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न मातुः पर दैवतं : देवी के खूबसूरत 9 रूपों वाली मेरी सास

बुधवार,अक्टूबर 13, 2021
चित्र सौजन्य : छाया मिश्र
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ए खुदा बंदों को महसूस हो तेरी मौजूदगी औ ख़ुदाई, इस वास्ते तूने इस ज़मी पर इन्सान की "माँ" बनाई !
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माँ देहरी पर सजती कुंकुम रंगोली है, घर को आलोकित करता निष्कंप दीपक है, अंजुलि से 'आदित्य' को चढ़ता आस्था का अर्घ्य है और चमकते चंद्रमा सा एक शीतल धैर्य है। वह जीवन की पाठशाला की गुरुजी ही नहीं बल्कि चॉक, कलम, पट्‍टी और तड़ातड़ पड़ती छड़ी भी वही है।
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फिर एक मदर्स डे आया है और मैं एक खत लिख रही हूँ...किसे लिख रही हूँ नहीं जानती... किसे कहूं अपने मन की व्यथा? एक तरफ मैं हूँ मां....दूसरी तरफ एक सिस्टम है और बीच में है जिंदगियों को निगलता कोरोना... और हम मना रहे हैं (अन) हैप्पी मदर्स डे”
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मेरी मां मेरी सबसे बड़ी अध्यापक थीं- करुणा, प्रेम, निर्भयता की एक शिक्षक। अगर प्यार एक फूल के जितना मीठा है, तो मेरी मां प्यार का मीठा फूल है।
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मां पर कौन पढ़ता है कविता, कहानी या अन्य साहित्य। पत्नी या प्रेमिका का स्वार्थपूर्ण प्रेम लोगों को पसंद हो सकता है, लेकिन मां का नि:स्वार्थ प्रेम आज की पीढ़ी को पसंद नहीं। उनके दिल में मां के प्रति संवेदनाएं नहीं हैं क्योंकि हमारी शिक्षा और हमारा ...
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मां पर बचपन में एक कहानी पड़ी थी जो मुझे आज भी याद है। जब भी मुझे किसी बात को लेकर मां पर गुस्सा आता है तो मुझे यह कहानी याद आ जाती है। वह लोग जो अपनी मां पर किसी ना किसी बात को लेकर क्रोधित होते रहते हैं। मां से ज्यादा पत्नी या प्रेमिका को महत्व ...
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मां के प्यार और समर्पण को कभी भी जताया नहीं जा सकता है। लेकिन फिर भी एक दिन ऐसा भी है जो पूरी तरह मां को समर्पित होता है, इस दिन को मातृत्व दिवस (मदर्स डे) कहते हैं।
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मां शब्द अत्यंत प्रिय और बहुव्यापक है। जन्मदात्री मां गर्भ धारण और पोषण करती है। इसलिए वह श्रेष्ठ है, किंतु जो पालन पोषण करती है उनका महत्व सौ गुना अधिक है।
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वेदों में 'मां' को 'अंबा','अम्बिका','दुर्गा','देवी','सरस्वती','शक्ति','ज्योति','पृथ्वी' आदि नामों से संबोधित किया गया है। इसके अलावा 'मां' को 'माता', 'मात', 'मातृ', 'अम्मा', 'अम्मी', 'जननी', 'जन्मदात्री', 'जीवनदायिनी', 'जनयत्री', 'धात्री', ...
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Happy Mothers Day : जितना खास है यह दिन, उतनी ही रोचक है इस दिन को मनाने की शुरुआत भी। अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने की अलग-अलग कहानी है। जानिए कब, क्यों और कैसे हुई मदर्स डे मनाने की शुरुआत -
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जानता हूं मां, काटी है तूने कई रातें आंखों में, बस मेरी खुशी की खातिर। अपने बड़े होने के एहसास को मैंने तेरी आंखों में चमकते देखा है। पर तू चिंता न कर, अब मैं बड़ा हो गया हूं। दुनिया की धरती पर अपने पैरों पर खड़ा हो गया हूं। ये जमीन तूने ही तो दी है ...
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मां, तुम्हारी स्मृति, प्रसंगवश नहीं अस्तित्व है मेरा। धरा से आकाश तक
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मां, मां रोते हुए बच्चों का खुशनुमा पलना है, मां, मां मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है।
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कैसे चलते होंगे वे गैरों की अंगुलियां थामकर, जिंदगी जिनकी दूसरों की रहनुमा होती है। खुद गीले में सो, हमें सूखे में सुलाने वाली, वह मां तो खुद ईश्वर का रूप होती है।
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Poem on Mothers Day : ममता की मूरत

बुधवार,मई 5, 2021
मां आपकी उंगली पकड़कर ही तो मैंने चलना सीखा, आपकी ममता के आंचल में मैंने एक गीत लिखा।
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जो भी मैं हूं या होने की उम्मीद है, मैं उसके लिए प्यारी मां का कर्जदार हूं। -अब्राहम लिंकन
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वेद शास्त्रों में तो सोलह प्रकार की माताओं का उल्लेख है। दूध पिलाने वाली (धाय), गर्भ धारण करने वाली, भोजन देने वाली, गुरु पत्नी, ईष्ट देव की पत्नी, सौतेली मां, सौतेली मां की बेटी, सगी बड़ी बहन, स्वामी की पत्नी, सास, नानी, दादी, सगे बड़े भाई की ...
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मां मैं खुश होती हूं जब बनाती हूं बची हुई रोटियों से रोटी पिज़्ज़ा! या जब काट लेती हूं पुरानी कढ़ाई वाली चुन्नी से छोटे-छोटे खूबसूरत स्कार्फ! या जब नया कुछ ना खरीद कर सज्जा बदल पुनरउपयोगी कर लेती हूं पुरानी साड़ियां और गहने!
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मां बनने की आहट ज़िन्दगी में कई बदलाव लाती है बेटा..... सिर्फ शारीरिक ही नहीं..... और भी कई.....। जब अपने परिजनों को ये शुभ सूचना मिलती है तो निश्चय ही उनकी खुशी का पारावार नहीं रहता और उनकी फिक्र तुम्हारे लिये कई गुना बढ़ जाती है। बस.....!
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