1 साल के भीतर खत्म हो नक्सल समस्या, गृहमंत्री अमित शाह ने 10 राज्यों के CM से किया आग्रह

Last Updated: सोमवार, 27 सितम्बर 2021 (08:19 IST)
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री ने रविवार को नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस समस्या के समाधान के लिए प्राथमिकता देने का किया ताकि एक साल के भीतर इस खतरे को खत्म किया जा सके। उन्होंने नक्सलियों तक धन के प्रवाह को रोकने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने को भी कहा।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 10 नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्य के मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है तथा इसे तेज और निर्णायक बनाने की जरूरत है। शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) हिंसा के कारण मरने वालों की संख्या एक साल में घटकर 200 हो गई है।
बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाग लिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन बैठक में शामिल नहीं हुए, लेकिन इन चार राज्यों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।


गृहमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों से अगले एक साल तक वामपंथी उग्रवाद की समस्या को प्राथमिकता देने का आग्रह किया ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए दबाव बनाने, गति बढ़ाने और बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। शाह ने कहा कि नक्सलियों की आय के स्रोतों को बेअसर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की एजेंसियों को मिलकर व्यवस्था बनाकर इसे रोकने का प्रयास करना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान माओवादियों के मुख्य संगठनों के खिलाफ कार्रवाई, सुरक्षा के क्षेत्र में खालीपन को भरने और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) एवं राज्य पुलिस द्वारा ठोस कार्रवाई जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के स्तर पर नियमित समीक्षा की जाती है तो निचले स्तर पर समन्वय की समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी।


शाह ने कहा कि जिस समस्या के कारण पिछले 40 वर्षों में 16 हजार से अधिक नागरिकों की जान गई हैं, उसके खिलाफ लड़ाई अब अंत तक पहुंची है और इसकी गति बढ़ाने और इसे निर्णायक बनाने की जरूरत है। वामपंथी उग्रवाद संबंधित हिंसा की घटनाएं 2009 में 2,258 के उच्चतम स्तर से 70 प्रतिशत कम होकर वर्ष 2020 में 665 रह गई हैं। मौतों की संख्या में भी 82 प्रतिशत की कमी आई है जो वर्ष 2010 में दर्ज 1,005 के उच्चतम आंकड़े से घटकर वर्ष 2020 में 183 रह गई हैं।
माओवादियों के प्रभाव वाले जिलों की संख्या भी वर्ष 2010 में 96 से वर्ष 2020 में घटकर सिर्फ 53 जिलों तक सीमित रह गई है। माओवादियों को अब सिर्फ कुछ ही इलाकों में 25 जिलों तक सीमित कर दिया गया है, जो कि देश के कुल वामपंथी उग्रवाद की 85 प्रतिशत हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि इसको खत्म किए बिना न तो लोकतंत्र को नीचे तक प्रसारित कर पाएंगे और न ही अविकसित क्षेत्रों का विकास कर पाएंगे, इसलिए अब तक जो हासिल किया है उस पर संतोष करने के बजाय जो बाकी है, उसे प्राप्त करने के लिए गति बढ़ाने की जरूरत है।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती पर होने वाले राज्यों के स्थायी खर्च में कमी लाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में सीएपीएफ की तैनाती पर होने वाले राज्यों के खर्च में लगभग 2900 करोड़ रुपए की कमी आई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने निरंतर इसकी समीक्षा की है और लगातार हम सबका मार्गदर्शन कर रहे हैं।
शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के विकास के लिए केंद्र सरकार ने कई विकासात्मक पहल की हैं, जिनमें 17,600 किलोमीटर सड़कों को मंजूरी शामिल है, जिसमें से 9,343 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में दूरसंचार सुविधाओं में सुधार के लिए 2,343 नए मोबाइल टावर लगाए गए हैं और अगले 18 महीनों में 2,542 अतिरिक्त टावर लगाए जाएंगे। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में लोगों के वित्तीय समावेशन के लिए 1,789 डाकघर, 1,236 बैंक शाखाएं, 1,077 एटीएम और 14,230 बैंकिंग प्रतिनिधि खोले गए हैं और अगले एक वर्ष में 3,114 डाकघर और खोले जाएंगे। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) खोलने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों के लिए कुल 234 ईएमआरएस स्वीकृत किए गए हैं, इनमें से 119 कार्यरत हैं।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने केंद्र से इस बात का अध्ययन करने का आग्रह किया कि देश में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कितने बच्चे नीट और जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफल होते हैं। आंध्रप्रदेश की गृहमंत्री मेकाथोती सुचरिता ने मांग की कि केंद्र सड़क संपर्क और दूरसंचार नेटवर्क में और सुधार करे और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अधिक एकलव्य स्कूल और डाकघर स्थापित करे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, गिरिराज सिंह, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय ने बैठक में भाग लिया।(भाषा)



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