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टैगोर जयंती : काव्य, दर्शन, चित्रकला और संगीत जैसी कई विधाओं का संगम थे गुरुदेव रवींद्रनाथ

शुक्रवार,मई 6, 2022
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charlie chaplin कॉमेडी को अपनी खामोश अदाकारी से एक नई परिभाषा देने वाले चार्ली की अगली कई पीढि़यों ने नकल की लेकिन उन्हें जो सफलता मिली वह नकल करने वालों को नहीं। दुनिया को हंसाने वाले इस आवारा द ट्रैम्प को वर्ष 1975 में महारानी एलिजाबेथ सेकंड ने ...
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मराठी साहित्यकार 'विष्णु सखाराम खांडेकर को 1974 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1968 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
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11 मई 1912 में लुधियाना के समराला में जन्‍में सआदत हसन मंटो का 18 जनवरी 1955 में पाकिस्‍तान के लाहौर में निधन हो गया।
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भारतेंदु स्वयं लेखक, कवि, पत्रकार, संपादक, निबंधकार, नाटककार, व्यंग्यकार एवं कुशल वक्ता थे। उनकी इस प्रतिभा से रूबरू संपूर्ण युग पत्रकारिता का स्वर्णिम युग कहलाया। इस युग में नए प्रयोग, नए लेखन और नई शैली को भरपूर बढ़ावा मिला।
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ऑस्कर वाइल्ड 'कीरो' के समकालीन थे। एक बार भविष्यवक्ता कीरो किसी संभ्रांत महिला के यहां भोज पर आमंत्रित थे। काफी संख्या में प्रतिष्ठित लोग मौजूद थे। कीरो उपस्थित हों, और भविष्य न पूछा जाए, भला यह कैसे संभव होता। एक दिलचस्प अंदाज में भविष्य दर्शन का ...
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पंजाब के गुजरावांला में 31 अगस्त 1919 को करतार सिंह के घर अमृता का जन्म हुआ। पिता की वजह से घर में धार्मिक माहौल था। अमृता का पूजा-पाठ में मन नहीं लगता था। कम ही उम्र में माता की मृत्यु होने के बाद भगवान पर से अमृता का विश्वास उठ गया।
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रवीन्द्रनाथ ठाकुर कवि, दार्शनिक, चित्रकार जैसी कई कलाओं का संगम थे। टैगोर सिर्फ महान रचनाधर्मी ही नहीं थे, बल्कि वो पहले ऐसे इंसान थे जिन्होंने पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के मध्‍य सेतु बनने का कार्य किया था।
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आज चाचा चौधरी के जनक कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा की पुण्यतिथि है। घर-घर में चर्चित चाचा चौधरी, एक ऐसा किरदार था, जो बच्चों और बड़ों सभी में समान रूप से प्रिय था।
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मैथिलीशरण गुप्त का जन्म झांसी के समीप चिरगांव में 3 अगस्त, 1886 को हुआ। बचपन में स्कूल जाने में रूचि न होने के कारण इनके पिता सेठ रामचरण गुप्त ने इनकी शिक्षा का प्रबंध घर पर ही किया था
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31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती है। अपनी लेखनी के माध्यम से समाज सुधार का प्रचार करने और उसे आत्मसात करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की लेखनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। यहां उनकी जयंती के उपलक्ष्य में सुधी पाठकों के लिए प्रस्तुत है उनकी यादों ...
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कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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रबीन्द्रनाथ ठाकुर या रवींद्रनाथ टैगोर का जन्‍म 7 मई सन् 1861 को कोलकाता में हुआ था। रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक थे। र
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इसीलिये मैं श्रद्धेय विद्यानिवास मिश्र को कभी स्वर्गीय नहीं कहता,कम से कम मेरे लिए वे दिवंगत नहीं हुए। उनकी अक्षर काया अपूर्व है,यश काया अपरिमित और स्मृति काया अमर।
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प्रेमचंद ने 1934 में अजंता सिनेटोन नामक फिल्म कंपनी से समझौता करके फिल्म- संसार में प्रवेश किया। वे बम्बई पहुंचे और 'शेर दिल औरत' और 'मिल मजदूर' नामक दो कहानियां लिखीं। 'सेवा सदन' को भी पर्दे पर दिखाया गया। लेकिन प्रेमचंद मूलतः निष्कपट व्यक्ति थे।
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8 अक्टूबर यानी आज मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि है। प्रेमचंद का जन्म वाराणसी से लगभग चार मील दूर, लमही नाम के गांव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। उनका वास्तविक नाम ‘धनपत राय’ था।
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दिनकर के साहित्यिक जीवन की विशेषता यह थी कि शासकीय सेवा में रहकर राजनीति से संपृक्त रहते हुए भी वे निरंतर स्वच्छंद रूप से साहित्य सृजन करते रहे। उनकी साहित्य चेतना राजनीति से उसी प्रकार निर्लिप्त रही, जिस प्रकार कमल जल में रहकर भी जल से निर्लिप्त ...
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धन और संपत्ति चाहते हैं, साहित्य में उनके लिए स्थान नहीं है। केवल वे, जो यह विश्वास करते हैं कि सेवामय जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है
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रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक थे। रवींद्रनाथ टैगोर एशिया के प्रथम व्‍यक्ति थे, जिन्‍हें नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था।
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अपनी सुयोग्य लेखन क्षमता से करोड़ों पाठकों के दिलों पर राज करने वाले गुरुदेव का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। आठ वर्ष की नन्ही उम्र से उनकी लेखन यात्रा आरंभ हुई।
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दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएं लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई 10 हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा।
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मिर्ज़ा ग़ालिब उन बिरले कवियों में से हैं जिनको चाहे अभीष्ट प्रशंसा उनके जीवन में न मिली हो किंतु उनकी योग्यता और विद्वत्ता की धाक सभी पर जमी हुई थी।
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पं. माखनलाल चतुर्वेदी हिन्दी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर हम पूरे नहीं हो सकते। उनकी संपूर्ण जीवनयात्रा, आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ने वाले की यात्रा है।
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देश पर अपनी जान न्यौछावर कर देने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने अपनी मां की ममता से ज्यादा तवज्जो भारत मां के प्रति अपने प्रेम को दी थी।
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आमतौर पर भगतसिंह के बारे में यह एक निर्भ्रांत तथ्य है कि वे एक घोषित नास्तिक थे, फिर भला 'भाग्य' से उनका क्या वास्ता हो सकता है? मगर हो सकता है नहीं, बल्कि था।
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मिर्जा गालिब का जन्म 27 दिसंबर 1717 को काला महल, आगरा में हुआ था। उनकी कलम ने दिल की हर सतह को छुआ, किसी भी मोड़ पर कतराकर नहीं निकले।
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25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और मां कृष्णादेवी हैं। वाजपेयी का संसदीय अनुभव 5 दशकों से भी अधिक का विस्तार लिए हुए है। वे पहली बार 1957 में संसद सदस्य चुने गए थे।
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कबीर बीच बाजार और चौराहे के संत हैं। वे आम जनता से अपनी बात पूरे आवेग और प्रखरता के साथ किया करते हैं, इसलिए कबीर परमात्मा को देखकर बोलते हैं ...
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सहज, सौम्य और सरल जिनका मिजाज है, सबकुछ होते हुए भी फकीराना ठाठ, आजाद पंछी की तरह गगन को नापना, मजाक और मस्ती की दुनिया से कविता खोजने वाले, अल्हड़ और मनमौजीपन
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टैगोर दुनिया के संभवत: एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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18 जनवरी 2018 की ठंड भरी शाम...कोलकाता के बेलियाहाटा इलाके से हिंदी के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार कृष्णबिहारी मिश्र से मिलकर अपने होटल लौट रहा हूं। वहीं हिंदी लेखक, पत्रकार और वर्धा के हिंदी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे से मुलाकात हो गई ...
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आज सारा देश ही 'शिवपालगंज' है

मंगलवार,अक्टूबर 31, 2017
नई दिल्ली। हमारे देश में व्यंग्य में उपन्यास लिखने की समृद्ध परम्परा नहीं रही है लेकिन जो थोड़े से उपन्यास व्यंग्य उपन्यास लिखे गए हैं, उनमें से एक 'रागदरबारी' को ज्यादातर लोगों ने पढ़ रखा होगा।
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परसाई के बहाने

गुरुवार,अगस्त 24, 2017
हिन्दी साहित्य के मशहूर व्यंग्यकार और लेखक हरिशंकर परसाई से आज कौन परिचित नहीं है और जो परिचित नहीं हैं, उन्हें परिचित होने की जरूरत है।
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