नरेश टिकैत बोले, संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन समाप्ति की करेगा घोषणा, किसान मना रहे हैं जश्न

हिमा अग्रवाल| Last Updated: शुक्रवार, 19 नवंबर 2021 (13:00 IST)
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गुरु पर्व पर देश की प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को तीन वापस लेने की घोषणा करते हुए चुनावी तोहफा दिया है। प्रधानमंत्री को आखिरकार 14 महीने बाद किसानों के दुख:-दर्द याद आया और उन्होंने कहा मैं आज देशवासियों से क्षमा मांगते हुए यह कहना चाहता हूं कि हमारी तपस्या में कोई कमी रह गई होगी जिसके चलते कुछ किसान भाइयों को समझा नहीं पाए। यह समय किसी पर दोषारोपण का नही है। आज पूरे देश को यह बताने आया हूं कि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। तीनों कृषि बिलों को वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया इस माह के अंत से शुरू कर देंगे।

वहीं प्रधानमंत्री ने गाजीपुर बॉर्डर और अन्य जगहों पर आंदोलन कर रहे किसानों को गुरु प्रकाश पर्व पर घर वापस जाने का विन्रम निवेदन किया है। पीएम ने यह भी कहा है कि किसानों की चुनौतियों और समस्याओं को मैंने काफी नजदीक से देखा है।

किसान कृषि बिल समाप्ति की घोषणा के बाद पूरे देश में जश्न का वातावरण है। किसान ढोल-नगाड़ों के साथ नाच रहे हैं और अपनी जीत पर खुशियां मना रहे हैं। लेकिन इसी बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता ने ट्वीट करते हुए कहा है कि 'आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे, जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार MSP के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे।'


राकेश टिकैत ने ट्वीट के बाद अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं कि वे अभी गाजीपुर बॉर्डर खाली नहीं करने वाले हैं। फिलहाल यहां धरना जारी रहेगा। गाजीपुर बॉर्डर पर अन्य जनपदों और राज्यों से आए किसानों का भी यही मानना है कि जब तक संसद से कानून रद्द नहीं होता है, तब तक यह किसान आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा। किसानों का कहना है कि उन्होंने जीत की पहली सीढ़ी चढ़ी है, मंजिल पा जाने तक धरना रहेगा।
मुजफ्फरनगर के सिसौली में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने तीन कृषि कानून वापसी पर प्रसन्नता जाहिर की है और प्रधानमंत्री के इस निर्णय का स्वागत भी किया है। उन्होंने कृषि कानून की समाप्ति को देशहित में बताते हुए कहा है कि हम प्रधानमंत्रीजी का दिल से आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने किसानों की समस्याओं और पीड़ा को समझा है। प्रधानमंत्रीजी से अपील है कि वे MSP पर कानून बनाने की जो गारंटी थी, उस पर भी बयान देकर रुख स्पष्ट करें। वहीं उन्होंने आज किसानों की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है।
वहीं भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में जो आंदोलन चल रहा है, वह संयुक्त किसान मोर्चा का है। यह आंदोलन कब तक चलेगा या समाप्त होगा, इसका अंतिम निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के साथ बातचीत पर ही होगा। लेकिन अब यह तय है कि किसानों की लंबे अरसे बाद जल्दी ही घर वापसी होगी।

शामली में गठवाला खाप के 11 गांवों के थाबेदार बाबा महिपाल सिंह मलिक का कहना है कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को बनाया और अब रद्द किया। इस कृषि कानून का विरोध पिछले 14 महीनों से दिल्ली की बॉर्डर पर चल रहा था। अब किसानों का आंदोलन भाजपा सरकार पर भारी पड़ गया है। अब तक सैकड़ों की संख्या में किसानों की मौत हुई है। कितने ही परिवार उजड़ गए, घर का रखवाला नहीं रहा। बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों की मौत का सरकार मुआवजा दे, उनके बच्चों को नौकरी दे। प्रधानमंत्री ने देरी से कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है, हम उसका स्वागत करते हैं।



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