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कैसे प्रारंभ हुई शाही स्नान की परंपरा

मंगलवार,मार्च 9, 2021
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कुंभ मेला क्यों आयोजित होता है? इस संबंध में हमें तीन कथाएं मिलती हैं। पहली महर्षि दुर्वास की कथा, कद्रू-विनता की कथा और तीसरी समुद्र-मंथन की कथा। समुद्र मंथन की कथा तो सभी को मालूम ही है कि किस तरह देव और दैत्यों में अमृत कलश को छिनाछपती हुई और ...
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पौराणिक कथाओं अनुसार देवता और राक्षसों के सहयोग से समुद्र मंथन के पश्चात् अमृत कलश की प्राप्ति हुई। जिस पर अधिकार जमाने को लेकर देवताओं और असूरों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदे निकलकर पृथ्वी के चार स्थानों पर गिरी।
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नागा शब्द बहुत पुराना है। भारत में नागवंश और नागा जाति का इतिहास भी बहुत पुराना है। भारत में नागालैंड नाम का एक स्थान है। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में ही नागवंशी, नागा जाति और दसनामी संप्रदाय के लोग रहते आए हैं। भारत का एक संप्रदाय नाथ संप्रदाय ही ...
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509 ईसा पूर्व आदि शंकराचार्य ने कुल चार मठ और चार शंकराचार्यों की नियुक्ति की थी। इन चार मठों के अंतर्गत ही आदि शंकराचार्य ने दशनामी साधु संघ की स्थापना की थी। दशनामी संप्रदाय के नाम इस प्रकार हैं:- गिरी, पर्वत, सागर, पुरी, भारती, सरस्वती, वन, ...
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हरिद्वार में हर बार 12 साल बाद कुंभ मेला लगता है, लेकिन इस बार यह मेला 11 साल बाद ही इसीलिए आयोजित हो रहा है क्योंकि साल 2022 में बृहस्पति कुंभ राशि में नहीं रहेंगे, इस बार यानी 2021 में यह योग पड़ रहा है। इसी कारण निर्धारित अवधि से एक साल पहले ही यह ...
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हिंदू संन्यासी संप्रदाय के 13 अखाड़ों के बीच हर कुंभ में पहले शाही स्नान, कैंप स्थान और जुलूस को लेकर आपसी तनातनी और संघर्ष को देखते हुए इस संघर्ष से बचने के लिए ही 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का गठन किया गया। 1954 के कुंभ में मची भगदड़ के बाद ...
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हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन इन चार जगहों पर क्रमानुसार कुंभ मेले के आयोजन होता आया है। प्रत्येक जगह पर कुंभ में सबसे पहले शाही स्नान को लेकर संन्यासियों के अखाड़ों के बीच संघर्ष का इतिहास रहा है। कभी कभी तो यह संघर्ष खूनी संघर्ष में भी बदला ...
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उत्तररांचल प्रदेश में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। हरि याने भगवान विष्णु। हरिद्वार नगरी को भगवान श्रीहरि (बद्रीनाथ) का द्वार माना जाता है, जो गंगा के तट पर स्थित है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारतवर्ष के ...
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हरिद्वार और प्रयाग भारत के उत्तर प्रदेश में स्थित है तो नासिक महाराष्ट्र में। उज्जैन मध्‍य प्रदेश के मध्य में स्थित है जिसे प्राचीन काल में अवंतिका कहते थे। धार्मिक विश्‍वास के अनुसार कुम्भ में श्रद्धापूर्वक स्‍नान करने वाले लोगों के सभी पाप कट जाते ...
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