बाली उमर में पहला प्यार


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यहीं से निशांत और रिया की पहली बात शुरू हुई, जहां दोनों ने एक दूसरे के बारे में जाना। अब अक्सर दोपहर के वक्त पर बातें हुआ करती थी, जब रिया के घर पर कोई नहीं होता। सुबह इशारों में फोन करने का समय बता दिया जाता और रिया अपने घर के दो फोन में से एक का कनेक्शन निकाल देती, ताकि दूसरे फोन से कोई उसकी बातें न सुन ले। धीरे से मोबाइल फोन का जमाना भी आ गया और दोनों की मैसेज अैर कॉल से रातों को बातें होने लगी।  
 
 
अब चल पड़ा था सिलसिला उनकी बातों का 
दिल उधर धड़कता था, आवाज यहां आती थी 
 
निशांत जब बात किए बगैर सो जाता, तो रिया घंटों तक बि‍स्तर पर लेटे-लेटे रोती रहती। फिर सुबह छत पर भी निशांत की तरह चेहरा नहीं करती। लेकिन जल्दी मान भी जाती। यही बात निशांत को बहुत पसंद भी थी। दीप्ति दोनों के बीच उपहारों या संदेशों का कभी कभार आदान प्रदान कर दिया करती थी। एक दिन निशांत ने दीप्ति को बताया कि उसकी  नौकरी लग गई है और वह शहर के बाहर जा रहा है...। बगैर बात किए वह चला भी गया। इन दिनों रिया ने जुदाई के पलों को बेहद करीब से जिया था। लेकिन ये वक्त भी ज्यादा समय तक नहीं रहा। निशांत को नौकरी पसंद नहीं आई ओर वह 1 महीने बाद लौट आया। रिया की जान में जान आई। 
तुम क्या गए वो एक एहसास चला गया 
अपनों के बीच से उठकर कोई खास चला गया 
 
अब इस रिश्ते को 3 साल हाने को आए थे, और रिया ने वारहवीं पास कर ली थी। अब रिया ने मुंबई के कॉलेज में एडमिशन ले लिया था। दोनों के बीच तय हुआ कि निशांत हर महीने रिया से मिलने मुंबई जाएगा। रिया ने शहर छोड़ दिया। और मुंबई में एक हॉस्टल में रहने लगी। यहां भी दोनों के बीच प्यार कम नहीं हुआ। लेकिन दो साल बाद रिया की जिंदगी में कई सारे मोड़ आ गए थे। निशांत कभी मुंबई नहीं आया ... और रिया भी अब बदल चुकी थी। शहर की हवा का रंग उसके परों में लग चुका था और वह बहुत दूर जा चुकी थी। अब केवल दोनों एक दूसरे को बस याद किया करते थे। >  
जिंदगी ने उसके साथ ये कैसा सौदा किया, 
दुनिया की समझ देकर, मासूमियत छीन ली  
 
अब केवल दोनों एक दूसरे को बस याद किया करते थे। जब तक रिया के पैर जमीन पर आए, वह बहुत कुछ पीछे छोड़ चुकी थी। लेकिन आज भी गर्मियों की सुबह और शाम रिया को वही दिन याद आते हैं। जो था।>  
बीते हुए लम्हाें की कसक याद तो होगी  ख्वाबों में ही सही मुलाकात तो होगी 



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