Haridwar Mahakumbh 2021 : अखाड़ों ने किया महाकुंभ के समापन का ऐलान, 27 अप्रैल को प्रतीकात्मक रूप से होगा शाही स्नान, लौटने लगे साधु-संत

हिमा अग्रवाल| Last Updated: रविवार, 18 अप्रैल 2021 (21:17 IST)
हरिद्वार। कोरोना को दृष्टिगत रखते हुए कुंभ मेले से संन्यासी अखाड़ों ने महाकुंभ का समापन कर दिया और अपने गंतव्य को रवाना हो गए। कोरोना से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की थी कि हरिद्वार में चल रहा महाकुंभ अब प्रतीकात्मक रूप से चलाया जाए। प्रधानमंत्री की अपील के बाद संन्यासी अखाड़ों द्वारा समापन किया जा रहा है।
धर्मनगरी हरिद्वार में कोरोना के बढ़ते प्रकोप पर नियत्रंण पाने के लिए आज निरंजनी आनंद जूना, अग्नि और किन्नर अखाड़े द्वारा अपने अपने देवी देवताओं का विसर्जन करते हुए कुंभ के समापन की घोषणा कर दी। संन्यासी अखाड़ों द्वारा अब महाकुंभ का अगला शाही स्नान 27 अप्रैल को प्रतीकात्मक रूप से मनाया जाएगा।
हरिद्वार 2021 महाकुंभ के समापन की घोषणा करने के बाद सभी संन्यासी अखाड़ों के साधु-संत सामान बांधकर रवाना होने शुरू हो गए हैं।

अग्नि अखाड़े के श्री महंत साधनानंद का कहना है कि कुंभ मेला सभी श्रद्धालुओं के अंतर्मन में रचा-बसा है। इस वर्ष कुंभ मेले का आयोजन बेहतर ढंग से किया गया, लेकिन कोरोना महामारी ने अपना तांडव दिखाना शुरू कर दिया, जिसके चलते निर्णय लिया गया कि जनहानि को रोकने के लिए संन्यासी अखाड़ों ने निर्णय लिया कि कुंभ समापन कर दिया जाए।


संन्यासी अखाड़ों द्वारा विचार करके निर्णय लिया गया कि आगामी 27 अप्रैल को होने वाले शाही स्नान के लिए बहुत कम संख्या में साधु-संत यहां पर रहे और प्रतीकात्मक रूप से कुंभ मेले को मनाए। इससे कुंभ परंपरा को का निर्वहन हो सकेगा और हमारे द्वारा अपने इष्ट गायत्री का पूजन-पाठ नित्य किया जाएगा, वहीं अखाड़ों की धर्मध्वजा कुंभ मेले तक स्थापित रहेगी और प्रतीकात्मक रूप से कुंभ को मनाया जाएगा।
कोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए भीड़भाड़ को रोकने के लिए कई अखाड़ों ने कुंभ के समापन की घोषणा कर दी है। कुंभ के समापन की घोषणा के बाद कई अखाड़ों से साधु-संत रवाना हो गए हैं और कुछ साधु रवाना होने की तैयारी कर रहे हैं। धर्मनगरी से अपने निवास स्थान कीई तरफ प्रस्थान करते हुए साधुओं ने मां गंगा से प्रार्थना करते हुए कहा कि ये कोरोना महामारी जल्दी खत्म हो, सभी सुखी और स्वस्थ रहे।



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