चेन्नई ने हारे हैं सबसे ज्यादा IPL फाइनल, ऐसे 5 बार मिली थी खिताबी हार

Last Updated: गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021 (23:30 IST)
बेशक आईपीएल ट्रॉफी जीतने मे दूसरे नंबर पर हो लेकिन आईपीएल फाइनल हारने में नबर 1 पर है। जितनी ट्रॉफी के पास है (5) उतने फाइनल्स चेन्नई सुपर किंग्स हार चुकी है। चेन्नई की टीम रिकॉर्ड 9वीं बार फाइनल में पहुंची है जिसका सामना अब कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा जिसका फाइनल में 100 प्रतिशत रिकॉर्ड है।

अगर इन 5 में से 3 फाइनल भी चेन्नई अपने नाम कर लेती तो सबसे ज्यादा आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाली टीम होती। चेन्नई ने सबसे ज्यादा आईपीएल फाइनल मुंबई इंडियन्स के खिलाफ गंवाए हैं। फाइनल में हार का सिलसिला आईपीएल के पहले साल में ही शुरु हो गया था। जानते हैं क्या हुआ उन मैचों में

2008- राजस्थान ने 3 विकेट से हराया

कहते हैं भाग्य उन्हीं का साथ देता है, जो कर्मवीर होते हैं और IPL 2008 फाइनल की रात को भाग्य कभी हार न मानने वाले यूसुफ पठान के साथ था, जिनके चमत्कारिक खेल से राजस्थान रॉयल्स यहाँ दिलों की धड़कन थाम देने वाले फाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स पर 3 विकेट से जीत दर्ज करते हुए इंडियन प्रीमियर लीग का पहला चैंपियन बन गया।

'मैन ऑफ द मैच' के अलावा सर्वाधिक छक्के लगाने का पुरस्कार पाने वाले यूसुफ पठान ने पहले गेंदबाजी में कमाल दिखाया और केवल 22 रन देकर चेन्नई सुपर किंग्स के चोटी के तीन विकेट लिए। चेन्नई ने हालाँकि सुरेश रैना (43), पार्थिव पटेल (38) और कप्तान महेंद्रसिंह धोनी (नाबाद 29) के उपयोगी योगदान से पाँच विकेट पर 163 रन बनाए।

रैना को हालाँकि इस बात का अफसोस लंबे समय तक रहेगा कि जब पठान 13 रन पर थे, तब इस खतरनाक बल्लेबाज का कैच कैसे छूट गया। पठान ने इसका पूरा फायदा उठाया और 39 गेंद पर 56 रन की पारी खेलकर आईपीएल के इतिहास में राजस्थान रॉयल्स का नाम अमर कर दिया।

सोहेल तनवीर ने अंतिम गेंद पर विजयी रन बनाकर रॉयल्स का स्कोर सात विकेट पर 164 रन पहुँचाया। आईपीएल की बोली में सबसे कम कीमत पर बिकी राजस्थान रॉयल्स को शेन वार्न ने अजेय बना दिया। जब टीम को जीत मिली, तब वे एक छोर पर बल्लेबाजी कर रहे थे।

यूसुफ पठान उस समय आउट हो गए जब टीम को जीत के लिए 14 गेंद पर 21 रन की जरूरत थी। अंतिम दो ओवर में 18 रन चाहिए थे। मखाया नतिनी के 19वें ओवर में दस रन बने, जिसमें वॉर्न का चौका शामिल था।

अब मामला छह गेंद और आठ रन पर था। लक्ष्मीपति बालाजी की पहली तीन गेंद पर दो रन बने, लेकिन अगली गेंद वाइड हुई और एक रन भी बना। चौथी गेंद पर एक और पाँचवीं पर दो रन बनने से स्कोर बराबर हो गया। गेंदबाजी में सर्वाधिक विकेट लेकर 'परपल कैप' के हकदार बने तनवीर ने कवर पर विजयी रन लेकर 45 दिन तक चली कहानी का रोमांचक अंत किया।

दोनों सेमीफाइनल एकतरफा रहे थे, लेकिन फाइनल में दर्शकों को असली मजा दिया। मैच उतार-चढ़ाव से भरा रहा लेकिन कहना होगा कि भाग्य पूरी तरह से रॉयल्स के साथ, क्योंकि एक समय उसका स्कोर तीन विकेट पर 43 रन था, जिसके बाद पठान और शेन वॉटसन ने 66 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की।

ग्रीम स्मिथ माँसपेशियों में खिंचाव के कारण इस महत्वपूर्ण मैच में नहीं खेल पाए। स्वप्निल असनोदकर के साथ पारी की शुरुआत करने के लिए उतरे नीरज पटेल ने मनप्रीत गोनी की गेंद अपने विकेट पर मारने से पहले 11 गेंद पर केवल दो रन बनाए। असनोदकर ने गोनी के दूसरे ओवर में दो बार गेंद सीमा रेखा पार पहुँचाई।

उन्होंने बाद में नतिनी की गेंद पर भी चौका जमाया लेकिन जब मोर्कल आए तो उनकी आफ स्टंप से बाहर जाती पहली गेंद पर ही प्वाइंट पर खड़े रैना को सीधा कैच थमा दिया। असनोदकर ने 20 गेंद पर 28 रन बनाए जिसमें चार चौके शामिल हैं।

मोर्कल के इसी ओवर में कामरान अकमल मिड ऑन से नतिनी के सीधे थ्रो पर रन आउट हो गए। मोर्कल का अगला ओवर भी घटना प्रधान रहा। उनकी शार्ट पिच पठान के हेलमेट से लगकर विकेटकीपर पटेल के दस्तानों में समा गई। चेन्नई की टीम को लगा कि उन्हें विकेट मिल गया है, लेकिन अंपायर बिली बोडेन अपनी जगह से नहीं हिले। धोनी ने उनसे बात भी की, क्योंकि बोडेन लेग बाई देना भूल गए थे।

बालाजी के ओवर में 14 रन लेकर वापसी करने वाले रॉयल्स ने तब बड़ी राहत की साँस ली जब पठान ने मुथैया मुरलीधरन की गेंद डीप मिड विकेट के ऊपर से खेलने के प्रयास में हवा में उछाल दी, लेकिन अपने क्षेत्ररक्षण के लिए मशहूर रैना इसे नहीं पकड़ पाए। तब पठान 13 रन पर थे।

पठान ने इसके बाद मुरलीधरन के अगले ओवर में लगातार दो छक्के जमाए, लेकिन किस्मत उनके साथ थी और जब वह 33 रन पर थे, तब गोनी ने अपनी गेंद पर उनका कैच छोड़ दिया। मुरलीधरन ने हालाँकि अपने तीसरे ओवर में वॉटसन (28) को बोल्ड कर दिया। उन्होंने 19 गेंद पर तीन चौके जमाए।

पठान का बल्ला तो बस आग उगल रहा था। उन्होंने बालाजी की गेंद पर चौका और छक्का जड़ने के बाद मुरलीधरन को फिर से निशाना बनाया और उनकी गेंद पर फिर से छक्का जमाया। मोहम्मद कैफ (12) ने भी इस ओवर की पहली गेंद छह रन के लिए भेजी, लेकिन अंतिम गेंद पर वे धोनी को कैच देकर पैवेलियन लौट गए।

मोर्कल का अंतिम ओवर भी घटना से भरा रहा। रविंदर जडेजा पहली गेंद पर आउट हुए जबकि तीसरी गेंद पर रन आउट होने से बाल-बाल बचे पठान अगली गेंद पर रैना के सीधे थ्रो पर रन आउट हो गए। उन्होंने 39 गेंद पर तीन चौके और चार छक्के लगाए। वॉर्न ने ऐसे में पूरी जिम्मेदारी संभाली और तनवीर पर भी दबाव नहीं बनने दिया।

इससे पहले वॉर्न ने टास जीतकर क्षेत्ररक्षण लेने के बाद गेंदबाजी में चतुराई भरे बदलाव किये जिसका उन्हें फायदा भी मिला। डीवाई पाटिल स्टेडियम की पिच धीमा खेल रही थी और शुरू में पार्थिव पटेल के खिलाफ पगबाधा की दो विश्वसनीय अपील भी हुई।

पटेल ने तनवीर के पहले ओवर में स्क्वायर और फिर शेनवॉटसन की गेंद कवर में चार रन के लिए भेजी। दूसरे सलामी बल्लेबाज एस विद्युत (16) वॉटसन के अगले ओवर में चौका और थर्ड मैन पर छक्का जमाया। वॉर्न का ऐसे मौके पर पठान को गेंद सौंपना अच्छा फैसला हुआ जिनकी गेंद पर रविंदर जडेजा ने डीप मिडविकेट पर विद्युत का बेहतरीन कैच लपका।

पठान को जल्द ही जब दूसरे स्पैल के लिए लाया गया तो उन्होंने पटेल को भी पैवेलियन भेज दिया। विकेटकीपर अकमल स्टंप करने से चूक गए लेकिन गेंद पटेल के बल्ले से लगकर गयी थी और अकमल ने तीसरे प्रयास में उसे अपने दस्तानों में थाम दिया। पटेल ने 33 गेंद का सामना किया और पाँच चौके लगाए।

रैना ने वॉर्न के दूसरे ओवर में लांग ऑन पर अपना पहला छक्का जड़ा और फिर मोर्कल (16) ने भी रॉयल्स के कप्तान की गेंद छह रन के लिए भेजी। दक्षिण अफ्रीकी मोर्कल ने पठान पर भी मिडविकेट पर छक्का लगाया, लेकिन अगली गेंद वह हवा में खेल गए। इस कैच को लेने के लिए अकमल और कैफ दोनों आगे बढ़े। विकेटकीपर ने कैच तो ले लिया लेकिन कैफ से भिड़ने के कारण वह घायल हो गए।

धोनी हाथ न खोल पाए इसलिए वॉर्न ने खुद ही गेंद संभाली। चेन्नई के कप्तान ने हालाँकि उनकी गेंद पर लांग ऑन पर छक्का जमा दिया जो वॉर्न की गेंदों पर इस टूर्नामेंट में लगा 19वाँ छक्का था। वॉर्न ने चार ओवर में 34 रन दिए।

रैना ने सिद्धार्थ त्रिवेदी की गेंद पर छक्का जड़ने के बाद तनवीर की गेंद भी चार रन के लिए भेजी लेकिन वॉटसन की ऑफ स्टंप से बाहर की ओवर पिच की गेंद पर उन्होंने लांग आफ पर जडेजा को आसान कैच थमा दिया।

चेन्नई ने अंतिम पाँच ओवर में 46 रन बनाए लेकिन इस बीच केवल चार बार गेंद सीमा रेखा पार गयी।वॉटसन ने इस बीच दो ओवर किए जिनमें उन्होंने 13 रन दिए जबकि तनवीर ने अपने अंतिम तीन ओवर में 34 रन खर्च किए।

तनवीर का अंतिम ओवर काफी महंगा साबित हुआ, जिसमें धोनी ने लांग ऑन पर छक्का जमाया और एस. बद्रीनाथ ने चौका जड़ा। इस ओवर की पहली गेंद पर तनवीर ने हालाँकि चामरा कापुगेदारा का विकेट लेकर आईपीएल में अपने कुल विकेटों की संख्या 22 पर पहुँचाई।



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