विविध लग्न और वर्ष 2010

कैसा रहेगा साल आपके लग्नानुसार

मेष लग्न : 2010
Author पं. अशोक पँवार 'मयंक'|
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मेष लग्न :

मेष राशि का स्वामी मंगल वर्षारम्भ से 2 मई तक नीच का रहेगा। यह समय इस लग्न वालों के लिए सफलताओं में बाधा का कारण बनेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। पारिवारिक मामलों में वाद-विवाद से बचकर चलें। मातृ पक्ष चिन्ता का कारण रह सकता है। 21 जुलाई से कन्या राशि में शनि के साथ रहने के कारण स्वास्थ्य, मानसिक परेशानी, व्यापार, नौकरी आदि में बाधा का कारण बनेगा। जोखिम के कार्य में हाथ ना डालें। प्रत्येक शनिवार को एक कटोरी में सरसों या तिल का तेल भरकर अपना मुँह देखकर डाकोतिया को दें।
6 सितम्बर से मंगल तुला में रहेगा जो 21 अक्टूबर तक रहेगा इस समयावधि में जीवन साथी के बारे में चिन्ता रहेगी। दैनिक व्यापार-व्यवसाय में कमी महसूस करेगें। इसके बाद वृश्चिक व धनु में रहेगा जो अनुकूल परिणाम देगा। कन्या का शनि शत्रुओं पर भारी पड़ेगा व कर्ज की स्थिति से राहत दिलाएगा। इस लग्नवालों को गुरु मिले-जुले परिणाम देगा। बाहरी संबंधों में सुधार व लाभ की स्थिति देगा। मूँगा सवा पाँच रत्ती का ताबें मे लॉकेट बनवाकर गले में धारण करने से लाभ होगा।
वृषभ लग्न :  2010
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वृषभ लग्न : 2010
वृषभ राशि वालों का स्वामी शुक्र का गोचरीय भ्रमण वर्षारम्भ में गुरु की धनु राशि में भ्रमण करेगा जो अष्टम भाव से होने के कारण परिश्रम अधिक कराएगा व परिणाम कम मिलेगें। शुक्र जब-जब मकर, कुंभ, मीन, वृषभ, कर्क तुला में गोचरीय भ्रमण करेगा तब-तब लाभ के अवसर आएँगे। व्यापार-व्यवसाय में उन्नति होगी, पारिवारिक लाभ रहेगा, दाम्पत्य जीवन में मधुर वातावरण रहेगा, वाहनादि की प्राप्ति भी संभव है। शनि का गोचरीय भ्रमण पंचम भाव से होने के कारण भाग्य में उन्नति, कर्मक्षेत्र में वृद्धि होकर सफलता भी मिलेगी।
गुरु का गोचरीय भ्रमण कुंभ व मीन में वर्ष भर रहेगा जो आर्थिक लाभ देगा। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। नीचस्थ मंगल या मंगल जब भी शनि के साथ होगा तब संभल कर चलना चाहिए। विशेषकर जीवन साथी के मामलों में। ऐसी स्थिति में अपनी आयु से एक ज्यादा साबुत बादाम शुद्ध जल में प्रवाहित करें।

मिथुन लग्न :  2010
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मिथुन लग्न : 2010 मिथुन राशि का स्वामी बुध वर्षारम्भ में धनु राशि में होकर सप्तम से गोचर भ्रमण कर रहा है जो जीवनसाथी के सहयोग से कार्य में प्रगति देगा, लेकिन राहु के नीचस्थ होकर साथ होने से कुछ कष्टकारी भी रहेगा। बुध जब-जब मकर, कुंभ, मिथुन, कन्या से भ्रमण करेगा तब-तब उत्तम सफलतादायक रहेगा। इस स्थिति में धन, व्यापार, नौकरी में सहायक भी होगा। शनि का गोचरीय भ्रमण चतुर्थ भाव से होने के कारण माता, भूमि भवन, जनता से संबंधित मामलों मे लाभान्वित करेगा। स्थानीय राजनीति में भी लाभकारी रहेगा।
गुरु अपना गोचर-भ्रमण नवम व दशम भाव से भ्रमण करेगा जो लाभकारी होने के साथ-साथ प्रगतिदायक भी होगा। अविवाहितों के लिए यह वर्ष अति शुभ परिणाम देगा। व्यापार-व्यवसाय में तथा नौकरी में अनुकूल रहेगा। नवीन कार्य योजनाओं में भी सफलता मिलेगी। सवा पाँच रत्ती का पन्ना अवश्य पहनें।

कर्क लग्न : 2010
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कर्क लग्न : 2010 कर्क लग्न वालों का स्वामी चन्द्र है जो सवा दो दिन में एक राशि बदलता है। वर्षारम्भ में चन्द्र मिथुन राशि पर होने से कार्य में उत्तम सफलता के आसार है। बाहरी संबंधों में सफल यात्रा के योग भी बनते है। चन्द्र जब-जब कर्क, वृषभ में होगा तब उत्तम सफलता देगा। चन्द्र जब वृश्चिक राशि में होगा तब मानसिक परेशानी व कार्य में देरी का कारण भी बनेगा। बाकि राशियों में उनके स्वामी की स्थिति अनुसार फलदायक रहेगा। जब-जब गुरु का साथ मिलेगा तब-तब महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी।
जब-जब चन्द्र-सूर्य की युति बनेगी तब-तब मनसिक चिन्ता बढ़ेगी। गुरु कर्क लग्न से अष्टम गोचरीय भ्रमण करने के कारण भाग्य में कुछ रूकावट के बाद सफलताकारक रहेगा। शनि का गोचरीय भ्रमण तृतीय भाव से होने के कारण पराक्रम में वृद्धि,भाई का साथ, मित्रों से सहयोग आदि प्राप्त होगा। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे। संचार माध्यम से शुभ समाचार मिलेगा। चन्द्र ग्रहण से वर्षारम्भ होने के कारण आपको नित्य प्रतिदिन गायत्री मन्त्र का जाप करना शुभ परिणाम देगा। शुभ मुहूर्त में उत्तम मोती का लॉकेट चाँदी में बनवाकर धारण करें,लाभ होगा।
सिंह लग्न : 2010
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सिंह लग्न : 2010
सिंह लग्न वालों का स्वामी सूर्य है जो वर्षारम्भ में ही ग्रहण से ग्रस्त है साथ ही बुध व शुक्र के होने से आर्थिक मामलों में सावधानी रखना होगी। परिश्रम अधिक करने पर ही सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। जोखिम के कार्यों से बचकर चलें। महत्वपूर्ण कार्य कुछ दिनों के लिए टालें। जब-जब सूर्य मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु व मीन में आएगा तब-तब लाभ के योग बनेंगे। महत्वपूर्ण कार्य भी होगें। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। मान सम्मान बढ़ेगा।
गुरु का गोचरीय भ्रमण पूरे वर्ष में सिंह लग्न से सप्तम व अष्टम भाव से होगा। इस समय गुरु वैवाहिक जीवन के लिए ठीक-ठीक रहेगा। शनि का गोचरीय भ्रमण द्वितीय भाव से जीवनसाथी से लाभ देगा। दैनिक व्यवसाय में सफलतादायक समय रहेगा। नीच का राहु पंचम भ्रमण करने से थोड़ी सावधानी रखने का समय रहेगा। विशेषकर विद्यार्थी वर्ग व सन्तान पक्ष के लिए सावधानी की आवश्यकता है। राहु की शांति हेतु महामृत्युंजय के मन्त्रों का जाप करना श्रेष्ठ रहेगा।



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