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बाल गीत : हरा भरा सा गांव

गुरुवार,जुलाई 15, 2021
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ताधिक ताधिक ता ता धिन्ना। हाथी दादा चूसो गन्ना। फिर थोड़े से केले खाना। केले खाकर मेले जाना।
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मौज-मटरगस्ती करने में सारा समय गंवाया, माता-पिता ने समझाया था, पर मैं समझ न पाया।
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3
किरणों के गमछे से, सबके सब पूंछने हैं। सूरज पर कोहरे के, दाग लगे जितने हैं।
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4
अब जहां देखो वहां छाया अंधेरा, धूप कब की जा चुकी। रोशनी के लेख सूरज लिख रहा
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5
मम्मी पापा से कहिएगा, वोट डालने जाएं जी, घर में यूं ही पड़े-पड़े वे, व्यर्थ न समय गवाएं जी।
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6
पेड़ पत्ते डालियों का मुस्कराना गुनगुनाना, रूप धर बहुरूपिया का फिर सजा मौसम सुहाना।
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7
सूर्योदय से पहले उठकर, निपटे नित्य क्रिया। सदा निरोगी काया जिसकी, जीवन वही जिया।। उदाहरण कोई बन जाए, वह उद्योग करें।। आओ योग करें। आओ योग करें।।
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चि‍ड़िया चहक-चहक कहती, सुबह-शाम मैं गगन में रहती
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बहुत लुभाता है गर्मी में, अगर कहीं हो बड़ का पेड़। निकट बुलाता पास बिठाता, ठंडी छाया वाला पेड़।
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10
मार-मार कर लगा नचाने, पर भालू न नाचा। जड़ा मदारी ने गुस्से में, उसके गाल तमाचा।
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11
दो के एकम दो होते हैं, दो के दूनी चार। काम शुरू करने से पहले, करना सोच विचार।
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बड़ा हो गया फिर भी रेल की सीटी बजते, मन डोल-डोल जाता, रेलगाड़ी देखना अपनापन-सा लगता
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धोती हैं, कुरता, गमछे हैं, हम दादाजी के चमचे हैं। जब छड़ी कहीं गुम जाती है, वे छड़ी छड़ी चिल्लाते हैं।
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एक-एक कर गिर गए सारे, नहीं बचे दद्दू के दांत। चार गिर गए तीस साल में, पूड़ी साग चबाने में।
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गुड़ का ढेला देख छबीली, चींटी मन ही मन मुस्काई। अभी चढ़ूंगी इस पर्वत पर,कोई मुझे न रोके भाई।
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एक में जोड़ा एक तो बच्चों, हो जाते हैं दो। हाथ नहीं गंदे रखना है, हैंड वॉश से कर धो।
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महाराणा प्रताप पर पंडित नरेन्द्र मिश्र की कविता की कुछ पंक्तियां इस प्रकार है -
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आमतौर पर एक माह में 4 सप्ताह आते हैं...और एक सप्ताह में सात दिन होते हैं.... आइए पढ़ते हैं एक मजेदार कविता
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जय हनुमान बजरंग बली अंजनी के लाल पवन सुत नाम तुम्हारा। जय महावीर हे महाबली
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