लेखि‍का डॉ गरिमा दुबे की कहानी ‘पर छवि कहां समाय’ को सम्‍मान

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Last Updated: शनिवार, 26 दिसंबर 2020 (12:39 IST)
अखिल भारतीय डॉक्टर कुमुद् टिक्कू कहानी प्रतियोगिता 2019 में शहर की साहित्यकार डॉ गरिमा संजय दुबे की कहानी "पर छवि कहां समाय" को देशभर से प्राप्त 115 कहानियों में प्रथम पुरस्कार व सम्मान प्राप्त हुआ।
जिसके तहत सम्मान पत्र व 7000 रुपए की धनराशि प्रदान की जाती है। खास बात है कि निर्णय प्रक्रिया में कहानियों पर लेखक का नाम नहीं होता है। एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत यह प्रतियोगिता संपन्न होती है।

हर वर्ष जयपुर में एक भव्य समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। इस वर्ष भी यह कार्यक्रम 22 मार्च 2020 को जयपुर में आयोजित होना था, किंतु महामारी के कारण यह संभव नहीं हो सका। अंततः एक ऑनलाइन सम्मान समारोह में यह संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार व ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित चित्रा मुद्गल थीं।

उन्होंने पुरस्कृत रचनाकारों को बधाई व शुभकामना प्रेषित की। कहानी "पर छवि कहां समाय" पर चर्चा करते हुए मनीष वैद्य ने इसे कला, कलाकार व सामाजिक सरोकार के संबंध की कहानी बताया, साथ ही इसके दार्शनिक पक्ष पर भी प्रकाश डाला, वहीं निर्णायक व वरिष्ठ साहित्यकार सुदेश बत्रा ने इसे अपने ढंग की ऐसी अनोखी कहानी बताया जो आपके जेहन में अटक जाती है और बहुत बड़े सवाल उठाते हुए बैचैन कर देती है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष पवन सुराना ने की, विशिष्ट अतिथि अखिल शुक्ला थे व कार्यक्रम का संचालन निलिमा टिक्कू ने किया। इस कार्यक्रम में पूरे देश के कई विजेता साहित्यकार व समीक्षक शामिल हुए, इंदौर से ज्योति जैन,

डॉ दीपा मनीष व्यास, शिरीन भावसार, राज बोहरे, कोमल रामचंदानी आदि शामिल रहे।



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