सिंहस्थ 2016 के स्नान को लेकर अखाड़ा परिषद से विवाद


उज्जैन। मध्यप्रदेश की नगरी में अगले वर्ष होने वाले में किन्नर अखाड़े  के गठन एवं परी (महिला) अखाड़े को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् द्वारा मान्यता नहीं दिए जाने से  पिछले सिंहस्थ 2004 की तरह विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। 
 
देश की 4 सबसे प्राचीनतम नगरियों- हरिद्वार, प्रयाग, नासिक एवं उज्जैन में प्रति 12 वर्षों के अंतराल में  दुनिया के सनातन धर्मावलंबियों के सबसे बड़े समागम सिंहस्थ के नीति निर्धारण में सर्वोच्च संस्थान  अखिल भारतीय अहम भूमिका होती है और वर्तमान गठित की गई अखाड़ा परिषद में 13  मान्यताप्राप्त अखाड़े मान्यता शामिल हैं। 
 
इन चारों धार्मिक नगरियों में 3 वर्ष के बाद आध्यात्मिक चेतना के पर्व कुंभ का आयोजन किया जाता है।  अखाड़ा परिषद के साथ उस दौरान क्रमवार अखाड़े के शाही सहित अन्य पर्व की तिथि के अलावा  कुंभ प्रारंभ होने से पहले निकलने वाली पेशवाई को लेकर कुंभ महापर्व के शुरू होने के पूर्व प्रशासनिक  अधिकारियों के साथ बैठक होती है। 
 
नासिक में संपन्न हुए कुंभ के दौरान भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ज्ञानदास महाराज को पद से हटाकर  उज्जैन में महंत नरेन्द्र गिरि को परिषद का अध्यक्ष बनाया गया। 
 
उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ 2004 में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा से जुड़े श्रीपंच आह्वान एवं श्रीपंच  अग्नि अखाड़े के आपसी विवाद को लेकर अखाड़ा परिषद को बहिष्कार करने का फैसला पत्र देकर सूचित  किया था। उस दौरान सिंहस्थ 2004 प्रारंभ होने से पहले अखाड़ा परिषद एवं प्रशासन के अधिकारियों की  बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया और साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उज्जैन जिला  मजिस्ट्रेट द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता के तहत धारा 144 के तहत आदेश पारित कर दोनों अखाड़ों की  पेशवाई एवं स्नान की अनुमति प्रदान नहीं की गई। उक्त दोनों अखाड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।  हालांकि दोनों अखाड़ों के सिंहस्थ 2004 के मेला क्षेत्र में शिविर लगाए गए लेकिन इससे जुड़े संतों ने न  स्नान किया और न ही शाही स्नान में शामिल हुए। 
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इसी प्रकार 2004 में नीमिया बाबा एवं उनके साथियों महंतो का अणी अखाड़ों द्वारा खालसा निरस्ती  करके बष्हिकार किया गया। नीमिया बाबा द्वारा चतु: संप्रदाय के महंत विशंभरदास को महंत बनाने एवं  चतु: संप्रदाय को स्थान दिलाने के लिए चतु: संप्रदाय खालसा परिषद के माध्यम से मांग की गई थी।  उस दौरान उक्त तीनों अखाड़ों के न्यायालय में वाद प्रस्तुत किए गए।
 
सिंहस्थ में शामिल नहीं होने को लेकर प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी इनके शिविरों में समझाने के लिए  गए थे लेकिन संतों ने इनकी बात मानने से इंकार कर दिया था। इस दौरान उन्होंने उन पर पथराव  किया था जिसमें 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इसके बाद 32 लोगों को गिरफ्तार किया जिनमें  25 साधु थे।
 
उज्जैन के समीप हासामपुरा में स्थित अध्यात्म आश्रम के महंत ऋषि अजय दास महाराज ने शुक्रवार को  यहां बताया कि अगले वर्ष 22 अप्रैल से 21 मई तक चलने वाले सिंहस्थ कुंभ में शाही स्नान एवं  पेशवाई को लेकर सतानत धर्म से वास्ता रखने वाले मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता, राजस्थान,  छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और वडोदरा सहित देशभर के प्रमुख किन्नरों ने एकत्रित होकर गत दिन यहां  किन्नर अखाड़े का गठन कर सागर की पूर्व महापौर कमला बुआ को अखाड़े का प्रमुख बनाया है और  कहा कि देश में 10 पीठाश्वर नियुक्त किए जाएंगे।
 
बैठक में 6 पीठाश्वर को नियुक्त किया गया है। ये सभी सिंहस्थ 2016 के पूर्व अखंड महामंडलेश्वर नियुक्त  करेंगे। उन्होंने आश्रम में 13 अक्टूबर को बैठक में किन्नर अखाड़ा सिंहस्थ 2016 में शाही स्नान सहित  पेशवाई भी निकालने का निर्णय लिया। 
 
परी (महिला) अखाड़े को अखाड़ा परिषद में शामिल कर मान्यता दिए जाने को लेकर नासिक में चर्चा के  दौरान विवाद हो चुका है। परी अखाड़े की प्रमुख साध्वी त्रिकाल भवंता ने उज्जैन में गत दिनों सिंहस्थ  2016 में सभी स्नान करने के साथ पेशवाई निकालने की घोषणा की है। 
 
ऋषि अजयदास ने सिंहस्थ 2016 की तैयारी करने जानकारी देते हुए बताया कि परी अखाड़े की प्रमुख  साध्वी त्रिकाल भवंता एवं किन्नर अखाड़े संयुक्त रूप से अखाड़ा परिषद से मान्यता के लिए प्रयास कर रहे  है और किन्नर अखाड़े तथा परी अखाड़े ने सिंहस्थ मेला अधिकारी को मेले क्षेत्र में शिविर लगाने पत्र भी  दिया है। (वार्ता)
 



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