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गणगौर पर्व विशेष : गौरी माता की आरती, यहां पढ़ें

गुरुवार,अप्रैल 15, 2021
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वर्ष 2021 में गणगौर व्रत 15 अप्रैल को है। गणगौर लोकपर्व होने के साथ-साथ रंगबिरंगी संस्कृति का अनूठा उत्सव है। चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जानेवाला यह पर्व विशेष तौर पर केवल महिलाओं के लिए ही होता है।
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इस दिन भगवान शिव ने पार्वतीजी को तथा पार्वतीजी ने समस्त स्त्री-समाज को सौभाग्य का वरदान दिया था। इस दिन सुहागिनें दोपहर तक व्रत रखती हैं। महिलाओं नाच-गाकर, पूजा-पाठ कर हर्षोल्लास से यह त्योहार मनाती हैं।
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गणगौर त्योहार 18 दिन का त्योहार है जो चैत्र माह के पहले दिन से शुरू होता है। गणगौर पूजा भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है।
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एक बार भगवान शिव तथा माता पार्वती, नारदजी के साथ भ्रमण को निकले। चलते-चलते वे एक गाँव में पहुँच गए। उनके आगमन का समाचार सुनकर गांव की श्रेष्ठ कुलीन स्त्रियाँ उनके स्वागत के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाने लगी। भोजन बनाते-बनाते उन्हें काफी विलंब हो गया।
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गणगौर पर्व के दिनों में जहां भगवान शिव-पार्वती और गणगौर की आराधना की जाती हैं, वहीं गणगौर के गीत गाकर माता गौरी की प्रसन्न किया जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा समस्या पूजन
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गणगौर का पर्व महिलाएं पूरे साज-सज्जा के साथ इस मनाती है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। मां गौरी की पूजा कर पति की लंबी
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एक बार भगवान शंकर तथा पार्वतीजी नारदजी के साथ भ्रमण को निकले। चलते-चलते वे चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन एक गांव में पहुंच गए। उनके आगमन का समाचार सुनकर गांव की श्रेष्ठ कुलीन स्त्रियां उनके स्वागत के लिए
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गणगौर पर्व पर महिलाएं काफी खूबसूरत लगती है। लेकिन अक्सर परिवार और काम की दुनिया से खुद के लिए समय निकालना भूल जाती है। ऐसे में त्वचा एकदम बेजान हो जाती है
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गणगौर माता के दरबार में पल्लू के कोने को कलश के पानी में डुबो कर माता जी के मुख को छुआ उखाणे / उखाने बोले जाते हैं। आइए जानें आज के दौर के 21 उखाणे
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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर तीज मनाई जाती है। ये तिथि चैत्र मास की नवरात्र में आती है। इसे गौरी तृतीया भी कहते हैं। यह पर्व राजस्थान और मध्यप्रदेश में ही ज्यादा प्रचलित है। इस बार गणगौर तीज 15 अप्रैल को मनाई जाएगी।
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पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर तीज मनाई जाती है। ये तिथि चैत्र मास की नवरात्र में आती है। इसे गौरी तृतीया भी कहते हैं। यह पर्व राजस्थान और मध्यप्रदेश में ही ज्यादा प्रचलित है। इस बार गणगौर तीज 27 मार्च शुक्रवार को ...
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एक बार महादेव पार्वती वन में गए चलते-चलते गहरे वन में पहुंच गए तो पार्वती जी ने कहा-भगवान, मुझे प्यास लगी है। महादेव ने कहा, देवी देखो उस तरफ पक्षी उड़ रहे हैं। वहां जरूर पानी होगा। पार्वती जी वहां गई। वहां एक नदी बह रही थी। पार्वती ने पानी की ...
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पहले बधाई मेरे घर आई है। बधाई स्वरूप रनुबाई और धणियर राजा आए हैं। हे रनुबाई! तुम बड़े बाप की बेटी हो, सुंदर घेरदार कीमती चूंदड़ ओढ़ो। इस कीमती साड़ी से तुम्हारी शोभा सुंदरता का मैं कैसे बखान करूं। जिनके घर रनुबाई आ गई हैं, उन घरों में आनंद का सरोवर लहरा ...
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गणगौर माता के दरबार में हाजिरी देने के समय उखाणे / उखाने बोले जाते हैं। पूजा करने वाली महिलाएं एक-एक करके माता के सामने अपने पल्लू के कोने को कलश के पानी में डुबो कर माता जी के मुख को छुआती हुई इन उखाणे का उच्चारण करतीं हैं जिनमें उनके पति के नाम ...
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गौरी तृतीया, गणगौर उत्सव, सौभाग्य सुंदरी पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया, 27 मार्च 2020 के दिन मनाया जा रहा है।
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गणगौर गीतों को झालरिया गीत कहते हैं। झालरिया गीत गणगौर के विशेष गीत हैं। कुछ गीत हैं जिनमें कन्या अपने पिता से अनुरोध करती है कि पिता हमें अभी ससुराल मत भेजो, अभी तो हमारे बाग-बगीचों में खेलने के दिन हैं। दादाजी हमारे बाप के कुआं-बावड़ी हैं, हमारे ...
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समूचा निमाड़ नौ दिन तक जाति-पांति, ऊंच-नीच, गरीबी-अमीरी का भेद भूलकर, हर्षोल्लास, सद्भावना एवं सौहार्द के पवित्र वातावरण में डूबा रहता है। चैत्र मास, कृष्ण पक्ष की दसवीं से चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया
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चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को प्रातः स्नान करके गीले वस्त्रों में ही रहकर घर के ही किसी पवित्र स्थान पर लकड़ी की बनी टोकरी में जवारे बोना चाहिए।
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यह व्रत होली के दूसरे दिन से आरंभ होता है और गुड़ी पड़वा के अगले दिन इसका समापन होता है। इस वर्ष 27 मार्च को यह संपन्न होने जा रहा है।
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