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लघुकथा समकालीन समय की संवेदना के साथ बातचीत करती है - नरहरि पटेल

सोमवार,सितम्बर 27, 2021
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संस्था क्षितिज' द्वारा तृतीय अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन 2021 का आयोजन 26 सितंबर, 2021 रविवार को सुबह 10.00 बजे से श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति, शिवाजी सभागृह में किया जा रहा है।
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ईशमधु पूरी तरह से स्वस्थ्य थे। रात ही उनकी तबीयत अचानक खराब होने लगी। दो दिन पहले उन्होंने अलवर में प्रगतिशील लेखक संघ एवं जनवादी लेखक संघ के कार्यक्रम में शिरकत की थी। उनके साथ वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रकाश भी मंच पर थे। कार्यक्रम की तस्वीरें ...
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इसके अन्तर्गत साहित्य अकादमी द्वारा समूचे मप्र से प्रत्येक सत्र में कुल 40 रचनाकारों को चयनित किया जाता है, जिसमें अपना स्थान बनाने में अटल ने सफलता प्राप्त की है।
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लेकिन अपनी रूमानी तबीयत के लिए भी वे खासे मशहूर थे। आज यानि 17 सितंबर को उनका इंतकाल हो गया था। आइए जानते हैं उनके रूमानियत वाले मि‍जाज के बारे में एक बहुत चर्च‍ित किस्‍सा।
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कोई इन कवि जी को जानता है ? पूछना था कि किस शो में इनकी कविता पढ़ी थी ? उम्र के कारण याद नहीं रहता है। बादाम भी बकवास है। कुछ नहीं होता खाने से। जब से देखा है तब से सुना लगा रहा है न पढ़ा लग रहा है। कवि ही उस शो का लिंक दे सकते हैं।
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शिक्षाविद् डॉ. हेमलता दीखित( दिखित) की स्मृति में स्थापित साहित्य सम्मान शहर की उदियमान साहित्यकार सीमा व्यास को दिया गया। यह सम्मान श्रीमती आर्यमा सान्याल के सौजन्य से प्रतिवर्ष नवोदित साहित्यकार को प्रदान करना सुनिश्चित हुआ है।
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वामा साहित्य मंच इंदौर के साहित्य जगत की जानी मानी संस्था है.... मंच ने हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी को सम्मान देने के लिए नारे प्रतियोगिता का आयोजन किया। सभी वामा सदस्याओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेकर हिंदी के प्रति अपना प्रेम ज़ाहिर किया। कार्यक्रम की ...
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सौ साल पहले बनारस में जन्में इस महान सितार वादक की विरासत में गहन सांगितिक परिवेश शामिल था। उनके पिता एक संगीतज्ञ तथा दार्शनिक थे, जिन्होंने औपनिवेशिक काल में कोवेंट गार्डन लंदन में प्रस्तुति दी थी। बडे़ भाई उदय शंकर उस दौर के एक प्रतिष्ठित नर्तक ...
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अंग्रेजी, हिंदी, ब्रज और संस्कृत भाषा पर भी उनकी बहुत अच्‍छी पकड थी। हालांकि दक्षिण भारतीय भाषाओं, तमिल और तेलुगू का भी उन्हें अच्छा ज्ञान था। वे केवल 39 साल की उम्र में ही चल गए। लेकिन तब तक उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज सहित ...
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महादेवी वर्मा हिंदी के छायावादी कवियों की सूची में सबसे पहला और प्रतिष्ठित नाम हैं। हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार महत्वपूर्ण कवियों में महादेवी वर्मा का नाम भी आता हैं। वे कवियित्री के साथ ही एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थीं।
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महादेवी वर्मा हिंदी साहित्‍य की जानी मानी कवयित्री थीं। आज भी लेखन के जरिए उनका अस्तित्व कायम है। महादेवी वर्मा हिंदी के छायावादी कवियों की सूची में श्रेष्ठ नामों में से एक है। वह छायावादी युग के चार सबसे महत्वपूर्ण कवियों में गिनी जाती हैं।11 ...
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हरिशचंद्र किस वार पर कौन सा कागज व कौन सी काव्य प्रस्तुति दिया करते थे, आइए जानते हैं--
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उनको 2010 में 'उदयराज सिंह स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2018 का हिन्दी भाषा का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है। आइए जानते हैं उनके बारे में 15 ऐसी बातें जो उन्‍हें एक लेखक के तौर पर बनाती है बेहद खास।
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भारतेंदु हरिशचंद्र एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्‍यकार थे। वह बचपन से ही महान थे। उनका जन्‍म 9 सिंतबर 1850 ई में वाराणसी, यूपी में हुआ था। उनके पिता का नाम गोपालचंद्र था। एक साहित्‍य में उनका नाम गिरिधरदास लिखा गया था इसके बाद से वह इस नाम से प्रसिद्ध हो ...
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प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तमिल भाषा के वरिष्ठ रचनाकार पुन्नीलन और महासचिव प्रोफेसर सुखदेव सिंह सिरसा के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी बयान में कहा गया है कि अपने नेतृत्वकारी साथी और प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफ़ेसर अली ...
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रूस के 'भारत मित्र समाज' की ओर से प्रतिवर्ष हिन्दी के एक प्रसिद्ध लेखक-कवि को मास्को में हिन्दी साहित्य का यह महत्त्वपूर्ण सम्मान दिया जाता है। इस क्रम में समकालीन भारतीय लेखकों में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाले और कथा लेखन के प्रति विशेष रूप से ...
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भारत रत्‍न पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी की आज पहली पुण्‍यतिथि हैं। 31 अगस्‍त 2020 को वे पंचत्‍तव में विलीन हो गए थे। कोरोना काल के दौरान अस्‍वस्‍थ होने के बाद वह भी कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। देश में अपना प्रमुख योगदान देने के लिए आज भी उन्‍हें याद ...
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स्याही काली है वो कलमकारों से कहती है मैं तो काली होकर भी सच लिखने का साहस रखती हूं मगर तू ऐसा कुछ मत लिख देना जिससे तेरा मुंह काला हो जाए। उक्त प्रेरक विचार राष्ट्रकवि श्रद्धेय पंडित सत्यनारायणजी सत्तन ने राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा आयोजित जिला ...
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पंजाब के गुजरावांला में 31 अगस्त 1919 को करतार सिंह के घर अमृता का जन्म हुआ। पिता की वजह से घर में धार्मिक माहौल था। अमृता का पूजा-पाठ में मन नहीं लगता था। कम ही उम्र में माता की मृत्यु होने के बाद भगवान पर से अमृता का विश्वास उठ गया।
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