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संजा लोकपर्व : क्यों खास है यह पर्व, जानिए पौराणिक महत्व

रविवार,सितम्बर 26, 2021
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अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है। पितृ पर्व के इन दिनों में लगभग सभी के घरों में पितृ तर्पण करके उनको याद किया जाता है। श्राद्ध पक्ष में पितरों और देवताओं के लिए कई तरह के भोग बनाए जाते हैं।
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गजलक्ष्मी व्रत के दिन हाथी की पूजा और महालक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस साल यह व्रत मत-मतांतर से 28 और 29 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस व्रत में मिट्टी के गज बनाए जाते हैं।
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महालक्ष्मी पर्व यानी गजलक्ष्मी व्रत है। इस दिन को दीपावली से भी अधिक शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत में अगर अपनी राशि अनुसार विधि-विधान से पूजन किया जाए तो महालक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं और जीवन में धन-समृद्धि आती है।
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गंगा नदी को भारत में सबसे पवित्र नदी माना जाता है। ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस वर्ष यह 20 जून 2021 को मनाया जाएगा। आओ जानते हैं मां गंगा के 10 पौराणिक और 10 ...
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महालक्ष्मी व्रत पूजा के समय पढ़ें धन की देवी महालक्ष्मी जी की आरती और उनके पौराणिक मंत्र- ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निस दिन सेवत हर-विष्णु-धाता ॥ॐ जय...
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हमारे पौराणिक शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का बहुत अधिक महत्व माना गया है। वर्ष 2021 में यह एकादशी 2 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जा रही हैं।
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पितृ पक्ष में आने वाले गजलक्ष्मी व्रत पूजन की सरल प्रामाणिक विधि... व्रत को 16 वर्षों तक ही पूरे करना चाहिए। यदि परिस्थितिवश 16 वर्ष के बाद उद्यापन नहीं कर सकें, तो व्रत को आगे भी किया जाता रहे, जब तक कि उद्यापन न हो। यह व्रत आश्विन (क्वांर) कृष्ण ...
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भाद्रपक्ष की शुक्ल अष्टमी (राधा अष्टमी) से लेकर श्राद्ध की अष्टमी तक महालक्ष्मी के विशेष आशीष झरते-बरसते हैं।
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धार्मिक शास्त्रों में किसी भी खास अवसर पर धन की देवी लक्ष्मी पूजन करने का बहुत महत्व माना गया है। इस दिन माता लक्ष्मी का यह चालीसा जीवन को खुशहाली से भरकर मनचाहा आशीर्वाद देता है
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इस बार पितृ पक्ष ( Pitru Paksha 2021 Start Date) 20 सितंबर 2021, सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ हो गए हैं। पितृ पक्ष का समापन 6 अक्टूबर 2021, बुधवार को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा। आओ जानते हैं कि ...
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अश्‍विन माह में श्राद्ध पक्ष की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ हो जाता है। इस वर्ष 7 अक्टूबर 2021 को नवरात्रि का पर्व प्रारंभ होने जा रहा है। वर्ष की चार नवरात्रियों में से एक इस नवरात्रि पर गरबा उत्सव की धूम रहती है और जगह-जगह पांडाल ...
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आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। इस दिन सभी जाने और अनजाने पितरों हेतु निश्चित ही श्राद्ध किया जाना चाहिए। इस दिन आप पितरों की स्तुति के लिए रचे गए इन 5 पाठों को पढ़ेंगे ...
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इस वर्ष श्री महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ सोमवार, 13 सितंबर 2021 को हुआ था। यह व्रत 16 दिनों तक चलता है। इस व्रत का समापन मंगलवार, 28 सितंबर 2021 को होगा। प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से भी महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ होता है,
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एक बार महालक्ष्मी का पर्व आया। हस्तिनापुर में गांधारी ने नगर की सभी स्त्रियों को पूजा का निमंत्रण दिया परन्तु कुन्ती से नहीं कहा।
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इस बार पितृ पक्ष ( Pitru Paksha 2021 Start Date) 20 सितंबर 2021, सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से आरंभ हो गए हैं। पितृ पक्ष का समापन 6 अक्टूबर 2021, बुधवार को आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होगा। आओ जानते हैं कि ...
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हिन्दू धर्म अनुसार शनिवार भगवान शनिदेव का वार माना जाता है। शनिदेव शनि ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह के कारण ही कुंडली में साढ़े साती और ढैय्या का गोचर होता है। आओ जानते हैं भगवान शनिदेव का अनजाने 25 राज।
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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्राद्ध पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक कुल 16 दिनों तक चलता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 20 सितंबर 2021, सोमवार (Pitru Paksha 2021 Start Date) को आरंभ होंगे जिसका समापन 6 अक्टूबर 2021, बुधवार को ...
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कई लोग भगवान शनि के मंदिर जाते हैं। परंतु परंपरा के अनुसार कुछ सावधानी रखना भी जरूरी होती है और भी कई बातें हैं जिनका ध्यान रखना होता है अन्यथा शनि महाराज कब नाराज होकर आपके लिए संकट खड़ा दे यह कहा नहीं जा सकता। तो आओ जानेत हैं शनि मंदिर जाने और ...
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भाद्रपद की पूर्णिमा अर्थात 20 सितंबर 2021 से अश्‍विन माह की अमावस्या अर्थात 6 अक्टूबर तक श्राद्ध पक्ष रहेगा। पितृ पक्ष श्राद्ध में तर्पण, पिंडदान और पूजन करना के एक निश्‍चित समय होता है। सर्वपितृ अमावस्या पर आप श्राद्ध करने जा रहे हैं तो जा‍न लीजिये ...
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