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बख्शी खुमानसिंह का रोजनामचा

शुक्रवार,जून 3, 2022
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इंदौर के अति लोकप्रिय और सुदर्शन व्यक्तित्व के धनी श्रीमंत युवराज सवाई यशवंतराव होलकर की बारात में लुटाए गए थे सोने के फूल। युवराज यशवंतराव होलकर का विवाह 9 फरवरी 1924 को महारानी संयोगिता के साथ हुआ था। युवराज की बारात का काफिला लगभग 8 किलोमीटर लंबा ...
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महाराजा माधवराव सिंधिया के साथ रावराजा सर सेठ हुकुमचंदजी के साथ आत्मीय संबंध थे। वर्ष 1924 की बात है, जब दोनों में किसी बात पर एक-एक कौड़ी की शर्त लग गई। महाराजा शर्त जीत गए किंतु सेठ साहब महाराजा को शर्त के मुताबिक कौड़ी भेजना भूल गए। तब महाराजा ने ...
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किस्सा है 1937 का तब 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार करने वाले समूह के प्रमुख जे.आर.डी. टाटा हवाई जहाज से चिटि्‌ठयां लेकर इंदौर आते थे। टाटा एयर लाइंस ने उन दिनों दिल्ली से ग्वालियर-भोपाल और इंदौर होते हुए बंबई के लिए हवाई डाक सेवा शुरू की थी। ...
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इंदौर में व्यायाम के शौकीनों के लिए चौराहों पर ही साधन उपलब्ध कराए गए थे, जहां व्यायाम के शौकीन अपनी समय सुविधानुसार व्यायाम किया करते थे। वैसे उन दिनों व्यायाम के शौकीनों तथा सैनिकों को सुबह-शाम नियमित व्यायाम करते देखना कोई अचरज की बात नहीं थी। उन ...
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यह सोचकर आश्चर्य होता है कि जब इंदौर में वाहन न के बराबर थे तथा आबादी भी कम थी, उस जमाने में प्रदूषण नियंत्रण हेतु कारगर उपाय किए गए थे। उस समय गंदगी फैलाने वाले को दंडित भी किया जाता था।
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आज के इंदौर में होटल व्यवसाय संपूर्ण प्रदेश में सर्वाधिक है। होटल हो या खानपान की दुकानें, इसकी पृष्ठभूमि जानने के लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। एक समय था कि होटल में कुछ भी खाना सामाजिक दृष्टि से ठीक नहीं माना जाता था। रहने के लिए लॉज भी ...
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राज्य प्रजामंडल और प्रजा परिषद के गठन साथ ही नगर में राजनीतिक हलचल आरंभ हो गई थी। दिसंबर 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हो चुकी थी। नगर में देशप्रेम और आजादी की दीवानगी युवा वर्ग में जोश के साथ थी। उस दौर में कांग्रेस एकमात्र दल था, ...
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चाय पर चर्चा पर चर्चा एक आम मुहावरा प्रचलित है। आज के दौर में चाय भारतीय स्वागत परंपरा का एक हिस्सा हो गई है। नित्य नए स्वरूप में खुलती चाय की दुकानें अपने बाजार में प्रसिद्ध हो रही हैं। भारत में चाय की खेती और उसकी संभावना को तलाशने के लिए 1834 में ...
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जीवन में अनेक तिथियां महत्वपूर्ण होती हैं, जिनका सदैव स्मरण करते रहते हैं। यहां नगर के विकास क्रम की वे तिथियां दी जा रही हैं, जो सार्वदेशिक महत्व की हैं। संभव है कि इनके साथ ही और भी तिथियां हों, जो नगर के लिए महत्वपूर्ण हैं और यहां सम्मिलित नहीं ...
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प्राय: जब भी हम बुजुर्गों से उनके जमाने की चर्चा करते हैं तो वे अपने जमाने की सस्ती वस्तुओं का हवाला अवश्य देते हैं। सहसा उनके कथन पर नई पीढ़ी को भरोसा ही नहीं हो पाता। हम चर्चा कर रहे हैं 1874 ईं के एक अभिलेख की जिसमें मार्च 1874 में इंदौर नगर में ...
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महानुभाव पंथ के अनुयायी आजीबा एक तपस्वी योगी थे जिनकी समस्त साधना तुलसाबाई नामक कन्या के रूप में साकार हो उठी थी। अनुपम सौंदर्य व रूप लावण्य में उसका कोई सानी न था। किशोरवय में ही उसका विवाह कर दिया गया था। उसे मांडू में लोग देखकर स्तब्ध रह जाते थे। ...
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सती प्रथा के साथ ही राजपुताने में खांडा रानी की परंपरा भी थी जिसके अंतर्गत वर यदि युद्ध या सैनिक अभियान में व्यस्त रहता था तो उसके खांडे (तलवार) को प्रतीक मानकर उसके साथ सात फेरे ले लिए जाते थे। ऐसे विवाहों को पूर्ण सामाजिक मान्यता प्राप्त थी। ऐसे ...
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बंबई का मेयर अपनी कार की सीट पर बगल में 22 वर्षीय एक अद्वितीय सुंदरी को बैठाकर बंबई की खूबसूरत चौपाटी पर चला जा रहा था। कार रोककर शायद वे दोनों सूर्यास्त को निहार रहे थे, तभी बच्चू भाई नामक एक व्यक्ति उस सुंदरी के पास पहुंचा, जिसका नाम मुमताज था। ...
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महाराजा शिवाजीराव होलकर के साथ कई किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि प्रायः वे राजबाड़े के सामने वाले झरोखे पर बैठकर आने-जाने वाले लोगों को देखा करते थे। जैसे ही उनकी दृष्टि अंगरेज पर पड़ती उसे तत्काल पकड़वाकर राजबाड़े में बुलवाया जाता और फिर उसकी ...
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गफूर खां एक अफगान था जिसके पुरखे अपना भाग्य आजमाने के लिए हिंदुस्तान चले आए थे। गफूर खां ने मोहम्मद अयाज की पुत्री से विवाह किया था, जो जोधपुर दरबार का एक उच्चाधिकारी था। उसकी दूसरी पुत्री का विवाह अमीर खां से हुआ, जो राजपुताने में एक प्रभावशाली ...
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मध्यभारत में इंदौर प्रारंभ से ही शिक्षा व शैक्षणिक गतिविधियों का अग्रणी केंद्र रहा। नगर में अनेक विद्यालयों व महाविद्यालयों की स्थापना ने नगर में एक बौद्धिक वातावरण निर्मित किया। शिक्षितजनों के लिए अपनी साहित्यिक गतिविधियां संचालित करने वाली कोई ...
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इंदौर नगर से गंदगी को समाप्त करने तथा सड़कों को पक्का करने के उद्देश्य को लेकर ही 1870 में इंदौर नगर पालिका की स्थापना की गई थी। पालिका सड़कों के मामले में भले ही सफल रही हो किंतु स्वच्छता के मोर्चे पर उसे अधिक सफलता नहीं मिली थी। फलस्वरूप 1902 से ...
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इंदौर में नगर पालिका की स्‍थापना के बाद ही उसे नगर में स्वच्छता व प्रकाश व्यवस्था का दायित्व सौंप दिया। था। नगर की अधिकांश सड़कें 1884-85 तक की कच्ची थीं। उन पर दिनभर वाहनों के आवागमन से धूल उड़ा करती थी। इस धूल को रोकने के लिए इन कच्ची सड़कों पर ...
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'इंदौर मदरसे' की स्‍थापना (1841 ई.) के पूर्व नगर में प्राथमिक शिक्षा केवल धर्म, नैतिकता, संस्कृत व व्यावहारिक ज्ञान तक ही सीमित थी। प्राथमिक शालाओं के अभाव में बच्चे मंदिरों, मस्जिदों में जाकर पुजारियों और मौलवियों से शिक्षा पाते थे। कुछ धनिक ...
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