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मुहर्रम : जानिए 10 खास बातें

शुक्रवार,अगस्त 20, 2021
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मुहर्रम : यौमे अशुरा क्या है?

शुक्रवार,अगस्त 20, 2021
इस्लाम धर्म में यौमे आशुरा पर्व सौहार्द का संदेश दे देता है। मोहर्रम माह की दसवीं तारीख जिसे यौमे आशुरा कहा जाता है, यह इमाम हुसैन की (रअ) शहादत का दिवस है। ‘यौमे आशूरा’ सभी मुसलमानों के लिए बेहद अहम् दिन माना गया है।
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इस वर्ष 20 अगस्त 2021 को मुहर्रम (मोहर्रम या ताजिया विसर्जन) पर्व मनाया जा रहा है। आइए जानें 10 धार्मिक तथ्य-
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इस वर्ष मुहर्रम मास का प्रारंभ 9 अगस्त 2021 से हो सकता है। साल 2021 के अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक, चांद के दिखने पर नए इस्लामी साल की शुरुआत होगी।
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ईद-उल-अजहा पैगंबर हजरत इब्राहीम अलेहिस्सलाम द्वारा अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माईल अलैय सलाम की कुर्बानी देने की यादगार है।
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ईद पर बकरे की कुर्बानी की जाती है। वैसे इस ईद को ईदुज्जौहा औए ईदे-अजहा भी कहा जाता है। इस ईद का गहरा संबंध कुर्बानी से है। पैगम्बर हज़रत इब्राहीम को खुदा की तरफ से हुक्म हुआ कि कुर्बानी करो, अपनी सबसे ज्यादा प्यारी चीज की कुर्बानी करो।
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बुधवार, 21 तारीख को ईद-उल-जुहा अर्थात् बकरीद मुसलमानों का प्रमुख त्योहार है। इस दिन मुस्लिम बहुल क्षेत्र के बाजारों की रौनक बढ़ जाती है।
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ईद-उल-अजहा या ईदे-अजहा मुस्लिम भाइयों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस वर्ष यह 21 जुलाई को मनाया जा रहा है। ईद तीन तरह की होती है। ईदे-अजहा के अलावा दो और ईद हैं- ईदुलफित्र या रमजान ईद
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21 जुलाई ईद-उल-जुहा पर्व मनाया जाएगा। देश के विभिन्न स्थानों पर चांद देखने के हिसाब से चांद की दसवीं तारीख को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाया जाता है।
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11 जुलाई 2021, रविवार को देश के विभिन्न स्थानों पर चांद देखा गया, इस हिसाब से चांद की दसवीं तारीख को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष बुधवार, 21 जुलाई को ईद उल-अज़हा का पर्व मनाए जाने की उम्मीद है।
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ईद-उल-अजहा या बकरीद मुस्लिम समुदाय का महत्वपूर्ण त्योहार होता है। यह त्योहार रमजान के पवित्र माह की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है। इस्लाम धर्म की मान्यता के अनुसार इसी दिन मुसलमानों के पैगंबर हजरत इब्राहीम
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जेरूशलम या यरुशलम बहुत ही प्राचीन शहर है। यह शहर मूल रूप से यहूदियों का शहर है लेकिन बाद में यह शहर ईसाई और मुस्लिमों के लिए भी पवित्र स्थल बन गया। इसे तीन धर्मों का मिलन स्थल भी माना जाता है। आओ जानते हैं मुस्लिमों के पवित्र स्थल अल अक्सा मस्जिद के ...
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रमजान का तीसरा अशरा ढलान पर है। तीसरे अशरे की 27वीं शब को शब-ए-कद्र के रूप में मनाया जाता है। इसी मुकद्दस रात में कुरआन भी मुकम्मल हुआ।
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हजरत अली का जन्म मक्का शहर में हुआ था। वे शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम थे। वहीं हजरत मोहम्मद पैगंबर के बाद सुन्नी मुसलमानों के चौथे खलीफा भी थे।
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इस्लामिक कैलेंडर को हिजरी साल के नाम से जाना जाता है। हिजरी सन की शुरुआत मोहर्रम माह के पहले दिन से होती है। इसकी शुरुआत 622 ईस्वी में हुई थी। हजरत मोहम्मद ने जब मक्का से निकलकर मदीना में बस गए तो इसे हिजरत कहा गया। इसी से हिज्र बना और जिस दिन वो ...
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होली के बाद से त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। विभिन्न तरह के त्योहार एक के बाद एक आने लगते हैं। हालांकि अधिक गर्मी होने पर भी त्योहार का सिलसिला जारी रहता है।
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सोमवार को चांद नहीं दिखा अत: 14 अप्रैल से रमजान (Ramadan 2021) का पाक महीना शुरू होगा। कोरोना संकट के इस दौर में रमजान की रौनक बाजारों में दिखाई नहीं देगी।
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मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 14 वीं तारीख और 15वीं तारीख के मध्य रात को शब-ए-बारात का त्योहार मनाया जाता है।
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हजरत अली का जन्म मक्का शहर में हुआ था। वे शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम थे। वहीं हजरत मोहम्मद पैगंबर के बाद सुन्नी मुसलमानों के चौथे खलीफा भी थे।
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कुरान, इस्लाम और मुसलमान

मंगलवार,दिसंबर 1, 2020
इस्लाम मजहब की उत्पत्ति पांचवीं सदी के उत्तरार्ध में हुई। इसके संस्थापक हजरत मुहम्मद स.व. हैं। कुरआन या कुरान ए पाक इस मजहब का पवित्र ग्रंथ है। इस्लाम को मानने वालों को मुसलमान व मुस्लिम कहा जाता है। पूरी दुनिया में 1.5 अरब से अधिक मुसलमान हैं। आओ ...
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