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कौन हैं एनी एरनॉक्स जिन्‍हें मिलेगा 2022 का साहित्‍य का नोबेल पुरस्‍कार

गुरुवार,अक्टूबर 6, 2022
nobel prize
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30 सितंबर को हम अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस (translation day) मनाते हैं। अनुवाद इसीलिए भी जरूरी है ताकि देश-दुनिया को उन्नत बनाने के लिए सभी एकजुट हों ताकि समूचा संसार एक दूसरे की संस्कृतियों का अनुभव कर सके और एक दूसरे के जीवन को परिपूर्णता और ...
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प्राचीन भारत की गौरवमयी संस्कृति का पता इसके साहित्य से ही चलता है। प्राचीन काल में भी यहां के लोग सुसंस्कृत और शिक्षित थे, तभी उस समय वेद-पुराणों जैसे महान ग्रंथों की रचना हो सकी। महर्षि वाल्मीकि की रामायण और श्रीमद भागवत गीता भी इसकी बेहतरीन ...
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कई बार सोचा करता हूं क्या वे उनके विचारों को भी जला या बहा पाए? नहीं। उनके विचार आज भी दिल और दिमागों में आग लगाया करते हैं।
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हिलेरी के उपन्यास ‘वुल्फ हॉल’ (2009) और ‘ब्रिंग अप द बॉडीज’ (2012) ने बुकर पुरस्कार जीते थे। हिलेरी एक बार से अधिक बार बुकर पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला थीं। उनके उपन्यास ‘द मिरर एंड द लाइट’ (2020) को बुकर पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।
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पीएम मोदी पर लिखी गई इस किताब का इंदौर में विमोचन होने जा रहा है। इस किताब में पीएम मोदी की एक मुख्‍यमंत्री और एक प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी सफलता को दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि उनकी सफलता की कहानी को देश के नामचीन लोगों ने कलमबद्ध किया है।
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उनके 96वें जन्‍मदिन के मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर डॉ. भूपेन हजारिका को याद किया और उन्‍हें श्रद्धाजंलि दी है। भूपेन हज़ारिका गायन, संगीत और फिल्म निर्माण में एक मशहूर नाम थे। असम की लोकगायिकी को लोकप्रिय बनाने में उनका बडा योगदान रहा है।
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राही मासूम रज़ा का जन्म 1 सितंबर 1927 को ग़ाज़ीपुर में हुआ था। 11 साल की उम्र में उन्हें टीबी हो गई। बीमारी में आराम करने के दौरान उन्होंने घर में रखी सारी किताबें पढ़ डालीं। उनका दिल बहलाने और उन्हें कहानी सुनाने के लिए कल्लू काका को मुलाज़िम रखा ...
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सरल जी का कहना था कि मैं क्रान्तिकारियों पर इसलिए लिखता हूं जिससे आने वाली पीढ़ियों को कृतघ्न ना कहा जाए।‍ ‘जीवित-शहीद’ की उपाधि से अलंकृत श्रीकृष्ण ‘सरल’ सिर्फ नाम के ही सरल नहीं थे, सरलता उनका स्वभाव थी।
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पंजाब के गुजरावांला में 31 अगस्त 1919 को करतार सिंह के घर अमृता का जन्म हुआ। पिता की वजह से घर में धार्मिक माहौल था। अमृता का पूजा-पाठ में मन नहीं लगता था। कम ही उम्र में माता की मृत्यु होने के बाद भगवान पर से अमृता का विश्वास उठ गया।
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हिन्दी गजल हिन्दी साहित्य की एक नई विधा है। नई विधा इसलिए है, क्योंकि गजल मूलत फारसी की काव्य विधा है। फारसी से यह उर्दू में आई।
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फ़िराक़ गोरखपुरी के पुस्‍तैनी घर का नाम लक्ष्मीनिवास था और उनके पिता फ़ारसी के नामचीन शायर थे। फारसी शायर होने के साथ ही फ़िराक़ के पिता गोरख प्रसाद सहाय उर्फ इबरत गोरखपुर के जाने-माने वकील भी थे। तुर्कमानपुर स्थित उनके पुश्तैनी घर का नाम लक्ष्मी ...
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ज्योति जैन की कृति मां बेटी के मराठी अनुवाद आई लेक का विमोचन साहित्यकार मालती जोशी ने किया। book inauguration कहानी, अनुवाद, साहित्य सृजन और कविताओं को लेकर कई खूबसूरत बात पद्मश्री से सम्मानित सुविख्यात संवेदनशील कथाकार मालती जोशी ने कही।
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नई दिल्ली। श्रीलंका में लिट्टे की समस्या के दौरान श्रीश्री रविशंकर के मध्यस्थता के प्रयासों के दौरान हुए अनुभवों की अब तक की अनसुनी कहानियों को समेटे हुए 'द टाइगर्स पॉज़' (The Tiger’s Pause) का हिंदी संस्करण 'टूटा टाइगर', जिसके लेखक आर्ट ऑफ लिविंग के ...
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12 August World Sanskrit Day : प्राचीनकाल में पौष माह की पूर्णिमा से श्रावण माह की पूर्णिमा तक अध्ययन बन्द हो जाता था। श्रावण पूर्णिमा के बाद से पुन: अध्ययन प्रारंभ हो जाता था। इसीलिए प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाया जाता है। आओ ...
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प्रेम इसलिए भी बंधन वाला हो जाता है कि प्रेमियों का आग्रह होता है कि हमारे अतिरिक्त और प्रेम किसी से भी नहीं। लेकिन मित्रता का कोई आग्रह नहीं होता। एक आदमी के हजारों मित्र हो सकते हैं, लाखों मित्र हो सकते हैं, क्योंकि मित्रता बड़ी व्यापक, गहरी ...
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शासकीय नर्मदा महाविद्यालय नर्मदापुरम् में तुलसी जयंती के अवसर हिन्दी विभाग द्वारा 'तुलसी साहित्य: भक्ति, दर्शन और सामाजिकता' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित एवं सरस्वती पूजन से किया गया। डॉ. मिश्र ...
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आज भी देशभर के तमाम रेलवे स्‍टेशनों के बुक स्‍टॉल्‍स पर सबसे सबसे ज्‍यादा मुंशी प्रेमचंद की किताबें रखी नजर आ जाएगीं। हिंदी लेखन के लिए प्रसिद्ध हुए मुंशी जी के बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्‍होंने अपने लिखने की शुरुआत उर्दू से की थी।
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प्रेमचंद : उन्हें उपन्यास पढ़ने का ऐसी दिलचस्‍पी जागी कि किताबों की दुकान पर बैठकर ही उन्होंने सारे उपन्यास पढ़ लिए। 13 साल की उम्र में से ही प्रेमचन्द ने लिखना शुरू कर दिया था। शुरुआत में कुछ नाटक लिखे और बाद में उर्दू में उपन्यास लिखा।
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इस मौके पर मुख्‍य अतिथि के रूप में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय के उपमहानिदेशक (प्रशासनिक) गंगा कुमार, विशिष्‍ट अतिथि के रूप में प्रख्‍यात कवयित्री व रंगमंच कलाकार मालविका जोशी, शिक्षाविद् रमोला कुमार और पटना लिटरेचर फेस्टिवल की ...
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