मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण के बिना होंगे पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव, SC ने 2 हफ्ते में चुनावी अधिसूचना ‌जारी करने के दिए निर्देश

विकास सिंह| पुनः संशोधित मंगलवार, 10 मई 2022 (11:14 IST)
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भोपाल। मध्यप्रदेश में बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव होंगे। आज ने चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर लगाई गई याचिका ‌पर सुनवाई करते हुए राज्य में तुरंत चुनाव कराने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव प्रकिया पूरी करने के निर्देश दिए। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिन के अंदर पंचायत एवं नगर पालिका के चुनाव की अधिसूचना जारी करने के सरकार को निर्देश दिए।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट रखी थी जिसमें पंचायत ‌चुनाव में 35 फीसदी आरक्षण की मांग की गई थी।

दरअसल पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की जारी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता लगभग 48 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में कुल मतदाताओं में से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के मतदाता घटाने पर शेष मतदाताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता 79 प्रतिशत है। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक ओबीसी के वयस्क मताधिकार लगभग 70 वर्ष हो चुके हैं।
आयोग की क्या थी अनुशंसाएं
-राज्य सरकार त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों के सभी स्तरों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कम से कम 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित करे।
-राज्य सरकार समस्त नगरीय निकाय चुनावों के सभी स्तरों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कम से कम 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित करे।
-त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों एवं नगरीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण सुनिश्चित किये जाने हेतु संविधान में संशोधन करने के लिए राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाये।
-राज्य शासन द्वारा सर्वे उपरांत चिन्हांकित कर जनसंख्या के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग बहुल जिला एवं ब्लॉक को "अन्य पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र" घोषित किया जाये तथा उन क्षेत्रों में विकास की विभिन्न योजनाएं लागू की जाये, बस्ती विकास जैसे कार्य किए जायें।
-मध्यप्रदेश राज्य की पिछड़ा वर्ग की सूची में से जो जातियाँ केन्द्र की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित नहीं है, उन जातियों को केन्द्र की सूची में जोड़े जाने का प्रस्ताव मध्यप्रदेश शासन द्वारा केन्द्र शासन को प्रेषित किया जाये।
-केन्द्र की पिछड़ा वर्ग की सूची में से जो जातियां मध्यप्रदेश राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित नहीं है, मध्यप्रदेश शासन द्वारा उन जातियों को राज्य की सूची में जोड़ा जाए।



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