‘मोदी’ सरकार में 7 बड़े फैसले जिन्‍होंने बदल दी देश की दशा और दिशा

narendra modi
साल 2014 में नरेंद्र मोदी सत्‍ता में आए, इसके बाद उनकी सरकार के अंर्तगत ऐसे काम किए गए या ऐसे फैसले लिए गए, जिन्‍होंने बहुत हद तक देश की दशा और दिशा को तय किया। आइए जानते हैं क्‍या है वो 7 बडे फैसले जो मोदी कार्यकाल में लिए गए।

नोट बंदी: 8 नवंबर 2016
प्रधानमंत्री मोदी ने टीवी पर आकर कहा कि आज रात से 500 और 1000 रुपए के नोट बेकार हो जाएंगे। इन्हें बैंकों में जमा करने की छूट मिली। सरकार का पूरा जोर डिजिटल करेंसी बढ़ाने और डिजिटल इकोनॉमी बनाने पर शिफ्ट हो गया। मिनिमम कैश का कॉन्सेप्ट आया।

प्रधानमंत्री के फैसले से एक ही झटके में 85% करेंसी कागज में बदल गई। बैंकों में पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट जमा हो सकते थे। सरकार ने 500 और 2000 के नए नोट जारी किए। इसे हासिल करने पूरा देश ही ATM की लाइन में लग गया। नोटबंदी के 21 महीने बाद रिजर्व बैंक की रिपोर्ट आई कि नोटबंदी के दौरान रिजर्व बैंक में 500 और 1000 के जो नोट जमा हुए, उनकी कुल कीमत 15.31 लाख करोड़ रुपए थी। नोटबंदी के वक्त देश में कुल 15.41 लाख करोड़ मूल्य के 500 और हजार के नोट चल रहे थे। यानी, रिजर्व बैंक के पास 99.3% पैसा वापस आ गया।

जीएसटी: 1 जुलाई 2017
पहले हर राज्य अपने अलग-अलग टैक्स वसूलता था। अब सिर्फ वसूला जाता है। आधा टैक्स केंद्र सरकार को जाता है और आधा राज्यों को। वसूली केंद्र सरकार करती है। बाद में राज्यों को पैसा लौटाती है।

एयर स्‍ट्राइक: 26 फरवरी 2019
आजादी के बाद पहली बार भारत ने दुश्मन की सीमा में घुसकर उसे सबक सिखाया। कुछ दिन बाद हुए लोकसभा चुनाव में भी मोदी सरकार को बहुत फायदा हुआ। मोदी सरकार फिर से सत्ता में लौटी। 1971 के युद्ध के बाद पहली बार भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की थी। आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा लांघी थी। पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर एयरस्ट्राइक के वक्त पहली बार ऐसा हुआ जब युद्ध की स्थिति नहीं होते हुए भी आतंकियों को सबक सिखाया।

सीएए: 10 जनवरी 2020
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम (हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और इसाई) प्रवासियों को नागरिकता देता है। पहले इन लोगों को भारत की नागरिकता पाने के लिए भारत में 11 साल रहना होता था। नागरिकता संशोधन बिल के बाद ये अवधि 11 साल से घटाकर 6 साल हो गई।

बैंकों का विलय: 1 अप्रेल 2020


दस सरकारी बैंकों का विलय करके चार बड़े बैंक बनाने का ऐलान हुआ। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में विलय किया गया। सिंडिकेट बैंक को केनरा बैंक और इलाहाबाद बैंक को इंडियन बैंक में मिलाया गया। आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से जोड़ने का ऐलान किया गया। इसके साथ IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन को भी सरकार ने मंजूरी दी।

जनता कर्फ्यू: 22 मार्च 2020
जनता कर्फ्यू 22 मार्च 2020 यानी रविवार को लगाया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मार्च 2020 को रात आठ बजे देश को संबोधित किया था। पीएम मोदी की इस अपील का असर ये हुआ था कि 24 घंटे के लिए पूरे देश में सन्नाटा पसरा था, शहर हो या गांव, सोसाइटी हो या दफ्तर, हर जगह सिर्फ सन्नाटा ही था।

वैक्‍सीन महाअभि‍यान: 16 जनवरी 2021
जून 2021 को देशभर में शुरु हुए कोरोना वैक्सीन अभियान के तहत पहले ही दिन 80 लाख लोगों को टीका लगाया गया। ये अपने आप में एक रिकॉर्ड रहा। इसके बाद वैक्‍सीनेशन के अलग अलग चरण चलते रहे। जिनमें देशभर में राज्‍यों ने अपनी अपनी योजना के मुताबि‍क केंद्र की मोदी सरकार के मार्गदर्शन में यह अभि‍यान चलाया जो अब तक जारी है।



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