क्रिसमस स्पेशल : क्या आप जानते हैं कि ईसा मसीह का असली जन्म नाम क्या है?

अनिरुद्ध जोशी| पुनः संशोधित बुधवार, 22 दिसंबर 2021 (16:53 IST)
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Birth of Christ : ईसा मसीह को या यीशु कहते हैं। परंतु क्या आप जानते हैं कि उनका असली जन्म नाम क्या था? उनका जन्म किस सन् में हुआ था और कहां है उनकी कब्र? आओ जानते हैं इस संबंध में दिलचस्प बातें।

ईसा मसीह का असली जन्म नाम ( Real birth name of ): ईसा मसीह को इब्रानी में येशु, यीशु या येशुआ कहते थे परंतु अंग्रेजी उच्चारण में यह हो गया। यही जेशुआ बिगड़कर जीसस हो गया। उन्हें का येशु कहते थे। उनका असली नाम येशु था।
समय ( Birth time of jesus christ ) : परंपरा से ईसा मसीह का जन्म समय 25 दिसंबर सन् 6 ईसा पूर्व का माना जाता है, परंतु शोधकर्मा मानते हैं कि उनका वसंत के समय अर्थात मार्च की किसी तारीख को हुआ था। हालांकि बाइबल में ईसा के जन्म का कोई दिन नहीं बताया गया है। न्यू कैथोलिक इनसाइक्लोपीडिया और इनसाइक्लोपीडिया ऑफ अरली क्रिश्चियानिटी में भी इसका कोई जिक्र नहीं मिलता है। बाइबल में के जन्म की कोई निश्‍चित तारीख नहीं दी गयी है।
ईसा मसीह का जन्म स्थान ( Birth place of jesus christ ): ईसा मसीह का जन्म बेथलेहम में हुआ था। यह वर्तमान में क्षेत्र में है। मदर मरियम और योसेफ अपना नाम लिखवाने नाजरथ से येरुशलम जा रहे थे तभी रास्ते में बेथलेहम में कहीं भी जगह न मिलने पर वे एक गुफा में रुक गए जो शहर से बाहर एकांत में थी। वहीं पर यीशु का जन्म हुआ। कुछ लोगों के अनुसार यह एक अस्तबल था और कुछ के अनुसार गोशाला। 'मैथ्यू एक्ट' के अनुसार ईसा का जन्म तो में हुआ था परंतु वहां के राजा हिरोड ने बेथलहेम में दो साल से कम उम्र के सभी बच्चों को मारने का आदेश दे दिया दिया था, यह जानकर ईसा मसीह का परिवार वहां से मिस्र चला गया था। फिर वहां से कुछ समय बाद वे नजारथ में बस गए थे। 'गॉस्पेल ऑफ मार्क' और 'गॉस्पेल ऑफ जॉन' ने इनके जन्म स्थान का जिक्र नहीं किया है, लेकिन उनका संबंध नाजरथ से बताया है।
ईसा मसीह की कब्र ( Tomb of jesus christ ) : ईसाइयों के लिए भी यह नामक शहर बहुत महत्व रखता है, क्योंकि यह शहर ईसा मसीह के जीवन के अंतिम भाग का गवाह है। यहां चार घटनाएं घटी पहली यह कि उन्होंने यूहन्ना से दीक्षा ली, दूसरी यह कि वे गधे पर चढ़कर यहां पहुंचे, तीसरी यह कि यहां उन्हें सूली पर चढ़ाया, चौथी यह कि उन्हें मृत मानकर सूली पर से उतारकर उन्हें यहां कि एक गुफा में रखकर उसके उपर से एक बड़ा पत्थर लगा दिया था, पांचवीं यह कि वे इसी शहर के एक स्थान पर सूली पर से उतारे जाने के बाद जिंदा देखे गए और छठी यह कि उन्हें जहां जिंदा देखा गया था वहीं उन्हें दफना दिया गया।
यरुशलम के प्राचीन शहर की दीवारों से सटा एक प्राचीन पवित्र चर्च है जिसके बारे में मान्यता है कि यहीं पर प्रभु यीशु पुन: जी उठे थे। जिस जगह पर ईसा मसीह फिर से जिंदा होकर देखा गए थे उसी जगह पर यह चर्च बना है। इस चर्च का नाम है- चर्च ऑफ द होली स्कल्प्चर। कहा जाता है कि इस चर्च में वो चट्टान है जिस पर 33वीं में ईसा मसीह को दफनाने के लिए रखा गया था। माना यह भी जाता है कि यही वह स्थान है जहां ईसा ने अंतिम भोज किया था। यहां पर पत्थर के तीन स्लेब्स है। एक वह जहां पर पहले दफनाया गया दूसरा वह जहां पर जीवित पाए गए और तीसरा वह जहां उन्हें पुन: दफनाया गया था। दरअसल, ईसा मसीह को सुली पर से उतारने के बाद एक गुफा में रख दिया गया था। उस गुफा के आगे एक पत्थर लगा दिया गया था। वह गुफा और पत्थर आज भी मौजूद है। चर्च ऑफ द होली स्कल्प्चर उस गुफा से अलग है।
कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि 13 से 29 वर्ष की उम्र और उसके बाद 33 से 112 वर्ष की उम्र तक ईसा मसीह भारत में रहे थे। माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने भारतीय राज्य कश्मीर में बौद्ध और नाथ संप्रदाय के मठों में रहकर ध्यान साधना की थी। मान्यता है कि यहीं कश्मीर के श्रीनगर शहर के एक पुराने इलाके खानयार की एक तंग गली में 'रौजाबल' नामक पत्थर की एक इमारत में एक कब्र बनी है जहां उनका शव रखा हुआ है।



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