व्यापमं घोटाला : पूर्व परीक्षा नियंत्रक की 58.48 लाख की संपत्ति जब्त

Last Updated: मंगलवार, 3 मार्च 2020 (00:28 IST)
इंदौर। मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले के प्रमुख आरोपियों में शामिल एक पूर्व सरकारी अफसर की 58.48 लाख रुपए मूल्य की बेहिसाब संपत्तियों को विशेष अदालत ने सोमवार को जब्त करने का आदेश दिया। ये संपत्तियां लोकायुक्त पुलिस के 6 साल पहले मारे गए छापों से सामने आई थी।
विशेष न्यायाधीश आलोक मिश्रा ने (व्यापमं) के पंकज त्रिवेदी की 58 लाख 48 हजार 260 रुपए मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया। अदालत ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनाए गए मध्य प्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम 2011 के तहत यह फैसला सुनाया।

त्रिवेदी की जब्त संपत्तियों में इंदौर जिले में एक भूखंड और एक कृषि भूमि, भोपाल जिले में एक कृषि भूमि, 4 पहियों वाला एक वाहन और अलग-अलग बैंकों की सावधि जमा (एफडी) योजनाओं में 4.70 लाख रुपए का निवेश शामिल है।

इन संपत्तियों में इंदौर का 39.06 लाख रुपए मूल्य का केवल एक भूखंड त्रिवेदी के नाम पर दर्ज है, जबकि अन्य अचल संपत्तियां व्यापमं घोटाले के आरोपी की पत्नी और बेटे के नाम से खरीदी गई थीं।

हालांकि विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि पहली नजर में निर्धारित किया जाता है कि अन्य संपत्तियां भी वास्तव में त्रिवेदी की ही हैं और उनकी पत्नी और बेटा उन्हीं के लिए इन संपत्तियों को धारण करते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ये सभी संपत्तियां त्रिवेदी ने शासकीय सेवा के दौरान अवैध साधनों सेअर्जित की थीं।

विशेष लोक अभियोजक महेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि व्यापमं घोटाले के कई मामलों में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे त्रिवेदी के इंदौर और भोपाल के ठिकानों पर लोकायुक्त पुलिस ने 29 जनवरी 2014 को छापे मारे थे। छापों में उनकी चल-अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ था।

वर्ष 2013 में सामने आया व्यापमं घोटाला गिरोहबाजों, अधिकारियों और सियासी नेताओं की कथित सांठगांठ से राज्य सरकार की सेवाओं और पेशेवर पाठ्यक्रमों में सैकड़ों उम्मीदवारों के गैरकानूनी प्रवेश से जुड़ा है। व्यापमं की आयोजित प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसका आधिकारिक नाम बदलकर 'प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड' कर दिया था।



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