खौलते तेल से भरी कड़ाही में ध्यान...

बैंकॉक|
बैंकॉक। अभी तक तो हमने खौलते गरम तेल में हाथ डालकर पकौड़े और मछली तलते लोंगों के बारे में हमें जानकारी है, लेकिन बौद्ध भिक्षुओं का ध्यान इन चीजों से आगे होता है।
 
के एक बौद्ध भिक्षु के बारे में कहा जाता है कि खौलते तेल की कड़ाही में शांत चित्त होकर ध्यान करते हैं। सिंधु के नांग बु लप्रू प्रदेश में एक बौद्ध भिक्षु अपनी साधना के तहत खौलते तेल में खड़े होकर ध्यान करते हैं और जब वे ऐसा करते हैं तो उनके चारों ओर बड़ी संख्या में लोग और अन्य बौद्ध भिक्षु भी खड़े होते हैं।
 
खौलते तेल की कड़ाही में बैठने के बाद भी उनके शरीर को कोई हानि नहीं पहुंचती है और न ही वे ऐसा दर्शाते हैं कि उन्हें कोई परेशानी हो रही है। ऐसा दावा किया जाता है कि वे घंटों तक इसी तरह बैठकर कड़ाही में ध्यान लगाकर बैठे रहते हैं और जब वे गरम तेल की कड़ाही में बैठ जाते हैं तो आग की लपटें पूरी कड़ाही को चारों ओर से घेर लेती है।
 
भिक्षु बिना किसी परेशानी के अपने ध्यान में रत बने रहते हैं और देखने वाले दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाते हैं। इस बारे में कुछ लोगों का कहना है कि कड़ाही के गरम होकर खौलने और उसमें बौद्ध भिक्षु के खड़े होने या बैठने से पहले ‍वे अपने शरीर और कड़ाही पर किसी प्रकार की जड़ी बूटी लगा लेते हैं जिसके कारण उनके शरीर पर खौलते तेल के तापमान का उनके शरीर पर कोई असर नहीं छोड़ता है।  



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