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जैन धर्म में अक्षय तृतीया का है खास महत्व, आप भी जानें यहां

सोमवार,मई 2, 2022
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जैन धर्म के अनुसार अक्षय तृतीया (akshay tritiya) के दिन जैन धर्म के पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का प्रथम आहार हुआ था, उस दिन वैशाख शुक्ल तृतीया थी। god adinath worship
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24th Tirthankar in Jainism जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मदिवस को आज महावीर जयंती (Mahavir Janma Kalyanak) के नाम से जाना जाता है। जैन समाज द्वारा पूरे भारत में भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप मे 'महावीर जयंती' (celebrates the ...
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14 अप्रैल को भगवान महावीर स्वामी की जयंती (Mahveer Jayanti 2022) है। भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर हैं। भगवान महावीर ने जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत/ मंत्रों पर अधिक जोर दिया, वे सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य हैं।
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महावीर मुक्तिपथ पर दृढ़ कदमों से बढ़े जा रहे थे। तभी पीछे से उन्हें एक करुण पुकार सुनाई दी। उनके कदम ठिठक गए। पीछे मुड़कर देखा तो एक दुर्बल ब्राह्मण लाठी के सहारे गिरता-पड़ता दौड़ा आ रहा था।
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आज भी पूरी दुनिया के लिए भगवान महावीर स्वामी के उपदेश बहुत जरूरी है। अहिंसा का मार्ग अपना कर दुनिया को बचाया जा सकता है।
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जब महारानी त्रिशला भी नगर में हो रही अद्‍भुत रत्नवर्षा के बारे में सोच रही थीं। यह सोचते-सोचते वे ही गहरी नींद में सो गई। उसी रात्रि को अंतिम प्रहर में महारानी ने आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन सोलह शुभ मंगलकारी स्वप्न देखे।
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जैन धर्म में रोहिणी व्रत प्रतिमाह मनाया जाता है। मान्यतानुसार यह व्रत स्वास्थ्य, सुख और शांति देता है। इस व्रत के प्रभाव से आर्थिक समस्याओं से छुटकारा भी मिलता है। जैन पंचांग के अनुसार, 10 मार्च 2022, गुरुवार को रोहिणी व्रत (Rohini Vrat 2022) मनाया ...
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जैन पंचांग के अनुसार, 10 फरवरी को रोहिणी व्रत (Rohini Vrat 2022) मनाया जा रहा है। यह व्रत प्रतिमाह मनाया जाता है। मान्यतानुसार रोहिणी व्रत अच्छा स्वास्थ्य, सुख और शांति देता है, इस व्रत के प्रभाव से आर्थिक समस्याओं से छुटकारा भी मिलता है।
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पौष कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को भगवान पार्श्वनाथ की जयंती मनाई जाती है। इस बार यह जयंती अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 29 दिसंबर 2021 बुधवार को मनाई जाएगी। जैन धर्म के 24 तीर्थंकर है। प्रथम ऋषभनाथ हैं तो अंतिम महावीर स्वामी। भगवान पार्श्वनाथ 23वें ...
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Lord Mahavir Nirvana Day जहां कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन हिन्दू धर्मावलंबी दीपावली पर्व मनाते हैं, वहीं जैन धर्म में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस मनाया जाता है। इसी दिन भगवान महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। प्रतिवर्ष दीपावली के ...
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mahavir life story दीपावली के दिन भगवान महावीर स्वामी का निर्वाणोत्सव मनाया जाता है। यहां पढ़ें उनके जीवन के 5 प्रेरणादायी कथाएं...
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मुनि विद्यासागर जी महाराज एक प्रख्यात दिगंबर जैन आचार्य हैं। वे जैन धर्म के तपस्वी, अहिंसा, करुणा, दया के प्रणेता और प्रखर कवि सं‍त शिरोमणि हैं।
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क्षमावणी पर्व या 'क्षमा दिवस' दिगंबर जैन धर्मावलंबियों द्वारा मनाया जाने वाला एक खास पर्व है। इसे क्षमावाणी, क्षमावानी या क्षमा पर्व भी कहते हैं। दिगंबर अनुयायियों द्वारा यह पर्व आश्विन मास कृष्ण पक्ष की एकम के दिन मनाया जाता हैं। इस वर्ष यह पर्व 21 ...
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भगवान महावीर के अनुसार 'क्षमा वीरों का आभूषण है'। क्षमा मांगने से अहंकार ढलता और गलता है, तो क्षमा करने से सुसंस्कार पलता और चलता है। पर्युषण पर्व आदान-प्रदान का पर्व है
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10 सितंबर से दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व शुरू हो गए हैं। इस पर्व के अंतर्गत गुरुवार, 16 सितंबर 2021 को सुगंध/धूप दशमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन धूप खेवन का पर्व मनाया जाएगा। प्रतिवर्ष जैन धर्म में भाद्रपद शुक्‍ल दशमी को सुगंध दशमी का पर्व ...
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पर्युषण का अर्थ है परि यानी चारों ओर से, उषण यानी धर्म की आराधना। श्वेतांबर और दिगंबर समाज के पर्युषण पर्व भाद्रपद मास में मनाए जाते हैं। श्वेतांबर के व्रत समाप्त होने के बाद दिगंबर समाज के व्रत प्रारंभ होते हैं। 3 से 10 सितंबर तक श्वेतांबर और 10 ...
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इस वर्ष 10 सितंबर 2021 से जहां दिगंबर जैन समुदाय के पर्युषण महापर्व की शुरुआत होगी, वहीं श्वेतांबर जैन समुदाय संवत्सरी पर्व पर्व मनाएंगे। पंचांग तिथि के हिसाब से यह पर्व एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
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जैन धर्म के पर्युषण पर्व मानव को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा है। गणेश चतुर्थी या ऋषि पंचमी को संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। उस दिन लोग उपवास रखते हैं और स्वयं के पापों की आलोचना
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श्वेतांबर समाज 8 दिन तक पर्युषण पर्व मनाते हैं जिसे 'अष्टान्हिका' कहते हैं जबकि दिगंबर 10 दिन तक मनाते हैं जिसे वे 'दसलक्षण' कहते हैं। 3 से 10 सितंबर तक श्वेतांबर और 10 सितंबर से दिगंबर समाज के 10 दिवसीय पयुर्षण पर्व की शुरुआत होगी। 10 दिन तक उपवास ...
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9 सितंबर 2021, गुरुवार को रोटतीज व्रत मनाया जा रहा है। रोट तीज का व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, हिन्दू धर्मानुसार इस दिन हरतालिका तीज पर्व मनाया जाता है।
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दिगंबर जैन समाज में 9 सितंबर 2021, गुरुवार को रोट तीज पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सभी धर्मावलंबी मंदिरों में बैठकर ही श्री रोट तीज व्रत कथा को पढ़ते और सुनते हैं, देश-विदेश में बैठे सभी पाठकों के लिए यहां प्रस्तुत हैं श्री रोटतीज व्रत की कथा, आप भी ...
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9 सितंबर को जैन धर्म का रोटी तीज व्रत रहेगा। यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तीज को मनाया जाता है। यह पर्व खासकर दिगंबर जैन समाज मनाता है। दिगंबर जैन समाज बड़ी पक्षाल के बाद गुरुवार को रोट तीज मनाएगा। आओ जानते हैं‍ कि क्या है यह रोटीतीज का पर्व।
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श्वेतांबर और दिगंबर समाज के पर्युषण पर्व भाद्रपद मास में मनाए जाते हैं। श्वेतांबर के व्रत समाप्त होने के बाद दिगंबर समाज के व्रत प्रारंभ होते हैं। 3 से 10 सितंबर तक श्वेतांबर और 10 सितंबर से दिगंबर समाज के 10 दिवसीय पयुर्षण पर्व की शुरुआत होगी। 10 ...
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शुक्रवार, 3 सितंबर 2021 से श्वेतांबर जैन समाज के 8 दिवसीय पर्युषण पर्व प्रारंभ हो गए हैं। पर्युषण पर्व जैन धर्मावलंबियों का आध्यात्मिक त्योहार माना गया है।
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मंगलवार, 31 अगस्त 2021 जैन धर्म में महत्वपूर्ण माना गया रोहिणी व्रत किया जा रहा है। यह व्रत हर माह किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 27 नक्षत्रों में से एक नक्षत्र रोहिणी भी है।
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दिगंबर जैन जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। यह व्रत आत्‍मा के विकारों को दूर कर कर्म बंध से छुटकारा दिलाने में सहायक है।
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श्वेतांबर जैन समाज के पर्यूषण पर्व के पूर्व शुरू होने वाली 15 दिवसीय अक्षय निधि तपस्या की शुरुआत हुई। कल स्थापना के साथ ही संकल्प लेकर इस तपस्या में 15 दिन तक एकासन एवं संवत्सरी के दिन उपवास कर इसे पूर्ण किया जाएगा।
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जैन समुदाय की मान्यताओं में रक्षा बंधन की कथा कुछ अलग है। यह कथा एक मुनि द्वारा 700 मुनियों की रक्षा करने पर आधारित है। यह कहानी ही रक्षा बंधन के त्योहार का आधार है।
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जैन धर्म में आषाढ़ शुक्ल पंचमी का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज इस सदी के महान संत जिन्होंने अपने त्याग से धर्म की राह दिखाई हैं। ऐसे गुरु संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के 54वे दीक्षा दिवस पर शत्-शत् नमन।
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चातुर्मास का हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म में खासा महत्व है। तीनों ही धर्म के संत इसका कड़ाई से पालन करते हैं। हिन्दू धर्म के सभी बड़े त्यौहार इन्ही चौमासा के भीतर आते हैं. सभी अपनी मान्यतानुसार इन त्यौहारों को मनाते हैं एवं धार्मिक अनुष्ठान भी करते ...
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जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। जैन समुदाय में रोहिणी व्रत 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत किया जाता होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है।
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जैन मान्यता है कि पूर्णता प्राप्त करने से पूर्व तक तीर्थंकर मौन रहते हैं। अत: आदिनाथ को एक वर्ष तक भूखे रहना पड़ा। इसके बाद वे अपने पौत्र श्रेयांश के राज्य हस्तिनापुर पहुंचे।
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