एमएसएमई के लिए अच्छा होगा 2010

नई दिल्ली| भाषा|
वैश्विक आर्थिक मंदी के चलते पश्चिमी देशों में माँग में गिरावट का सामना करने वाले अति लघु, लघु एवं मझोले उद्यमियों (एमएसएमई) के लिए आने वाला साल बेहतर साबित होगा।


उद्योग मंडल सीआईआई के एक सर्वेक्षण के मुताबिक 56 फीसद का मानना है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में उनका निर्यात बढ़ेगा। हालाँकि कच्चे माल की बढ़ती लागत, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, कीमत प्रतिस्पर्धा और भुगतान में विलंब निर्यात वृद्धि में थोड़ी अड़चने पैदा करेंगे।
हालाँकि कच्चे माल की बढ़ती लागत, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, कीमत प्रतिस्पर्धा और भुगतान में देरी उनकी निर्यात वृद्धि को प्रभावित कर सकती है।


उद्योग मंडल एसोचैम का मानना है कि 2010 और उसके बाद से ये इकाइयाँ बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का केंद्र हो सकती है।

एमएसएमई क्षेत्र के लिए ब्याज दरों में छूट की वकालत करते हुए एसोचैम ने कहा-वाणिज्यिक बैंकों को एमएसएमई के लिए ब्याज दरों में छूट दी जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि देश में 2.6 करोड़ अति लघु, लघु एवं मझोले उद्यम में जहाँ 6 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है और देश के औद्योगिक उत्पादन में इन उद्यमों की हिस्सेदारी 45 फीसद है। (भाषा)



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