हिन्दी कविता : सिया जू की प्यारी मिथिला नगरिया

Ram-Sita Vivah
सिया जू की प्यारी मिथिला नगरिया
देखो ले के आए हैं

राम संवरिया
बरात को देखकर सखिया मुस्काई
कनवा में धीरे-धीरे फुसफुसाई
एक सखी बोली कि
नीखे-नीखे राम हैं
लक्ष्मण है प्यारे-प्यारे
बड़का कमाल है
कांधे पे बाएं
ऊंच-ऊंच भाल है
सिरवा पे मुकूट सोहे
सिंहा जैसी चाल है
दुल्हा के देख के
निहाल है
देखो न मोरी सखी
सियाजू के कैसन सुंदर भाग्य है
युवराजन के देख कर
राजा जनक निहाल हैं
जनकपुर में शहनाई बाजे
मंगल गीतन की बरसात है
दुल्हा के देखकर

जनकपुर निहाल है।



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