया जा रहा है, जिसे राष्ट्र-वंदन के अनूठे दस्तावेज के रूप में 'भारत ...
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Poem on Bharat Maa सीता-सा आह्वान कर, तुम्हारी छवि मन में उतारूं, मेरे विश्वास का तिनका जिसे थाम मैं प्रार्थना करती, किसी दिन जब भाग्य में होगा, दाना-पानी तेरे आंगन में, मैं लौट, लौटा लाऊंगी बचपन कि यह दो तरफा जिंदगी, अब जी नहीं जाती !
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Azadi Ka Amrit Mahotsav भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्षों के पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे 'अमृत महोत्सव' के अवसर पर अमेरिका से एक 'भारत काव्य पीयूष' नामक काव्य संग्रह प्रकाशित हो रहा है। और उस काव्य संग्रह में रेखा भाटिया की 2 कविताओं का चयन ...
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Raksha bandhan 2022 : 11 अगस्त 2022 गुरुवार को रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। भाई बहन के इस त्योहार को राखी भी कहते हैं। संपूर्ण भारत में इस पर्व को मनाया जाने की परंपरा भिन्न भिन्न है। हालांकि कुछ कॉमन रीति रिवाज भी है। आओ जानते हैं कि राक्ष का यह ...
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Raksha bandhan par bhadra ka saya kab hai : 2022 में श्रावण पूर्णिमा, 11 अगस्त 2022 गुरुवार को मानना चाहिए या नहीं? इस विषय में कुछ लोगों का कहना है कि उस दिन ज्योतिष के अनुसार या यह कहें कि विद्वानों द्वारा पंचांग अनुसार भद्रा है, जो कि अशुभ है।
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फ्रेंडशिप डे पर कविता : कड़कती धूप में गन्ने का रस जैसे, सर्दियों में चाय की गरम सेंक जैसे, जैसे रसमलाई नरम जैसे पकौड़े करारे है दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं, दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं, दनदनाती बारिश में छाते की तरह, उबड़-खाबड़ रास्तों में जूतों की ...
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एक दीवाना था, सनसनाती बिजलियों को मस्ती में छेड़ा था, तूफानों की बांहों को कस के मरोड़ा था, तमतमाते शोलों को हाथों में सजाया था मंजिल की लौ छूने वो परवाने सा मचला था,
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मेरी भारत माता याद तो बहुत आती है, आंखें भी भर जाती हैं, दूर हूं तुझसे इतनी कि तेरी, सीमा भी नजर न आती है, तू तो रही है सदा से आरजू मेरी, मेरी भारत माता, तू तो बसी है मेरे मन में पर क्या करूं यहां से तुझे न देखा जाता...
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रह रह कर मन उदास हो उठता है, एक अंधेरे कोने में सिमटने लगता है हजार दुख छिपाकर एक खुशी मनाएं कैसे, मां ठीक है लेकिन मामा चले गए
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tulsidas jayanti 2022 तुलसीदास एक महान महाकवि हैं, उन्होंने रामचरित मानस जैसे ग्रंथ की रचना करके भारतीय इतिहास में अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके लेखन की सूक्ष्मता को अत्यंत पैनी एवं गंभीर दृष्टि से देखा जाए तो जीवन की गहराइयों का वास्तविक अर्थ ...
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लंदन। ब्रिटेन की सरकारी टकसाल ने गणेश चतुर्थी के पहले भगवान गणेश की आकृति वाली 24 कैरट सोने की एक छड़ जारी की है। इसे भारतीय पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर बनाया गया है। टकसाल द्वारा जारी होने वाली सोने की छड़ों की कड़ी में यह एक नई पेशकश है।
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