केरल में निपाह संक्रमण से 12 साल के बच्चे की मौत, जानिए इस खतरनाक वायरस से जुड़ी खास बातें...

Last Updated: रविवार, 5 सितम्बर 2021 (12:37 IST)
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कोझिकोड। की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने रविवार को बताया कि के संक्रमण से पीड़ित 12 वर्षीय लड़के की यहां के एक अस्पताल में मौत हो गई है। पीड़ित लड़के के शरीर से नमूने लिए गए थे जिन्हें पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा गया था जहां उनमें निपाह वायरस की मौजूदगी की पुष्टि हुई।

वीना जार्ज ने बताया कि दुर्भाग्य से लड़के की सुबह पांच बजे मौत हो गई। बच्चे की हालत कल रात को बेहद नाजुक थी। हमने कल रात को कई दल बनाए थे और उन्होंने बच्चे के संपर्क में आए लोगों को खोजना शुरू कर दिया है। बच्चे के संपर्क में आए लोगों को पृथक करने के लिए कदम उठाए गए हैं।

भारत में इससे पहले 2001 में निपाह वायरस पाया गया था। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में इसके 66 मरीज पाए गए थे। इनमें से 45 मरीजों की मौत हो गई थी। केरल के कोझिकोड में 19 मई 2018 को का पहला मामला सामने आया था। एक जून 2018 तक इस संक्रमण के 18 मामले सामने आए थे तथा 17 लोगों की मौत हो गई थी।
कैसे होता है संक्रमण?
चमगादड़ों को निपाह वायरस का नैसर्गिक वाहक माना जाता है। चमगादड़ों द्वारा खाए गए या चाटे गए फलों को इंसान खा ले तो वह संक्रमित हो जाता है। निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर भी संक्रमण का खतरा है। विशेषज्ञों के मुताबिक चमगादड़ों के अलावा सुअरों के संपर्क में आने से भी निपाह वायरस के संक्रमण का खतरा होता है। इंसानों में निपाह वायरस का संक्रमण आंखें, नाक और मुंह के रास्ते होता है।
यह वायरस चमगादड़ों से चमगादड़ों में नहीं फैलता है। यानी एक चमगादड़ से दूसरे चमगादड़ में यह संक्रमण नहीं होता है। क्योंकि एक चमगादड़ में निपाह का संक्रमण होते ही संपर्क मे आने वाले चमगादड़ों में ‘एंटीबॉडीज’ तैयार हो जाता है।



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