अनंगपाल तोमर और तोमरों का शासन

anangpal tomar
अनिरुद्ध जोशी|
मध्यकालिन भारत की शुरुआत सम्राट हर्षवर्धन (590-647) से होती है। हर्षवर्धन का दक्षिण भारत के सम्राट पुलकेशी द्वितीय (शासनकाल 609-642) से हुआ था। इसी काल में कश्मीर में बहुत ही शक्तिशाली सम्राट ललितादित्‍य (सन् 697 से सन् 738) का राज्य भी रहा था। इसी काल में सिंध के राजा दाहिर (663--712 ईस्वी) में रहा था। आओ जानते हैं इस बार राजा अनंगपाल तोमर के बारे में संक्षिप्त जानकारी।


अनंगपाल तोमर (शासनकाल 736-754 ई) :
1. दिल्ली के इतिहास के अनुसार मौर्य और गुप्त साम्राज्य के बाद दिल्ली का जिक्र 737 ईस्वी में मिलता है। इस दौर में राजा अनंगपाल तोमर ने पुरानी दिल्ली (इंद्रप्रस्थ) से 10 मील दक्षिण में अनंगपुर बसाया। यहां ढिल्लिका गांव था। कुछ वर्षों के पश्‍चात्य उसने लालकोट नगरी बसाई। फिर 1180 में चौहान राजा पृथ्वीराज तृतीय ने किला राय पिथौरा बनाया। इस किले के अंदर ही कस्बा बसता था।
2. तोमर राजवंश की स्थापना अनंगपाल सिंह तोमर प्रथम ने 736 ईस्वी में दिल्ली में की थी। लगभग इसी समय नागभट्ट प्रथम द्वारा 730 ईस्वी में गुर्जर प्रतिहार वंश की स्थापना की गई थी। उस समय 720 ईस्वीं में आबू पर्वत पर हुए एक यज्ञ में क्षत्रिय शासकों ने मिलकर विदेशी आक्रमणकारियों को भगाने का संकल्प लिया था।

3. दिल्ली में तंवरों (तोमर) का शासक 736 से 1193 ईस्वी के बीच रहा। अनगपाल तोमर प्रथम (736-754 ई) दिल्ली के संस्थापक राजा थे और इस वंश के अंतिम शासक तेजपाल द्वितीय (1192-1193 ई) थे। इस बीच कुल 23 शासक हुए जिसमें अंगपाल द्वितीय एक बड़ा शासक था।
4. तोमर, तंवर या कुंतल उत्तर पश्चिम भारत का एक गोत्र है जो जाट, गुर्जर और राजपूत जातियों में पाया जाता है।

5. दिल्ली के तोमर शासकों के अधीन दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा सहित कई छोटे छोटे राज्य भी थे। इस वंश ने बड़ी वीरता के साथ तुर्कों का सामना किया और कई सदी तक दिल्ली को सुरक्षित रखा।



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