पॉलिसी रेट बढ़ाना कोई 'देशद्रोह नहीं, भारतीयों को फायदा पहुंचाने वाला ही काम है, RBI को पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की सलाह

Raghuram Rajan
Last Updated: सोमवार, 25 अप्रैल 2022 (14:58 IST)
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नई दिल्ली, देश में बढ़ती महंगाई के बीच पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन का अहम बयान सामने आया है। उन्‍होंने पॉलिसी रेट को लेकर खुलकर अपनी बात कही है। इतना ही नहीं राजन ने आरबीआई (RBI) को अतीत से सबक लेने की भी सलाह दी है।

दरअसल, पिछले दो सालों से स्थिर रखे जा रहे बेंचमार्क पॉलिसी रेट को बढ़ाए जाने की मांग उठ रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि केंद्रीय रिजर्व बैंक (RBI) को आर्थिक स्थिरता के लिए रेट बढ़ाने पड़ेंगे। ऐसे में आरबीआई के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन का बयान सामने आया है।

उन्होंने कहा कि आरबीआई को कभी न कभी तो रेट बढ़ाने ही पड़ेंगे। साथ ही उन्होंने 'अतीत से सबक' लेने की सलाह भी दी।

LinkedIn पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए पॉलिसी रेट बढ़ाना कोई 'देशद्रोही काम' नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता में निवेश है।

उन्होंने कहा कि महंगाई के खिलाफ लड़ाई कभी खत्म नहीं होती, और इससे बहुत मदद मिलेगी अगर केंद्रीय बैंक याद कर ले कि पिछली बार क्या हुआ था।

क्‍या हुआ था 2016 में?
राजन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि नेताओं और नौकरशाहों को ये समझना चाहिए कि 'पॉलिसी रेट में बढ़ोतरी करना विदेशी निवेशकों को फायदा पहुंचाने के लिए कोई 'देशद्रोही गतिविधि' नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता के लिए किया गया निवेश है और इसका सबसे ज्यादा फायदा भारतीय नागरिकों को होगा'

उन्होंने कहा, 'पॉलिसी रेट बढ़ाना लोगों को पंसद नहीं है। हालांकि, ये जरूरी है कि आरबीआई वो करे, जो उसे करने की जरूरत है'

अपने कार्यकाल (सितंबर 2013-सितंबर 2016) के दौरान की बात करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उस वक्त भारत मुद्रा संकट से घिरा हुआ था और मुद्रास्फीति दर 9.5 फीसदी पर पहुंच गई थी।

उन्होंने कहा कि तब आरबीआई ने महंगाई पर काबू पाने के लिए सितंबर, 2013 में रेपो रेट को 7.25 पर्सेंट से 8 पर्सेंट पर कर दिया था और जब इंफ्लेशन घटा तो रेपो रेट में 150 बेसिस पॉइंट की कटौती करके इसे 6.5 पर्सेंट पर कर दिया गया था।

पूर्व गवर्नर ने कहा कि उनके इस फैसले से अर्थव्यवस्था स्थिर हो सकी थी और वृद्धि दर जून-अगस्त, 2013 के 5.91 फीसदी के मुकाबले, जून-अगस्त 2016 में 9.31 फीसदी हो गई थी।

इससे फॉरेक्स रिजर्व में भी सुधार आया। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस वृद्धि और स्थिरता में बस आरबीआई का हाथ नहीं था और भी कई दूसरे फैक्टर्स काम कर रहे थे।बता दें आरबीआई ने घरेलू वृद्धि को सपोर्ट देने के लिए महामारी के इन दो सालों में एक बार भी पॉलिसी रेट में कोई संशोधन नहीं किया है। वहीं, बढ़ती महंगाई के बीच केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति अनुमान को भी 4.5 फीसदी से बढ़ाकर 5.7 फीसदी पर कर दिया है। वहीं, वृद्धि दर अनुमान को भी 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 कर दिया गया है।



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