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देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की कैसे करें उपासना, किन मंत्रों का करें जाप

मंगलवार,जुलाई 5, 2022
Devshayani Ekadashi
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Devshayani Ekadashi 2022 : आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को आषाढ़ी एकादशी कहते हैं। इसे देवशयनी एकादशी, हरिशयनी और पद्मनाभा एकादशी आदि नाम से भी जाना जाता है। अंग्रेजी माह के अनुसार इस साल देवशयनी एकादशी 10 जुलाई 2022 को आ रही है। कहते हैं कि ...
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इस बार हरिशयनी (देवशयनी) एकादशी 10 जुलाई 2022, दिन रविवार को मनाई जा रही है। धार्मिक महत्व के अनसार देवशयनी एकादशी के साथ ही 4 महीने के लिए भगवान श्री विष्णु शयनगार में चले जाते हैं
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हरिशयनी एकादशी यानी देवशयनी एकादशी 10 जुलाई 2022 को है। आइए जानते हैं 5 विशेष काम, जिनसे मिलेंगे 5 बड़े लाभ....
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देवशयनी एकादशी, विष्णु-शयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। जानते हैं आषाढ़ शुक्ल हरिशयनी देवशयनी का 12 राशियों के लिए क्या वरदान है...devshayani ekadashi 2022 rashifal
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आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन से चार महीने के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। इस चार महीनों में मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान ...
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Devshayani ekadashi 2022: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन से चार माह के लिए श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में सो जाते हैं। इसीलिए इसे हरिशयनी और पद्मनाभ एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी के व्रत को विधवत रूप ...
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10 जुलाई 2022 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव सो जाएंगे इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। श्रीहरि विष्णु 4 माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान योग निद्रा से उठते हैं। आओ जानते हैं इस ...
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Devshayani Ekadashi 2022 : आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव सो जाते हैं। इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। यानी श्रीहरि विष्णु 6 माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इन चार माहों को चातुर्मास कहते हैं। आओ जानते हैं कि इस दिन क्या खास कार्य करने ...
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Yogini Ekadashi festival Information हर साल आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि को 'योगिनी एकादशी' व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत आज 24 जून को रखा जा रहा है। इस दिन भगवान श्री विष्णु की पूजा कुछ नियमों का पालन करते हुए की जाती है। यह एकदशी पापों को नष्ट करने ...
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Yogini Ekadashi Vrat 2022 हिन्दू धर्म में योगिनी एकादशी व्रत सभी प्रकार के पापों का नाश कर मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। इस एकादशी के प्रभाव से सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। वर्ष 2022 में योगिनी एकादशी शुक्रवार, 24 जून को मनाई जा रही है। आषाढ़ ...
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वर्ष 2022 में योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi festival 2022) 24 जून, दिन शुक्रवार को पड़ रही है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी व्रत किया जाता है।
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Yogini Ekadashi 2022: 24 जून 2022 शुक्रवार को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि यानी योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन शुभ योग में मां लक्ष्मी की पूजा होगी और शुक्र ग्रह की पूजा भी की जाएगी। आओ जानते हैं इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
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Yogini Ekadashi 2022: प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष 24 जून 2022 शुक्रवार को यह व्रत रखा जाएगा। आओ जानते हैं इस दिन के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और ...
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माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं। आषाढ़ माह में योगिनी और देवशयनी ...
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Nirjala ekadashi ke din kya nahin karna chahie: प्रतिवर्ष ज्येष्‍ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 10 जून 2022 को रखा जाएगा। इस एकादशी का व्रत रखने से सभी एकादशियों ...
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Nirjala Ekadashi Ki Puja and Upay: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। 12 एकादशियों में से एक इस एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशियों का फल मिलता है। इस व्रत का महत्व महर्षि ...
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यह व्रत निर्जल रखा जाता है यानि व्रती को बिना पानी का सेवन किए रहना होता है। ज्येष्ठ माह में बिना पानी के रहना बहुत बड़ी बात होती है। इस कारण यह व्रत काफी कठिन माना जाता है। यह व्रत एकादशी तिथि के दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के दिन व्रत पारण ...
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यह व्रत हमें जल संरक्षण का संदेश देता है। इस दिन जल को ग्रहण नहीं किया जाता है, प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश है कि जल को बचाया जाए, ग्रहण तब ही करें जब संग्रहण और संरक्षण कर सकते हैं। हमारी संस्कृति में जल को वरूण देवता माना गया है।
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इस व्रत को करने से समस्त वर्ष पर्यन्त एकादशी के व्रत का फल प्राप्त होता है। यदि इस दिन कामधेनु अनुष्ठान किया जाए तो यह सैकड़ों अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायक होती है। कामधेनु गाय का हमारे सनातन में धर्म में बहुत अधिक महत्त्व होता है।
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