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जन्मदिन विशेष : नरेन्द्र मोदी पर हाइकू रचनाएं

गुरुवार,सितम्बर 15, 2022
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सूरज करता चम-चम-चम-चम, पानी झिलमिल करता। सरिता जल में सुबह नहाने, सूरज रोज उतरता। रगड़-रगड़ कर अपने तन का सारा मैल छूटाता। इसी मैल से रंग पानी का, लाल-लाल हो जाता। किरणों के घोड़े पर चढ़कर धूप धरा पर आती। सोती, ऊंघ रही कलियों को... Sun poems
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Kids Funny Poem दादाजी हैं अस्सी के, अस्सी के रे अस्सी के। दादाजी ये, सोहन के, मोहन, टीना, जस्सी के। उफ़! गरमी इतनी ज्यादा, बहता खूब पसीना है। सर पर बैठ गया आकर, कड़क जून का महीना है। बच्चे मांग रहे पैसे, दादाजी से लस्सी के। दादाजी ने पलट दिया, बटुआ ...
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Kids Poem खूब पढ़ो जी, खूब लिखो जी, अच्छे नंबर लाओ जी। मम्मी-पापा बड़े जनों से, खूब दुआएं पाओ जी। रोज नियम से शाला जाओ। मित्रों के संग मौज मनाओ। दौड़-भाग में रहो न पीछे, खेलो कूदो स्वास्थ्य बनाओ। खुद भी ठिल-ठिल करके हंसना, सबको खूब हंसाओ जी।
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नील चक्र, चौबीस ती‍लियों वाला तिरंगा ध्वज, आगे बढ़ने की, बात करे मतवाला। बस बढ़े देश का मान, न हो कुछ बांका, हमको प्राणों से बढ़कर राष्ट्र-पताका। Poem on Tiranga Flag
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हिंदू-मुस्लिम मिल कर रहते, ईसाई भी यार। अलग नहीं है किसी तरह भी, सिखों का संसार। तीजों त्योहारों पर सब हैं, आपस में मिलते, खुशियों के मेले सजते तो, मस्ती के बाजार। ऐसी भारत भरत भूमि को, शत-नत वंदन है।।
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अम्मा यह है कैसा मेला, धक्कम-मुक्की रेलम-पेला, अम्मा यह कैसा है मेला। ऊंचे-ऊंचे लगे हिंडोले, एक तरफ हैं चकरी-झूले।
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क्यों अब बनी पहेली है। नानी आज अकेली है। बात नहीं अब करता कोई, घर में नाना-नानी से, गुड़िया रानी को अब मतलब...
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मच्छर और मक्खी पर पढ़ें छोटी फनी बाल कविता- एक पुस्तक पर बैठा मच्छर, सीख रहा था पाठ। तभी वहां पर मक्खी आकर,
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निरंतर बढ़ते समय पर जीवन जीने की सीख देती फनी बाल कविता। चिड़िया बोली, राम-राम जी। उठो करो कुछ, काम धाम जी।
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Poem on Neem Tree पेड़ नीम का घर के बाहर छाता बनकर, खड़ा हुआ है एक हकीम सा। पेड़ नीम का। हवा चली तो डाली पत्ते Hindi Poem
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मैं तुमसे बातें करने, मोबाइल रोज मिलाता हूं, टन-टन घंटी रोज है बजती, बात नहीं कर पाता हूं
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पिता-सा न कोई जग में महान, पिता से मिलता हमें सच्चा प्यार। पिता विचारों को उज्ज्वल करते, हमारे मन को प्यार से भरते। Father Poem
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मैं मम्मा से पूछता हूं, पापा कब मेरे संग खेलेंगे, मम्मा धीरे से समझाती वो तो संडे को मिल पाएंगे...
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आसान नहीं है बनना सागर, सागर बनने के लिए चाहिए, विशालता, गहराई और सबको आत्मसात करने का गुण।
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21 June 2022, Yoga Day हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय या विश्व योग दिवस (World yoga day 2022) मनाया जाता है। योग दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। पढ़ें योग दिवस पर शिक्षाप्रद कविता... Poem on Yoga Day
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ग्रीष्म ऋतु है कितनी अच्छी, लंबी छुट्टी लाती है, पढ़ने लिखने होमवर्क से, राहत हमें दिलाती है।
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ब्रदर्स डे पर कविता- चल मेरे भाई, मेरे साथ, तुझको खिलाऊं दाल और भात। मिला के उसमें चटनी न्यारी, तुझको जो लगती है प्यारी।
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रेल चली भई रेल चली, धुक्कम-पुक्कम रेल चली। टीना, मीना, चुन्नू, मुन्नू, डिब्बे बनकर आएं। मोहन कक्कू इंजिन बनकर,
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जूते बैठे दरवाजे पर, झांक रहे बैठक खाने में। कहते हैं क्यों- हमें मनाही ? हरदम ही भीतर आने में।
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