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अपराजिता : 'ललमुनिया' के लिए लौट आओ 'अलबेली...

शनिवार,अक्टूबर 16, 2021
aparajita sharma
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आठ लोगों की जिस तरह मृत्यु हुई सामान्य स्थिति में दुःस्वप्नों में भी उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। जिन्होंने जान गंवाई चाहे किसान संगठन के लोग हों या भाजपा के या केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र के पुत्र आशीष मिश्र का ड्राइवर, सब हमारे ही थे।
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जब तक सही 'रावण' को पहचान कर सही 'समय' पर जलाया नहीं जाता, कैसे सार्थक होगा, शक्ति पूजा के नौ दिनों के बाद आया यह दसवां दिन जिस पर मां सीता की अस्मिता जीती थीं।
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इस पैंडेमिक के दौरान मेंटल हेल्थ पर गहरा असर पड़ा है। 2020 में माइसेंसी द्वारा एक सर्वे के आधार पर US के 75 प्रतिशत और एशिया के 33 प्रतिशत एम्प्लॉय में बर्न आउट के लक्षण दिखे हैं।
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ये मान लेना फिर एक राजनीतिक मासूमियत हो सकती है कि लखीमपुर खीरी प्रकरण को लेकर प्रियंका गांधी (वढेरा) जिस तरह सक्रिय हुईं, वह पीएम नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ और भाजपा से आरपार की लड़ाई है। विश्लेषकों का मंथन यही है कि प्रियंका की शक्ल-ओ-सूरत भले ...
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दुर्गा सप्तशती में कहा गया है कि देवी को देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र व हथियार सौपें थे ताकि असुरों के साथ होने वाले संग्रामों में विजय प्राप्त हो व धर्म सदैव स्थापित रहे, अधर्म का नाश हो व सद्मार्ग की गति बनी रहे। देवी के सर्वाधिक अर्थात् अट्ठारह ...
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उनमें मुझे हमेशा देवी के नौ रूपों के दर्शन होते रहे। ‘शैल पुत्री’ के रूप में शक्तिशाली और साहसी. परिवार के सभी संकटों, उतार चढ़ाव को मजबूती से सकारात्मकता से स्वीकार कर बिना घबराए सामना करने की अद्भुत शक्ति।
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ऐसा नहीं है कि स्त्रियों का सदा ही सम्मान होते रहा है या सदा ही अपमान होता रहा है। जैसे ही नवरात्रि आती है भक्तों की श्रद्धा सारी सीमाएं पार करती हुई नौ स्वरूपों की आराधना में सारी सिद्धि प्राप्तियों के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देती हैं।
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कई ऐसे प्रोडक्ट होते हैं, जिनकी डायरेक्ट ऐडवर्टाइजमेंट पर प्रतिबंध होता है। इनमें वे प्रोडक्‍ट शामिल हैं, जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है। आमतौर पर इनमें शराब, सिगरेट और पान मसाला जैसे प्रोडक्ट हैं। ऐसे में इन प्रोडक्ट के विज्ञापन के लिए सरोगेट ...
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नुसरत के परिवार में कव्वाली सदियों से गाई जा रही थी, लेकिन ऐसी कव्‍वाली किसी ने नहीं गाई कि उसे पूरी दुनिया ही जानने लगे। नुसरत को अपनी कव्‍वाली और अपने इसी अंदाज के लिए पूरी दुनिया में सराहा और जाना गया, चाहे वो कव्‍वाली को समझने वाला हो या न हो।
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लोक नायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की 11 अक्टूबर को जयंती है। सोचा जा सकता है कि वे आज अगर हमारे बीच होते तो क्या कर रहे होते! 1974 के ‘बिहार आंदोलन’ में जो अपेक्षाकृत छोटे-छोटे नेता थे, आज वे ही बिहार और केंद्र की सत्ताओं में बड़ी-बड़ी राजनीतिक ...
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बालिका दिवस के साथ ही नजर भी उतार लें इनकी क्योंकि आप नहीं जानते कि ये शिकार हैं बुरी नजरों की। जनगणना आंकड़ों के अनुसार बाल लिंगानुपात 1991 के 945 से गिरकर 2001 में 927 हो गया और इसमें फिर 2011 में गिरावट आई और बाल लिंगानुपात 918 रह गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर मामले में आठ अक्टूबर को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए वकील हरीश साल्वे से सवाल किया था कि किसानों की हत्या के आरोप में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को तुरंत गिरफ़्तार क्यों ...
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भारत के स्वर्णिम इतिहास के पन्नों में आज का दिन न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि हर देशवासी के लिए गर्वित करने वाला भी। आज ही के दिन सात साल पहले मध्य प्रदेश के विदिशा में जन्मे एक असाधारण व्यक्तित्व वाले साधारण खांटी भारतीय कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति ...
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लोकतंत्र अकेली सहमति का तंत्र नहीं है। हर बात में सबको सहमत होना ही होगा। यह राजशाही, सामंतशाही या तानाशाही की जीवनी शक्ति तो हो सकती है, पर लोकतंत्र में असहमति की मौजूदगी ही लोकतंत्र को जीवंत बनाती है। सब एक मत हो और एक अकेला व्यक्ति भी असहमत हो तो ...
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केंद्रीय नेतृत्व यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा जो दांव लगाते हैं वही उल्टा पड़ जाता है। कन्हैया कुमार को पार्टी में शामिल कराना भी एक दांव है। जिग्नेश मेवानी ने केवल विधायकी बचाने के लिए कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण नहीं की है, ...
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त्योहारों पर व्यंजन परोसती अन्नपूर्णा के रूप में, श्रृंगारित स्वरूप में वैभवलक्ष्मी बनकर, बौद्धिक प्रतिभागिता दर्ज कराती सरस्वती और मधुर संगीत की स्वरलहरी उच्चारती वीणापाणि के रूप में।
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अगर हमारी वर्तमान पीढ़ी उनके विकास में गतिरोध पैदा करने वाली सामाजिक बुराइयों जैसे गरीबी और असमानता को हराने में नाकाम रहती है, तो हम अपने बच्चों को एक ऐसे रास्ते की ओर धकेल रहे हैं जो अंधकारमय है।
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पंद्रह दिन के आतिथ्य के पश्चात आज पुरखों की विदाई का दिन है.. कि वे इन पंद्रह दिनों हमारे संग रहे ये बात ही कितनी सुखद है.. आदतन उन्होंने अपनी संतति को खूब आशीर्वाद दिए होंगे
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हल्के हाथ से माथे पर छुआ ली गई हो या करीने से सजाई हुई हो, बिंदी लग भर जाए। हर श्रृंगार पर चार चांद लगा देती है।
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