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ग्रीष्म ऋतु पर कविता (भाग 1)

शुक्रवार,मई 27, 2022
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ब्रदर्स डे पर कविता- चल मेरे भाई, मेरे साथ, तुझको खिलाऊं दाल और भात। मिला के उसमें चटनी न्यारी, तुझको जो लगती है प्यारी।
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रेल चली भई रेल चली, धुक्कम-पुक्कम रेल चली। टीना, मीना, चुन्नू, मुन्नू, डिब्बे बनकर आएं। मोहन कक्कू इंजिन बनकर,
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जूते बैठे दरवाजे पर, झांक रहे बैठक खाने में। कहते हैं क्यों- हमें मनाही ? हरदम ही भीतर आने में।
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डाली से मुझको मत तोड़ो, फूल कर रहा नम्र निवेदन, डाली से मुझको मत तोड़ो। मुझको दर्द बहुत होता है, ऐसे न अब कान मरोड़ो।
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पेड़ ने जीवन दिया है, पेड़ ने दी जिंदगी। पेड़ को शत-शत नमन है, पेड़ को है बंदगी। पेड़ हैं तो प्राणवायु, पेड़ हैं तो अन्न जल।
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टोप नहीं साहब के सिर पर, सिर नंगा है साहब का। नंगा सिर देखा तो देखा, सिर गंजा है साहब का।
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Poem on Jalebi करना नहीं बहाना बापू। आज जलेबी लाना बापू।। रोज सुबह कह कर जाते हैं, आज जलेबी ले आएंगे।
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Poem on Summer Vacation भोर हुई, दिन चढ़ा बांस भर, बजे नगाड़े गरमी के। गरमी है गरमी है की रट,दादा खूब लगाते। सभी लोग उनकी हां में हां... Summer poem
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Funny Poem घोड़े पर है आसमान में, मुन्नी रानी बड़ी शान में। गुड्डी ने गुड्डे को कूका, बड़ी जोर से दिया कान में। मम्मी बहुत ध्यान रखती हैं...
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नदी नाचती रेत उछलती, पानी झर-झर गाता है। एक बुलबुला बहते-बहते,बन-बन कर मिट जाता है।
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इसको कहते लोग समोसा, उसको कहते लोग कचौड़ी। लेकिन जिसमें मजा बहुत है, वह कहलाती गरम पकौड़ी।
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बचपन गीत सुनाता चल। हंसता और मुस्कुराता चल। मिले राह में जो निर्मल, उनको गले लगाता चल। जीवन कांटों का जंगल,
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Ram Navami Poem राम नवमी पर भगवान श्री राम को समर्पित कविता- राम जन्म जिस नवमी होता, उस नवमी की महिमा अद्भुत, सृष्टि भी होती मतवाली, दिन में होली रात दिवाली।
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शीत ऋतु की हो रही है बिदाई, ग्रीष्म ऋतु की आहट है आई, सूरज की किरणों ने उष्णता है दिखलाई देखो-देखो होली है आई।
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Holi Poem in Hindi पिचकारी रे पिचकारी रे, कितनी प्यारी पिचकारी। छुपकर रहती रोजाना, होली पर आ जाती है,
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एक वर्ष में होली आई। जी भर खेलो खाओ मिठाई।। ध्यान लगाकर सुनो-पढ़ो। नए-नए सोपान चढ़ो।।
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रंगों के पर्व होली पर पढ़ें मजेदार हिन्दी कविता। चलो मनाएं आज हम होली, सबको दिखाएं रंगों की बोली...
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पूरब की खिड़की से झांका, नन्हा बालक भोला भाला। अरे-अरे यह तो सूरज है, आया ओढ़े लाल दुशाला।
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रोटी कहां छुपाई, लगे देखने टेलीविजन, चूहे घर के सारे। देख रोटियां परदे पर, उछले खुशियों के मारे।
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दस मंजिल से नीचे आती, मम्मी के संग लिफ्ट में। सुबह-सुबह ही शाला जाती, मैं तो पहली शिफ्ट में।
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आज तीस तारीख है, पुण्यतिथि महान गुरु की, वो अच्छे आदमी थे, कहीं पढ़ा था, वे अहिंसा के गुरु, आजादी के गुरु, सच्चाई के मापदंड, अच्छाई के प्रतिबिम्ब।
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26 जनवरी (26 January), गणतंत्र दिवस (gantantra diwas 2022) पर पढ़ें बच्चों के लिए 5 सरल कविताएं...
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थाली में है रोली-कुमकुम, पीला चंदन है। करें तिरंगे की पूजा, शत-शत अभिनंदन है।। गंगा के पानी से अब तक, श्रद्धा नाता है। विंध्य, हिमालय, अरावली अब भी मुस्कराता है।।
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रोने में कुछ नहीं फायदा, हंसना बहुत जरूरी है। लोग क्यों नहीं हंस पाते हैं, ऐसी क्या मजबूरी है।
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फूल लाल है फूल हैं पीले, फूल गुलाबी नीले। फूल सदा हंसते रहते हैं, संवरे और सजीले। डाली की गोदी में बैठे,मस्त मगन रहते हैं।
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school poem शाला जाकर नाम लिखाते, मिस्टर लिक्खी राम। कई बच्चों को मुफ्त पढ़ाते, मिस्टर लिक्खी राम।
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Sankranti Kite Poem पतंग क्या चीज, बस हवा के भरोसे। जिंदगी हो इंसान की आकाश और जमीन के, अंतराल को पतंग से,
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नया साल आया है, नया सवेरा लाया है, हर घर में खुशियों का मौसम छाया है। पड़ रही है कड़ाके की ठंड फिर भी जोश है नए साल का, आओ सब नए साल का जश्न मनाएं,
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Happy New Year Poem: छोड़ दो गम की निशानी

बुधवार,दिसंबर 29, 2021
सफलता चरण को चूमे खुशियां बजाएं ताली, तुम्हारी सफलता, सरलता भी हो निराली, जिंदगी सजा के तुम्हें ज्योति है जलानी फूल बन के गम की छोड़ दो निशानी
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पुराने साल की सुन अंतिम सांस, सबकी सांस में आई सांस। नए साल को सबने, किलकारियों, तालियों व प्यालियों
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हाथी जैसा भारी भरकम, जिसका बदन डराता है। देख सामने धीरे-धीरे, वह बुलडोजर आता है। खडंग-खडंग का भारी स्वर है। इस स्वर में भी भर-भर-भर है।
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Kids Poem in Hindi मंजन करके आ गई लड़की। सारा मंजन खा गई लड़की। प्यारे-प्यारे से बचपन का, सब आनंद उठा गई लड़की।
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