बारह माह में अढ़ाई कोस..!

PTI
पाकिस्तानी आतंकवादी को जिंदा पकड़ने के बावजूद भारत पड़ोसी देश पर माकूल दबाव बनाने में नाकाम ही रहा। आज भी वहाँ सेना और आईएसआई के संरक्षण में आतंकी कैंप चल रहे हैं। हमारी कमजोर विदेश नीति और हर बात के लिए अमेरिका की तरफ ताकने की आदत के चलते पाकिस्तान ने उलटे हम पर ही बलूचिस्तान और वजीरिस्तान में आतंकवाद फैलाने के आरोप मढ़ दिए।

हालाँकि मुंबई में हुए आतंकवादी हमले के बाद देश में बहुत कुछ बदला है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कहें या हमारी सजगता, इसके बाद कोई भी बड़ा आतंकवादी हमला भारत में नहीं हुआ है, लेकिन देश के भीतर माओवादियों और नक्सलियों का बढ़ता जोर किसी से छिपा नहीं है।

माओवादी आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं, जिनके खिलाफ कड़ा कदम उठाने में केन्द्र सरकार भी हिचकिचा रही है। हमले के एक साल बाद भी‍ जिंदा पकड़े गए आतंकवादी अजमल कसाब को सजा नहीं मिल पाई है।

क्या मुंबई हमलों के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुरजोर विरोध दर्ज कराने में सफल हुआ है? क्या पाकिस्तान पर बनाया गया अब तक का दबाव काफी है? क्या भारत आतंकवाद से लड़ने में सक्षम है? क्या हमारी विदेश नीति कारगर है?

WD|
एक बहुत पुरानी कहावत है कि 'नौ दिन चले अढ़ाई कोस'। बीते साल मुंबई में हुए आतंकवादी हमले के मामले में भी कुछ-कुछ ऐसा ही हो रहा है। जब भी 26/11 का मंजर लोगों की आँखों के सामने घूमता है, वे उसे याद कर आज भी सिहर उठते हैं। पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ तीन दिन चले अभियान में 183 लोग मौत के मुँह में समा गए थे।
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