भारत में नक्सलियों का वर्चस्व बढ़ेगा

रहेगा चांडाल योग का साया

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गुड़ीपड़वा पर नववर्ष का प्रवेश धनु लग्न में हुआ है और राहु भी धनु राशि में ही है। राहु के गुरु की राशि में होने और राहु पर गुरु की तिर्यक दृष्टि से बना हुआ है। इस योग के प्रभाव से देश के अर्थशास्त्री दिशाहीन होंगे। इनकी गलत नीतियों के कारण लोग कागजों पर अमीर बनेंगे। अमीरों और गरीबों के बीच की खाई और चौड़ी होगी।

नया संवत मंगलवार के दिन प्रारंभ होने से इस वर्ष का राजा मंगल तथा मंत्री बुध है। दोनों राशियों के स्त्री राशि होने के कारण इस वर्ष भी स्त्रियों का वर्चस्व बढ़ेगा। तंत्र में भी इनकी संख्या बढ़ेगी। नवसंवत के राजा मंगल की कर्क राशि नीच है। ऐसे में जमीन से पैदा होने वाले धान्यों की सही कीमत नहीं मिलेगी और किसानों और नेताओं में संघर्ष बढ़ेगा।

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यह वर्ष भारत तथा भारतीयों के लिए टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विश्व में गौरव प्राप्त करने का है। गत 15 मार्च से सूर्य-शनि एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। एवं संवत के राजा और मंत्री के वैरभाव के कारण बुध भी नीच में रहा। वहीं मई अंत तक संवत का राजा यानी मंगल नीच है। इससे भारत में सरकार की गलत नीतियों के कारण नक्सलियों का वर्चस्व बढ़ेगा। भारत में उग्रवाद का भूत पिशाच की तरह जनता का खून पीएगा और सरकार विवश नजर आएगी। नकली करेंसी का भी प्रवाह बढ़ेगा। बैंक भी इससे अछूते नहीं रहेंगे।

जून में चंद्र ग्रहण और जून के मध्य से जुलाई मध्य तक शनि की दशम दृष्टि सूर्य पर होना शासक वर्ग में वैमनस्यता का संकेत है। साथ ही, कहीं चक्रवात-बाढ़ तो कहीं दुर्भिक्ष के प्रकोप से जनता त्रस्त होगी। जुलाई-अगस्त में होने वाला शनि-मंगल का मिलन पश्चिमी देशों के लिए ठीक नहीं। कहीं विग्रह, सत्ता परिवर्तन तो कहीं दुर्भिक्ष की स्थिति पैदा होगी। अगस्त में बुधादित्य योग समृद्धि को बढ़ाएगा।

16 सितंबर से सूर्य, शनि के कन्या राशि में एक साथ होने से देश में राजनीतिक उलझन बढ़ेगी। मंगल, शुक्र के तुला राशि में होने से जनप्रतिनिधि लापरवाही करेंगे और धार्मिक उन्माद व सांप्रदायिक उपद्रव से जनधन की हानि होने की आशंका है। 28 सितंबर से 21 फरवरी तक राहु और केतु का एक-दूसरे के नक्षत्र में होने से व्यापारियों व राजाधिकारियों के गठजोड़ से जनउपयोगी और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की जाएगी।

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- पंडित गोविंद कृष्ण वत्
अक्टूबर-नवंबर में मंगल पर शनि की दृष्टि मुस्लिम राष्ट्रों के लिए हानिकारक है। के वातावरण पैदा होंगे।



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