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इंदौर का पहला फोटोग्राफर

शनिवार,जून 11, 2022
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मालवा भूमि हर दृष्टि से उर्वरा रही। इसने केवल फसल ही नहीं अपितु प्रत्येक क्षेत्र में अनेक विभूतियां, कलाकार, योगी, विद्वान प्रदान किए हैं। उनमें से एक विभूति थे श्री वेद विज्ञानाचार्य, जिन्होंने वेदों पर अनन्य परिश्रम कर वेदश्रमी नाम सार्थक किया।
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इतिहास में ऐसे बहुत सारे राजा, महाराजा व सरदार मिल जाएंगे, जो अपनी राजसी ठसक और शौकों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। इंदौर के होलकर राजघराने से जुड़े 'तात्या सरकार' को उनके इन्हीं शौकों के कारण याद किया जाता है। शराब, शबाब तथा राजसी सभी गुणों की वजह से लोग ...
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इक्कीसवीं सदी के महानगर इंदौर में व्यापार, वाणिज्य व उद्योग पर किसी एक जाति, संप्रदाय या वर्ग विशेष का अधिकार नहीं है। एक तरफ यदि यहां महानगर की 'मॉल संस्कृति' पनप रही है तो दूसरी ओर पारंपरिक खुदरा व्यापार भी जीवित है। सिंधी, पंजाबी, ठाकुर, मुस्लिम, ...
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होलकर शासन में देवी अहिल्याबाई के प्रशासन के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान से हम सभी परिचित हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि विपरीत परिस्थितियों में उन्हें अपने ससुर द्वारा बाकायदा प्रशिक्षित कर राजकाज सौंपा गया था। किंतु हम सब इस बात से शायद ही परिचित ...
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खासगी जागीर के प्रारंभ से राज्य के भारतीय संघ में विलय होने तक की लंबी अवधि (220 वर्ष) तक एक ही परिवार द्वारा दीवान के दायित्वों का निर्वाह करने वाला यह विशिष्ट परिवार था जिसका 'उपनाम' ही 'खासगीवाले' पड़ गया। इस परिवार को सुदीर्घ सेवाओं के बदले होलकर ...
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मालवा के उत्तरकालीन इतिहास में होलकर राजवंश का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस वंश के वीर पुरुषों ने जहां युद्धक्षेत्र में अपने शौर्य के कारण अपार ख्याति अर्जित की है, वहीं इस परिवार की महिलाओं ने स्थानीय प्रशासन, दान-पुण्य और सद्‌व्यवहार के कार्यों से ...
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मल्हारराव होलकर का जन्म होलगांव के पटेल खंडोजी के घर माता गंगाबाई के उदर से 16 मार्च गुरुवार 1693 में दोपहर 12 बजे हुआ था। इनकी जन्मतिथि के संबंध में भी विवाद है। कहीं-कहीं 16 अक्टूबर 1694 अंकित है। इनके पिता खंडोजी का मुख्य धंधा कृषि था।
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प्रशासनिक दृष्टि से इंदौर के निर्माण और क्रमश: उसके विकास में जिन लोगों की महती भूमिका रही है, उनमें स्व. सिरेमल बापना का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे होलकर स्टेट में 14 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे। नाबालिग शासन के सर्वेसर्वा रहे। वे एक कुशल प्रशासक ही ...
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इंदौर नगर के लिए पलशीकर परिवार का नाम नया नहीं है। इस परिवार के संस्थापक रामजी यादव थे। उल्लेखनीय है कि जब मालवा क्षेत्र में सूबेदार मल्हारराव होलकर को सत्ता सौंपी गई तभी पेशवा बालाजी बाजीराव द्वारा रामजी यादव को मल्हारराव होलकर का 'कारभारी' नियुक्त ...
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इंदौर के बुजुर्गों से विद्यार्थी जीवन में यह कहावत सुनी थी कि 'होलकर का राज व किबे का ब्याज' विख्यात रहे हैं। इंदौर का किबे परिवार, मूलत: पूना से स्थानांतरित होता हुआ इंदौर पहुंचा था। पूना में इस परिवार का प्रमुख व्यवसाय ब्याज पर पैसा देना ही था। ...
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प्रजामंडल से सत्ता तक

गुरुवार,मई 19, 2022
मैंने (बाबूलाल पाटोदी) सबसे पहले बाबूजी को तब देखा था, जब इंदौर में महात्मा गांधी आए थे, दूसरी बार 1935 में। गांधीजी हिन्दी साहित्य समिति में आए थे। बाबूजी उस समय काफी कार्यक्षम थे, मेरी उम्र भी 15 वर्ष की ही थी। मैं जैन समाज के स्वयंसेवक मंडलों में ...
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