पचमढ़ी का मौसम बुला रहा है आपको, आइए जानें क्या है खास देखने के लिए

Pachmarhi Hill Station
पचमढ़ी (history of panchmarhi) सतपुड़ा श्रेणियों के बीच बसा एक सुंदर पर्यटन स्थल है, जिसे सतपुड़ा की रानी भी कहा जाता है। यह राज्य के होशंगाबाद जिले में समुद्रतल से 1067 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। यह मध्यप्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। आप यहां साल भर किसी भी मौसम में जा सकते हैं, यही इस स्थल की विशेषता है।
पचमढ़ी प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से संपन्न क्षेत्र माना जाता है। पचमढ़ी एक कैंटोनमेंट क्षेत्र है और यहां के जंगलों में आने-जाने के लिए आपको गाइड लेना अनिवार्य है। यहां भगवान शिव के कई मंदिर दिखते हैं। भोपाल से पचमढ़ी की दूरी 211 किलोमीटर है, जहां आप बस या अपने साधन से आ सकते हैं। पचमढ़ी के नजदीक ही पिपरिया रेलवे स्टेशन पड़ता है, जो कि पचमढ़ी से 52 किलोमीटर दूर है, पिपरिया तक आप रेल यात्रा करके आगे का सफर बस द्वारा तय कर सकते हैं।


पचमढ़ी में ठहरने के लिए कई होटल्स हैं। यहां होटल्स के अलावा कई सारे प्राइवेट होटल भी हैं। साथ ही यहां आपको पंजाबी, जैन, गुजराती, मराठी खान-पान का जायका आसानी से मिल जाता हैं।

पचमढ़ी मध्य भारत का सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल है। यहां का मौसम हरा-भरा और वातावरण शांत है, जो कि यहां आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता हैं। यह एमपी का एकमात्र स्थल है, जहां आप प्रकृति का भरपूर आनंद ले पाएंगे। यहां देखने के लिए कई खास जगह हैं, जिन्हें देखने के बाद आप निश्चित ही पचमढ़ी की ओर आकर्षित हो जाएंगे और आपका मन बार-बार आपको यहां बुलाता रहेगा...।

मौसम- ठंडा सुहावना मौसम पचमढ़ी की सबसे बड़ी विशेषता है। सर्दियों में यहां तापमान लगभग 4 से 5 डिग्री तक रहता है और गर्मियों में तापमान 35 डिग्री से अधिक नहीं जाता। यहां छोटे-बड़े सघन वृक्षों से भरे वन गलियारे तथा मनमोहक घाटियां है। यहां सदाबहार हरियाली देखने को मिलती है, यहां की घास, चीड़, देवदारु, सफेद ओक, यूकेलिप्टस, गुलमोहर, जेकेरेंडा और जामुन, साज, साल, आदि वृक्ष देखकर आप मोहित हुए बिना नहीं रह पाएंगे।
आइए जानते हैं यहां देखने लायक खास स्थल कौन-कौन से हैं? Pachmarhi Top Tourist Places

Pachmarhi Darshan- मंदिर और गुफा : पचमढ़ी पांडवों के लिए भी जानी जाती है। मान्यतानुसार पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ काल यहां भी बिताया था और यहां उनकी पांच कुटिया, मढ़ी अथवा पांच गुफाएं थीं जिसके नाम पर इस स्थान का नाम पचमढ़ी पड़ा है। इसके साथ ही यह शिव के प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध जटाशंकर महादेव और गुप्त महादेव है।

गुप्त महादेव मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि गुप्त महादेव तक जाने के लिए आपको दो बिलकुल सटी हुई पहाड़ियों के बीच से गुजरना होता है जबकि जटाशंकर मंदिर पचमढ़ी बस स्टैंड से महज डेढ़ किलोमीटर दूर है और वहां जाने के लिए पहाड़ी से नीचे उतरकर खोह में जाना होता है। कहा जाता है कि भस्मासुर से बचने के लिए ही शिवजी इन दोनों स्थानों पर छिपे थे। इसके अलावा तीसरा मंदिर महादेव मंदिर है जिसके बारे में मान्यता है कि भस्मासुर से बचते हुए अंत में शिवजी यहां छिपे और यहीं पर भगवान श्रीविष्णु ने मोहिनी रूप लेकर भस्मासुर को अपने ही सिर पर हाथ रखने के लिए मजबूर करके उसका विनाश किया था।

- गुफा : पचमढ़ी में आपके घूमने की शुरुआत पांडवों की गुफा से होती है। एक छोटी पहाड़ी पर ये पांचों गुफाएं हैं। इन पांच गुफाओं में 'द्रौपदी कोठरी' और 'भीम कोठरी' प्रमुख हैं। वैसे इन्हें बौद्धकालीन गुफाएं भी कहा जाता है, क्योंकि पुरातत्वविद मानते हैं कि यह गुफाएं गुप्तकाल की हैं जिन्हें बौद्ध भिक्षुओं ने बनवाया था।
- अप्सरा विहार : पांडव गुफाओं से आगे चलने पर 30 फीट गहरा एक ताल है, इसमें एक झरना आकर गिरता है। जो अप्सरा विहार कहलाता है, जहां आप नहाने और तैरने का आनंद ले सकते हैं।

- जटाशंकर : पचमढ़ी कस्बे से 1.5 किमी. दूरी पर जटाशंकर एक पवित्र गुफा है, यहां तक पहुंचने के लिए आपको कुछ दूर तक पैदल चलने का आनंद उठाना पड़ेगा। यहां मंदिर में शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बना हुआ है। यहां एक ही चट्टान पर बनी हनुमान जी की मूर्ति भी एक मंदिर में स्थित है। पास में हार्पर की गुफा भी है।
- पचमढ़ी शिवजी का दूसरा घर : दरअसल, शिवजी के कैलाश पर्वत के बाद पचमढ़ी को उनका दूसरा घर कह सकते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर, जिसे खुद महादेव ने यह वरदान दिया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा और भस्मासुर ने यह वरदान जब शिवजी पर ही आजमाना चाहा था तब उससे बचने के लिए भगवान शिव ने जिन कंदाराओं और खोहों की शरण ली थी वह सभी पचमढ़ी में ही हैं।

- : पचमढ़ी में तीन पहाड़ी शिखर की बाईं तरफ चौरादेव, बीच में महादेव तथा दाईं ओर धूपगढ़ दिखाई देते हैं। इनमें धूपगढ़ सबसे ऊंची चोटी है। पचमढ़ी से प्रियदर्शिनी प्वाइंट के रास्ते में आपको नागफनी पहाड़ देखने को मिलता है, जिसका आकार कैक्टस की तरह है। प्रियदर्शिनी प्वाइंट से सूर्यास्त का दृश्य लुभावना लगता है। यहां कैक्टस के पौधे अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

- जलप्रपात : यहां बी फॉल्स नामक पिकनिक स्पॉट है, जहां आप नहाने का भी मजा ले सकते हैं, यहां पहाड़ी से गिरते समय यह झरना बिलकुल मधुमक्खी की तरह दिखता है। इसके अलावा रजत प्रपात अप्सरा विहार से आधा किमी. की दूरी पर स्थित है। 350 फुट की ऊंचाई से गिरता इसका जल इसका जल एकदम दूधिया चांदी की तरह दिखाई पड़ता है। साथ ही डचेज फॉल्स पचमढ़ी का सबसे दुर्गम स्पॉट है। यहां जाने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इसमें से 700 मीटर घने जगलों के बीच से और करीब 800 मीटर का रास्ता पहाड़ पर से सीधा ढलान का है।

यह सबसे लोकप्रिय जलप्रपात हैं, जहां आप प्रकृति का असली मजा ले सकते हैं। यहां रास्ते में आपको बहुतायत में आम के पेड़ दिखते हैं। इन सबके साथ ही यहां डोरोथी डीप रॉक शेल्टर, जलावतरण, सुंदर कुंड, इरन ताल, सतपुड़ा आदि भी घूमने-फिरने की खास जगहें हैं।

- राजेंद्र गिरि : यह वो स्थान है, जहां डॉ. राजेंद्र प्रसाद यहां आकर रुके थे। उनके लिए यहां रविशंकर भवन बनवाया गया था। इसके चारों ओर प्रकृति की असीम सुंदरता बिखरी पड़ी है। अत: इस पहाड़ी का नाम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर रखा गया है।

- हांडी खोह : हांडी खोह की यह खाई पचमढ़ी की सबसे गहरी खाई है जो 300 फीट गहरी है। यह घने जंगलों से ढंकी है, वनों के घनेपन के कारण जल दिखाई नहीं देता। लेकिन यहां कल-कल बहते पानी की आवाज बहुत ही सुकूनदायक लगती है।

पौराणिक संदर्भ कहते हैं कि भगवान शिव ने यहां एक बड़े राक्षस रूपी सर्प को चट्टान के नीचे दबाकर रखा था। स्थानीय लोग इसे अंधी खोह भी कहते हैं जो अपने नाम को सार्थक करती है। यहां बने रेलिंग प्लेटफार्म पर से आप घाटी का नजारा ले सकते हैं।

पचमढ़ी की पौराणिक बातें-

- सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान का भाग होने के कारण यहां चारों ओर घने ही घने जंगल हैं।
- पचमढ़ी के जंगल विशेष कर जंगली भैंसों के लिए प्रसिद्ध हैं।

- इस स्थान की खोज कैप्टन जे. फॉरसोथ ने 1862 में की थी।

- पचमढ़ी की गुफाए पुरातात्विक महत्व की हैं क्योंकि इन गुफाओं में शैलचित्र भी मिले हैं।

- यहां की प्राकृतिक संपदा को पचमढ़ी राष्ट्रीय उद्यान के रूप में संजोया गया है।

- पचमढ़ी से निकल कर जब आप सतपुड़ा के घने जंगलों में जाएंगे तो आपको बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, गौर, चिंकारा, भालू आदि अनेक प्रकार के जंगली जानवर मिलते हैं।
rk.

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