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विश्व पर्यटन दिवस पर जानिए 10 खूबसूरत शहर के बारे में

रविवार,सितम्बर 26, 2021
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गाय और बकरी के दूध में काफी अंतर होता है। दोनों के भाव से लेकर शरीर को अलग-अलग तरह के लाभ मिलते हैं। इसलिए दोनों दूधा अपनी-अपनी जगह है। बकरी और गाय दोनों का दूध सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। प्राक़तिक होने के कारण साइड इफेक्‍ट का खतरा भी कम होता है। ...
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बारिश के मौसम में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ठंडक होते ही बच्‍चे मलेरिया और डेंगू की चपेट में आ जाते हैं। इस मौसम में खान -पान से लेकर हर तरह की सावधानी बरतना जरूरी होता है। दूषित पानी या भोजन करने से बहुत जल्‍दी पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। जिस ...
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जिस दिन से घर में आती हैं बेटियां, माता-पिता की इज्जत बन जाती हैं बेटियां। भारत के विकास की डोर थामे हैं बेटियां,
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अनुवांशिक बीमारियां वे होती हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाती है। इसका कारण, वह गुणसूत्र होते हैं, जो परिवार के एक सदस्य को अपने माता-पिता से मिलते हैं। यही गुणसूत्र एक व्यक्ति के गुणों को एक से दूसरे में लेकर जाते हैं। जीन ...
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दक्षिण भारत में केले के पत्‍ते पर खाने का प्रचलन है। केले के पत्ते पर खाने को धार्मिक मान्‍यता से भी जोड़कर देखा जाता है। दक्षिण भारत की यह बहुत पुरानी परंपरा है। रेस्‍त्रां में भी केले के पत्‍तों में खाना सर्व किया जाता है। लेकिन आज किसी धार्मिक ...
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ऐसे कई फूड है जिन्हें एक पूरी रात भिगोकर रखने के बाद, अगले दिन खाना अपेक्षाकृत अधिक फायदेमंद होता है। क्योंकि अंकुरित होने के बाद उनकी नुट्रिशन वैल्यू बढ़ जाती है, साथ ही ये आसानी से पच जाते है जो सेहत के
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एक उम्र के बाद शरीर में कुछ बीमारियां जड़ से चिपक जाती है। जिसके बाद लगातार अलग-अलग बीमारियां उससे बढ़ने लगती है। इन दिनों महिलाओं में यूरिक एसिड की तादाद अधिक पाई जा रही है जिससे मांसपेशियों में दर्द होता रहता है और सीधे किडनी पर प्रभाव पड़ता । ...
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बैंगन का प्रयोग भारत में भिन्‍न - भिन्‍न तरीकों से किया जाता है। इसकी अलग - अलग प्रकार से डिश बनाई जाती है। लेकिन भारत में बैंगन का भर्ता सबसे अधिक पसंद किया जाता है। पर क्‍या आपने बैंगन से हटाकर बैंगन के पत्‍तों पर नज़र डाली है। अगर नहीं तो आप इनके ...
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डिहाइड्रेशन की समस्या सिर्फ गर्मी में ही नहीं होती है बल्कि अन्य मौसम में भी हो सकती है अगर नियमित और शरीर के अनुरूप पानी नहीं पीते हैं तो। भले ही प्यास नहीं लगे लेकिन पानी पीते रहना चाहिए। अक्सर लोग यहीं बोलते हैं कि मुझे तो पानी की प्यास ही नहीं ...
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यूरिक एसिड एक आम बीमारी बनती जा रही है। शुरूआत में इसके लक्षण जरा भी नजर नहीं आते हैं। लेकिन जब बॉडी में यूरिक एसिड बढ़ जाता है तो इस बीमारी के संकेत मिलने लगते हैं। यह बीमारी महिलाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही है। बता दें कि पेट में यूरिक एसिड जमा ...
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सुबह उठते ही सबसे पहले लोग चाय पीना पसंद करते हैं। इसके बाद उनके दिन की शुरूआत होती है। फिर वह कोई अन्‍य कार्य करते हैं। लेकिन कई बार लोग चाय पीने के बाद शिकायत करते हैं कि उन्‍हें एसिडिटी हो रही है, बदहजमी, पाचन क्रिया गड़बड़ हो रही और अन्‍य पेट से ...
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नर्मदा की प्रेम-कथा लोकगीतों और लोककथाओं में अलग-अलग मिलती है लेकिन हर कथा का अंत कमोबेश वही कि शोणभद्र के नर्मदा की दासी जुहिला के साथ संबंधों के चलते नर्मदा ने अपना मुंह मोड़ लिया और उलटी दिशा में चल पड़ीं। सत्य और कथ्य का मिलन देखिए कि नर्मदा नदी ...
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सच्ची लगन, कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास से उच्च शिखर पर बढ़ती रहो, अपनी लक्ष्मण-रेखा स्वयं खींच कर मान-सम्मान की गरिमामयी
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संस्था क्षितिज' द्वारा तृतीय अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन 2021 का आयोजन 26 सितंबर, 2021 रविवार को सुबह 10.00 बजे से श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, शिवाजी सभागृह में किया जा रहा है।
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यह कहानी है चार्ल्स डार्विन की। जी हां, कभी इन्हें खयालों में खोया रहने वाला, आलसी, बेहद साधारण और औसत बुद्धि का व्यक्ति माना जाता था। डार्विन के पिता का और उनको सिखाने वालों का तो यही मानना था कि यह लड़का कुछ खास नहीं कर पाएगा।
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जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे को हवा देने की कोशिश की तो भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने ऐसा करारा जवाब दिया कि सो शल मीडिया पर वे छा गईं...
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विश्‍व खरगोश दिवस हर साल मनाया जाता है। यह दिवस हर सितंबर माह के आखिरी शनिवार या रविवार को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे रोचक कारण है। कहा जाता है कि खरगोश हमारे जीवन में खुशी लाते हैं, वे एक स्वास्थ्य पर्यावरण बनाते हैं। US में पेटको के ...
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हर ग्रह शरीर के जिस अंग का प्रतिनिधित्व करता है उसी के अनुसार रोग होते हैं जैसे शुक्र काम कला का प्रतीक है तो समस्त यौन रोग शुक्र की अशुभता से ही होते हैं।
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भारतीय राजनीति को नई विचारधारा से सींचने में पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय की बहुत बड़ी भूमिका रही हैं। उनकी सोच बहुत बड़ी थी। उनके लिए देश से सर्वोपरी कुछ नहीं था। उनकी सबसे बड़ी विचारधारा थी एकात्‍म मानववाद यानी की स्‍वदेशी सामाजिक-आर्थिक मॉडल अपनाना। ...
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