पाक आतंकी शिविरों को नष्ट करे-भारत

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
ने मंगलवार को पर मुंबई आतंकवादी हमलों से ध्यान बँटाने के प्रयास के तहत युद्ध उन्माद पैदा करने का आरोप लगाते हुए माँग की कि पड़ोसी देश को आतंकवादी शिविरों को नष्ट करना चाहिए जिनकी संख्या 30 से ज्यादा है और भारतीय कानून के अपराधियों को सौंपना चाहिए।


भारत के अपनी सेना और वायुसेना को गतिशील बनाने के इस्लामाबाद के दावे को खारिज करते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने यहाँ कहा कि ऐसी गतिशीलता का कोई सवाल नहीं है। सिर्फ सामान्य शीतकालीन कार्रवाई की गई है, जो हर साल होती है।

पाकिस्तान से किसी तरह के उन्माद या महौल बनाने की जरूरत नहीं होने की बात कहते हुए मंत्री ने कहा कि कोई तनाव नहीं है क्योंकि भारत वीजा नियमों के उल्लंघन में हिरासत में रखे गए करीब 67 पाकिस्तानियों को रिहा कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आगे पूर्व की तरह भारत और पाकिस्तान नववर्ष के दिन परमाणु विश्वास बढ़ाने के बारे में सूचना का आदान-प्रदान करेंगे।

मुखर्जी इस बारे में स्पष्ट थे कि भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान से क्या चाहता है। आतंकवादी शिविरों को नष्ट करना आतंकवादी हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई और प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) प्रमुख मसूद अजहर जैसे भारतीय कानूनों के अपराधियों को सौंपना।


पाकिस्तान से भारतीय उच्चायुक्त को वापस बुलाने और पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने संबंधी सुझावों से असहमति जताते हुए मुखर्जी ने कहा कि इस्लामाबाद के साथ सामान्य कामकाज नहीं हो सकता। मैं महसूस करता हूँ कि अब भी हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जरिये कूटनीतिक दबाव बनाना जारी रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत अब मुंबई आतंकवादी हमलों की अपनी जाँच पूरी करने के अंतिम दौर में है। उसकी पाकिस्तान और अन्य के साथ साझेदारी की जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि पाकिस्तान को भारत से मिलने वाले सबूत पर कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा और इसका विश्वसनीय सबूत होना चाहिए कि वे इस पर कार्रवाई कर रहे हैं।

सभी विकल्प खुले : भारत के अपने सभी विकल्प खुला रखने के रुख पर कायम रहते हुए विदेशमंत्री ने याद दिलाया कि उन्होंने संसद में कहा था कि युद्ध समाधान नहीं है। भारत कूटनीति के जरिये पाकिस्तान पर दबाव जारी रखेगा और हम देखना चाहेंगे कि इसका अंतिम नतीजा क्या आता है।
राजनयिक प्रयासों के नाकाम हो जाने के सुझावों को खारिज करते हुए मुखर्जी ने कहा कि नई दिल्ली पूरी दुनिया में जागरूकता पैदा करने में सफल रही है। उन्होंने कहा हमें ये प्रयास करने होंगे वे कितने भी श्रमसाध्य क्यों न हों, हमें पाकिस्तान पर दबाव बनाना होगा।

मुखर्जी ने कहा कि पाकिस्तान इनकार करने की मुद्रा में बना हुआ है और अब तक भारत को अपनी माँगों के संदर्भ में उसकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं दिखी है। उन्होंने सवाल किया यदि वे सिर्फ इनकार करते हैं और इनकार की मुद्रा में चले जाते हैं तो इससे कैसे मदद मिलेगी।
पाक में 30 से ज्यादा आतंकी शिविर : पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों की संख्या के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने खुलासा किया कि उस देश को भारत द्वारा दी गई ताजा सूचना दर्शाती है कि संख्या 30 से अधिक है। कभी-कभी वे अपने नाम बदल लेते हैं कभी-कभी वे अपना ठिकाना बदल लेते हैं, लेकिन व्यक्ति वही होते हैं।

यह पूछे जाने पर कि जिन अपराधियों को भारत चाहता है क्या उन पर पाकिस्तान द्वारा मुकदमा चलाए जाने से नई दिल्ली संतुष्ट हो जाएगी, मुखर्जी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या तक की जाँच पाकिस्तानी अधिकारियों को नहीं सौंपी गई, बल्कि संयुक्त राष्ट्र को दी गई।
मुखर्जी ने कहा कि सवाल यह है कि आतंकवादी गतिविधियों का समाधान कैसे किया जाए जो हमें नुकसान पहुँचा रही है और जो पाकिस्तान से उभर रही हैं। सवाल यह है कि वे अपने ही वादों को कैसे पूरा करते हैं।

अमेरिकी दूत : भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अमेरिका द्वारा विशेष दूत नियुक्त करने के संकेतों से स्पष्ट असहमति जताते हुए मुखर्जी ने भारत पाक संबंधों में बेहतरी के लिए आज द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है और तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से कोई परिर्वतन नहीं आने वाला है।
कश्मीर चुनाव से सबक ले पाक : जम्मू-कश्मीर के सफल चुनावों और जम्हूरियत की जीत पर मुखर्जी ने कहा कि पाकिस्तान राज्य में हुए चुनावों से सही सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूँ कि पाकिस्तान सही सबक लेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस बात को समझे कि तथाकथित आजादी की माँग और वहाँ को शह देना कोई रास्ता नहीं है।



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