2010 : द्वादश राशियों का वार्षिक फलादेश

कैसा होगा नया साल आपकी राशि के लिए

मेष : यश-सम्मान मिलेगा
Author पं. सुरेन्द्र बिल्लौरे|
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मेष : यश-सम्मान मिलेगा

मेष राशि वाले जातकों को यह वर्ष यश, सम्मान, कीर्ति, लाभ, उत्साह एवं नए कार्य का शुभारंभ करने वाला रहेगा। मेष राशि का स्वामी मंगल है। वर्ष के प्रारंभ में गुरु लाभ घर में विराजमान है। भौतिक सुख के साथ उपहार प्राप्ति तथा सामान्य चिंता, संघर्ष के बाद दूर होगी। वर्ष के अंतिम चार माह में तीर्थयात्रा निर्विघ्न होने के योग बनते हैं। वर्षारंभ में कठिनाई आएगी। इस वर्ष अविवाहितों के विवाह योग बनते हैं।
नि:संतान दंपति को संतान की प्राप्ति होगी एवं सुखी यशस्वी बनेंगे। अच्छे सद्‍गुणों की वृद्धि पिछले वर्ष जो हानि हुई इस वर्ष पूर्ति करने का अवसर मिलेगा। धनागमन होगा। शुभ कर्म के प्रति उदासीनता तथा अशुभ कर्म के प्रति रुचि बढ़ेगी। सावधानी रखें। धर्म के कार्यों में विघ्न बाधा होगी। पुराने न्यायिक प्रकरण में विजय प्राप्त होगी। रुके हुए पैसे मिलेंगे। माता-पिता को सुख मिलेगा। मई से गुरु के 12वें भाव में आने से अति व्यय, भ्रमण, व्यर्थ का भटकाव होगा। अपयश एवं अपमान की स्थिति बनेगी। विद्यार्थियों के लिए वर्ष अच्‍छा रहेगा। व्यापारियों के लिए लाभप्रद रहेगा।

कर्मचारियों की उन्नति होगी। इस वर्ष राहु आराध्य है। श्वास एवं डायबिटीज कष्ट जून से नवंबर के बीच उभर सकता है। मई-जून में गले संबंधी कष्ट हो सकता है। सावधानी रखें। गणेश जी या भगवती की पूजा आराधना करना श्रेष्ठ होगा। गुरु के जाप श्रेष्ठ रहेंगे।
वृषभ :  अनायास कष्ट
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वृषभ : अनायास कष्ट से बचें
वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है। वृषभ राशि वालों के लिए यह वर्ष उन्नति, यश सफलता का रहेगा। माता-पिता के लिए भी शुभ रहेगा। गुरु का भ्रमण वर्षारंभ में दशम भाव में है। मई से एकादश भाव में रहेगा। कुछ व्यय की अधिकता एवं अनायास कष्ट- घटना से बचना होगा। अच्छे मित्रों का सहयोग उन्नति में साथ देगा। अच्छे कार्यों के प्रति रुझान बढ़ेगा। संतान की चिंता के साथ पति-पत्नी के बीच छोटी बातों को लेकर कलह का सामना करना पड़ेगा। कुछ घटनाओं से आहत, राज्य से सम्मान, वाहन से दुर्घटना योग अत: यात्रा में सावधानी बरतें। विपरीत बुद्धि पर तर्क बुद्धि वाणी से संयम रखना पड़ेगा। सत्ता पक्ष एवं अधिकारी वर्ग के लिए वर्ष शुभ रहेगा। लाभ के लिए क्षमता से अधिक करने की लालसा बढ़ेगी। अति संघर्ष से सफलता मिलेगी। रिश्तेदारी में नुकसान मई से गुरु 12वें भाव में जाने से लाभ मिलेगा।
घर में भाई-बंधु, मित्रों से लाभ मिलेगा। लक्ष्य लेकर पढ़ाई से सफलता प्राप्त होगी। गुरु के कारण यह स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम रहेगा। उत्तर, रक्त पित्त डायबिटीज से सावधानी रखें। गुरु की मदद समाधान करेगी। इष्टदेव एवं भगवान शिव की आराधना पूरे वर्ष लाभप्रद रहेगी।

मिथुन : कार्य-कुशलता बढ़ेगी
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मिथुन : कार्य-कुशलता बढ़ेगी बुध, मिथुन राशि के स्वामी हैं। इस वर्ष मिथुन राशि वाले के लिए अंतिम ढैया वाला है। पुत्र सुख प्रताप के साथ धर्मलाभ मिलेगा। परंतु ग्रह क्लेश स्थान परिवर्तन हानि एवं अर्थ की परेशानी रहेगी। शारीरिक कष्ट एवं पत्नी की चिंता बनी रहेगी। शारीरिक पीड़ा, आलस्य के साथ प्रति उत्तर देने में विरोधाभास रहेगा। शत्रु से भय के साथ सामना करना पड़ सकता है। भाई-बहन से लाभ मिलेगा। क्रोध पर नियंत्रण रखें, धार्मिक बाधा आएगी।
शांति संयम से काम लेना पड़ेगा। गुप्त धन प्राप्ति की इच्छा प्रबल होगी। मई से गुरु के भाव में आने से पदोन्नति राज्य से सम्मान, कार्य की कुशलता बढ़ेगी एवं लाभ मिलेगा। स्थाई प्रापर्टी वृद्धि, मातृभूमि भवन, वाहन आदि का सुख तथा व्यावसायिक समस्याएँ दूर होने का अवसर भी मिलेगा। गुरु प्रबलता के कारण कुप्रभाव का शमन होगा।

फिर भी सतर्कता से कार्य करें। विद्यार्थी को सफलता मिलेगी। राजनेताओं को यश की प्राप्ति होगी। मार्च में तनाव, चोर, मोच, व्याधि का योग है, जून एवं अगस्त में भी ऐसे योग हैं। शनि की आराधना एवं हनुमान जी की आराधना करें, वर्ष शुभ है।
कर्क : मध्यम वर्ष
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कर्क : मध्यम फल वाला वर्ष
कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। इस वर्ष गुरु अष्टम भाव में है मई में गुरु नवम भाव में रहेगा। नवंबर से पुन: अष्टम भाव में आएँगे। कर्क राशि वालों के लिए यह वर्ष विचित्र रहेगा। यथोचित सोच भी विपरीत ‍फल वाला परंतु कुछ अचानक अच्छे परिवर्तन आपके पक्ष में आने के योग बनेंगे। कुछ अपवाद जैसी घटना का सामना हो सकता है। संतान की चिंता रहेगी। शुभ कर्मों एवं धार्मिक कार्यों में विघ्न आ सकता है। कहीं परिवार में मांगलिक कार्य में व्यय योग बनते हैं।
मित्र, भाई-बंधु से अपेक्षित लाभ नहीं होगा। लाभ की अपेक्षा से ज्यादा व्यय रहने से चिंता बनी रहेगी। बुद्धि में भी भ्रम बना रहेगा। धर्म बल से पूरा वर्ष निकलेगा। मई से सुख शांति, मनोरथ सिद्धि, संतान से सुख मन में अनुकूल वातावरण, उत्साह, उमंग के साथ पराए एवं अपनों का साथ मिलेगा। विद्यार्थियों को मेहनत करना पड़ेगी। व्यापारी, राजनेताओं के लिए मध्यम फल वाला वर्ष रहेगा। दंत पीड़ा व गले संबंधित पीड़ा हो सकती है। वर्ष में गुरु केतु के जाप एवं गुरुवार का व्रत करें।



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