ट्राई के आदेश से फेसबुक के अभियान को करारा झटका

Last Updated: सोमवार, 8 फ़रवरी 2016 (19:06 IST)
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नई दिल्ली। ने नेट निरपेक्षता का समर्थन करते हुए इंटरनेट पर कंटेन्ट, ऐप,  आदि के उपयोग के लिए टेलीकॉम कंपनियों के अलग-अलग टैरिफ के अनुसार शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी है और इसका उल्लंघन करने वालों पर 50 हजार रुपये दैनिक तथा इसमें अधिकतम 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।  ट्राई के इस आदेश से के को तगड़ा झटका लगा है। 
ट्राई के अध्यक्ष आर.एस. शर्मा ने टेलीकॉम कंपनियों के भेदभाव वाले टैरिफ पर आज आदेश जारी करते हुए संवाददाताओं से कहा कि इंटरनेट पर जो कुछ भी उपलब्ध है, उसके लिए अलग-अलग शुल्क नहीं वसूला जा सकता है और नियामक का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ऑपरेटरों द्वारा पहले से जारी इस तरह के विशेष टैरिफों को छह महीने में समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। >  
फेसबुक की योजना भारत में रिलायंस टेलिकॉम के साथ साझीदार कर मोबाइल फोन पर सस्ती वेब सेवाएं मुहैया कराने थी, जिसमें फेसबुक के सोशल नेटवर्क और मैसेजिंग सेवाओं के उपयोग के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। कंपनियों ने उपभोक्ताओं को खास ऑफर देने की बात कही थी। ट्राई के इस रोक के बाद वह मामला फंस गया है।  
 
टेलीकॉम रेग्युलेटरी ने सर्कुलर जारी कर कहा कि मोबाइल कंपनियां अब उपभोक्ता से किसी भी तरह का करार नहीं कर सकती हैं और न ही अलग सुविधा के लिए कीमत की शर्त ही लगा सकती है। ट्राई के मुताबिक, ग्राहकों की चिंताओं को देखते हुए उनकी सुविधा के लिए यह छूट दी गई है।
 
नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर काफी विवाद रहा है. इसका समर्थन करने वालों का तर्क है कि इंटरनेट के दायरे के बाहर रहने वाले लाखों लोगों को इससे निःशुल्क जोड़ा जा सकता है। वहीं फ्री बेसिक्स के आलोचकों का तर्क है कि फ्री बेसिक्स, नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत का उल्लंघन है। नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इंटरनेट सबके लिए समान रूप से पहुंच में हो।
 
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करना होगा ट्राई के इन निर्देशों का पालन-
- कंटेंट के आधार पर यानी कोई टेक्सट ज्यादा देखता है या वीडियो ज्यादा देखता है, इसके आधार पर इंटरनेट टैरिफ नहीं लागू किया जा सकता।
 
-ट्राई ने सख्ती से कहा कि इस दिशा निर्देश का पालन करने के लिए कोई भी इंटरनेट प्रदाता मोबाइल कंपनी किसी अन्य यूजर, कंपनी या संगठन किसी किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकती जिससे इंटरनेट भेदभाव का मामला सामने आए।
 
-मोबाइल कंपनियां आपदा कि किसी भी स्थिति में न्यूनतम टैरिफ के आधार पर इंटरनेट प्रदान करने की तैयारी में रहें।
 
-नियमों के उल्लंघन के लिए किसी तरह का वित्तीय हतोत्साहन भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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