इजहार का वेलेंटाइन

- महेन्द्र सांघी

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मेरे प्रेमी, मेरे प्रियतम

तुम्हारा प्यार मुझे स्वीकार,

पर मेरी कुछ शर्तें हैं

समझाऊंगी नहीं, दूसरी बार।

गया जमाना समझ लो मिस्टर

पत्नी करती थी, घर का सब काम,

अखबार और चाय लेकर पति जी

कुर्सी पर फरमाते थे आराम।

सुबह जल्दी उठकर तुम्हें

बेड टी बनाना होगा,

उसके बाद ही समझ लो जनाब

आकर मुझे जगाना होगा।

जब तक मैं नाश्ता बनाऊंगी

तुम्हें अखबार पढ़कर सुनाना होगा,

तौलिया ढूंढना होगा स्वयं ही

जूते खुद चमकाना होगा।

ऑफिस जाने के पूर्व मुझे

मेरे ऑफिस छोड़कर आना होगा,

शाम को यदि चाहिए, होगी चाय

तो थोड़ा मेरा सिर दबाना होगा।

डियर खिलाऊंगी डिनर बढ़िया

बस बर्तनों को तुम्हें ठिकाने लगाना होगा,

सारी शर्तें साफ हैं प्रीतम

पहले स्टाम्प पर लिखवाना होगा।

नए जमाने के साथ कदम मिलाकर

चलकर तुम्हें दिखाना होगा,

स्त्रियों का दर्जा पुरुषों के बराबर है

यह सिद्ध करके दिखाना होगा।

यदि तुम्हें मेरी ये सारी

शर्तें हैं निःसंकोच स्वीकार,

तो इस प्यारे वेलेंटाइन डे पर

मेरी ओर से तुम्हें ढेर-सा प्यार।




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