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शारदीय नवरात्रि 2021 में ये 9 गलतियां भूलकर भी न करेंगे तो होगा शुभ

रविवार,सितम्बर 26, 2021
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व्रत ही तप है। यह उपवास भी है। हालांकि दोनों में थोड़ा फर्क है। व्रत में मानसिक विकारों को हटाया जाता है तो उपवास में शारीरिक। मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह के संयम का नवरात्रि में पालन करना जरूरी है अन्यथा आप नवरात्रि में व्रत या उपवास ना ही रखें ...
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नवरात्रि में माता दुर्गा के 9 रुपों की पू्जा होती है। इसीलिए नवरात्रि के इस पर्व को नवदुर्गा भी कहते हैं। आओ जानते हैं माता के इन 9 रुपों के 9 रहस्य। जो महिल या पुरुष माता के इन 9 रूपों के रहस्य को समझ लेते हैं, उसका जीवन सफल हुआ समझो।
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हिन्दू धर्म में उपवास का बहुत महत्व है। आपको तय करना चाहिए कि आपको किस तरह के उपवास रखना चाहिए। एकादशी, प्रदोष, चतुर्थी, सावन सोमवार या नवरात्रि आदि। यदि आप चाहते हैं कि में नवरात्रियों के ही उपवास रखूं तो यह वर्ष में 36 होते हैं। यह बहुत ही ...
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देवी दुर्गा कवच का पाठ हिंदी में प्रस्तुत है...इस पाठ से शरीर के समस्त अंगों की रक्षा होती है, यह पाठ महामारी से बचाव की शक्ति देता है,यह पाठ सम्पूर्ण आरोग्य का शुभ वरदान देता है...यह अत्यंत गोपनीय पाठ है इसे पूरी पवित्रता से किया जाना चाहिए...
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वर्ष 2021 में 11 से 18 जुलाई तक गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों तक माता भगवती को अपराजिता का फूल अर्पित कर बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें।
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इस वर्ष आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 11 जुलाई 2021, रविवार से हो रहा है। यह पर्व रविवार, 18 जुलाई 2021 तक मनाया जाएगा। अगर आप किसी तरह की तंत्र विद्या में न जाकर सामान्य
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गुप्त नवरात्रि से जुड़ी प्राचीन कथा के अनुसार एक समय ऋषि श्रृंगी भक्तजनों को दर्शन दे रहे थे। अचानक भीड़ से एक स्त्री निकलकर आई और करबद्ध होकर ऋषि श्रृंगी से बोली कि मेरे पति दुर्व्यसनों से सदा घिरे रहते हैं
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आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस वर्ष यह पर्व 11 जुलाई 2021 रविवार से आषाढ़ शुक्र प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो हुआ जो आषाढ़ शुक्ल नवमी अर्थात 18 जुलाई 2021 रविवार तक रहेगा। आषाढ़ माह में प्रकृति हरिभरी हो जाती है ...
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दिनांक 11 जुलाई, दिन रविवार से गुप्त (आषाढ़) नवरात्रि प्रारंभ होने जा रही है। हमारे सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। यहां पढ़ें गुप्त नवरात्रि घटस्थापना के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, मंत्र और जरूरी जानकारी ...
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इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व रविवार, 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। यहां सभी पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं पवित्र श्री दुर्गा चालीसा। 9 दिनों तक इसके नित्य पाठ से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और हर तरह के संकट दूर करती है।
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मां दुर्गा की आराधना में सभी राशियों के लिए कमल, गुडहल, गुलाब, एवं कनेर प्रजातियों के सभी पुष्प शुभ माने गए हैं। इन पुष्पों के द्वारा का पूजन करने से देवी मां को प्रसन्न किया जा सकता है।
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आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। गुप्त नवरात्रि में प्रलय एवं संहार के देव महादेव एवं मां काली की पूजा का विधान है। गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त सिद्धियों को अंजाम देते हैं
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आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस वर्ष यह पर्व 11 जुलाई 2021 रविवार से आषाढ़ शुक्र प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है जो आषाढ़ शुक्ल नवमी अर्थात 18 जुलाई 2021 रविवार तक रहेगा।
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इस माह की दिनांक 11 जुलाई, दिन रविवार से गुप्त (आषाढ़) नवरात्रि प्रारंभ होने जा रही है। हमारे सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। हिन्दू वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ, मासों में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया ...
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आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस वर्ष यह पर्व 11 जुलाई 2021 रविवार से आषाढ़ शुक्र प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है जो आषाढ़ शुक्ल नवमी अर्थात 18 जुलाई 2021 रविवार तक रहेगा। आओ जानते हैं कि गुप्त नवरात्रि क्या ...
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गुप्त नवरात्रि तुरंत फलदायक पर्व है। इस बार 11 जुलाई 2021 से गुप्त नवरात्रि आरंभ हो रही है। कोई व्यक्ति यदि महाविद्याओं के मंत्रों को अपने शुभ गुप्त उद्देश्यों या इच्छाओं की प्राप्ति
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11 जुलाई से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व पर शुरू हो रहा है। मान्यता है कि नवरात्रि के समय पूरे 9 दिनों तक प्रतिदिन सुबह-शाम देवी मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद
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मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं।
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मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं सिद्धिदात्री। नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी तिथि को देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। पढ़ें आरती-
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