PoK में सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर म्यांमार में आतंकियों के खात्मे तक, जनरल बिपिन रावत ने कई बड़े ऑपरेशंस को दिया था अंजाम

पुनः संशोधित बुधवार, 8 दिसंबर 2021 (19:19 IST)
तमिलनाडु के कुन्नूर में सेना के हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का निधन हो गया। देश के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। आज हर देशवासी नम आंखों से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है।
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जनरल बिपिन रावत को ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्र और आतंकवादरोधी अभियानों की कमान संभालने का खासा अनुभव था। उनकी अगुवाई में भारतीय सेना ने कई बड़े ऑपरेशंस को सफलतापूवर्क अंजाम दिया था। जनरल बिपिन रावत का परिवार पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहा है। उनके पिता सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मणसिंह रावत 1988 में उप सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
जवाबी कार्रवाई में एक्सपर्ट : बिपिन रावत को आर्मी में ऊंचाई पर जंग लड़ने और काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन यानी जवाबी कार्रवाई के एक्सपर्ट के तौर पर जाना जाता है। वे ऊंचाई पर लड़ने के एक्सपर्ट रहे। जनरल बिपिन रावत ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में चैप्टर-7 मिशन में बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड की कमान संभाली थी।
म्यामांर में आतंकियों का सफाया : जनरल बिपिन रावत ने पूर्वोत्तर में आतंकवाद को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जून 2015 में मणिपुर में एक आतंकी हमले में 18 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद 21 पैरा कमांडो ने सीमा पार जाकर में आतंकी संगठन एनएससीएन-के कई आतंकियों का खात्मा किया था। तब 21 पैरा थर्ड कॉर्प्स के अधीन थी। इसके कमांडर बिपिन रावत ही थे।
की कमान : भारतीय सेना 29 सितंबर 2016 को पाकिस्‍तान में बसे आतंकी शिविरों को ध्‍वस्‍त करने के लिए सर्जिकल स्‍ट्राइक की थी। 2016 को भारतीय सेना ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर कई आतंकी शिविरों को ध्वस्त करते हुए कई आतंकियों को मार गिराया था।
उरी में सेना के कैंप और पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए हमले में कई जवान शहीद हो जाने के बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की थी। जनरल बिपिन रावत के उप सेना प्रमुख बनने के एक महीने के अंदर ही सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था।

मिले यह पुरस्कार : बिपिन रावत उन्हें वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए पुरस्कृत भी किया गया, जिनमें यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम, सीओएएस प्रशस्ति शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करते हुए उन्हें दो बार फोर्स कमांडर प्रशस्ति पुरस्कार प्राप्त हुए। उन्हें दो मौके पर सीओएएस कमेंडेशन और आर्मी कमेंडेशन भी दिया जा चुका था।



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