संतूर मेरी जिंदगी में और मैं संतूर की दुनिया में हूं : Rahul Sharma

रूना आशीष| Last Updated: सोमवार, 24 मई 2021 (15:06 IST)
शास्त्रीय संगीत की दुनिया और फिल्म संगीत की दुनिया में बहुत अंतर होता है। दोनों में अपनी अपनी अलग ही दुनिया होती है तो ऐसे में जब कुणाल कोहली ने मुझे कहा कि रामायुग जो मैं बना रहा हूं, उसमें मुझे संगीत आपका चाहिए है और फिर मुझे कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से शास्त्रीय संगीत। आपका बेस रहा है। और मुझे वही आधार अपने रामायण के संगीत में में भी चाहिए है।

साथ ही उन्हें यह भी अच्छा लगा कि मैं कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ संपर्क में रहता हूं और उनके साथ साथ मिलकर काम करता हूं तो उन्हें यह मिश्रण चाहिए था रामयुग के संगीत के लिए। तो जब उन्होंने मुझसे पूछा, मुझे लगा कि यह बहुत नई नवेली और अच्छी बात होगी। यह कहना है राहुल शर्मा का जो संतूर की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम है संतूर जैसे वाद्य को बजाने वाले यह उनकी घर की वह तीसरी पीढ़ी है जो इस वाद्य को दुनिया में मशहूर करने के लिए काम कर रहे हैं।

राहुल शर्मा वेबदुनिया को बताते हैं कि ये मेरे लिए यह एक बहुत अच्छा प्रोजेक्ट इसलिए भी है क्योंकि एक तो मुझे शास्त्रीय संगीत का प्रयोग करना मिलेगा और साथ ही साथ मेरे पास यह आजादी थी कि मैं जो चाहूं वह बना सकता। मैं इस संगीत में कई लोगों को पिरोकर लाया हूं। चाहे वह मेरे पिताजी पंडित शिवकुमार शर्मा हो या हरिप्रसाद चौरसिया जी हो या उस्ताद राशिद खान साहब और फिर जाकिर हुसैन साहब ऐसे में बाद में बच्चन साहब इसी कड़ी से जुड़ गए।

इस प्रोजेक्ट में अमिताभ बच्चन साहब का जुड़ना कैसे हुआ?
मेरी उनसे बहुत पहले से ही बातचीत चलती रही है। दरअसल बच्चन साहब, मुझे पहले से ही सुनते आए हैं। मेरे रिकॉर्ड रात में बैठकर सुनते हैं। खासतौर पर से रिचर्ड क्लैडरमैन वाला। फिर जब भी हनुमान जी के मंत्र इसकी बातें ही मैंने अपनी आवाज रिकॉर्ड करके उन्हें यूं ही भेज दिया उन्होंने कहा कि ऐसा कीजिए एक पिच कम करके कीजिए।

यह मेरी आवाज के लिए थोड़ा हाय पिच है। मुझे समझ में आ गया कि उन्हें करने की इच्छा तो बहुत है तो ठीक है। मैंने भी उनके हिसाब से म्यूजिक सेट करके उनको भेज दिया। रात भर हम लोग आपस में बातचीत करते रहे और सुबह 5 बजे मुझे उन्होंने गाना भेज दिया। मेरे लिए इसलिए यह थोड़ी अनूठी बात थी कि मुझे लगा वह गाने का एक दो लाइन है। वह गा के रिकॉर्ड कर देंगे और बोल देंगे कि आप बाकी का किसी और से करा लो।

लेकिन मेरी सोच के विपरीत उन्होंने पूरा गाना रिकॉर्ड करके भेजा। कोरस में जो दो-तीन लाइन थी, वो भी कर दी और साथ ही साथ उन्हें जो लग रहा था कि और भी चीजें एड की जा सकते हैं और भी चीज जोड़ी जा सकती है वह रिकॉर्ड करके भेज दी। उन्होंने अपने घर पर ही रिकॉर्ड की थी। मुझे कहा कि अगर आपको ठीक लगता है तो बताइए।

इसमें इसमें उस्ताद जाकिर हुसैन भी तो है।
जी हां, जैसे अमिताभ बच्चन जी का तय हुआ उसके बाद लगा कि इसमें जो रिदम वाला भाग है, इसके लिए क्यों न जाकिर भाई को बात की है। जाकिर भाई को मैं बचपन से जानता हूं। वह शायद 15 साल के रहे होंगे मेरे पिताजी पंडित शिवकुमार शर्मा के साथ वह बजाया करते थे और मैं तो बहुत ही छोटा था तो मैं उन्हें देखा करता था।

मैं तो बचपन से उन्हें देखता आया हूं। फिर जब मेरा समय आया, मैंने संतूर वादन शुरू किया तो जाकिर भाई मेरे साथ भी हो लिए हम दोनों ने मिलकर 2017 में अमेरिका के 15 शहरों में कॉंसर्ट किए। हालांकि कॉन्सर्ट करना और साथ में संगत देकर तबला बजाना वह बात अलग होती है और यह एक फिल्म है। इस फिल्म के लिए मैं उन्हें किसी सीमा में नहीं बांधना चाहता था जो वह आए और उन्होंने गाना सुना।

स्टूडियो में कुछ 30 या 40 मिनट में जहां-जहां म्यूजिक पीस डालना है उन्होंने वह पीस रिकॉर्ड किया। उसके बाद तो 40 मिनट के बाद तो हमारी हंसी मजाक और बातचीत सब शुरू हो गया। वैसे भी जिस आला दर्जे के कलाकार हैं जब वह ऐसे इसे प्रोजेक्ट में मेरे साथ जुड़ेंगे तो आप सोच सकते हैं कि उस प्रोजेक्ट की खूबसूरती किस स्तर पर पहुंच चुकी होगी।

इस महामारी के बीच में संगीत ने आपको कितनी मदद की?
संगीत आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा देता है। आपके जीवन में उत्साह भरता है और एक सुकून देता है तो जब यह प्रोजेक्ट में कर रहा हूं तो मैं अपने आप को बहुत संतुलित बना पा रहा था। क्योंकि अब पिछले कुछ समय से खबरें देखिए देख देख कर मन दुखी होता है कि लोग कैसे कैसी हालत में जीवन जी रहे हैं या कैसे मौत हो रही है? और फिर आप बच्चन साहब की आवाज में सुनते हैं। हनुमान मंत्र होता है हालांकि पूरा गाना है वह हो पूरी हनुमान चालीसा तो नहीं है लेकिन जितना भी आप सुनते हैं, आपको बहुत सुकून मिलता है तो मैं अपने आप को बहुत ज्यादा भाग्यशाली मानता हूं जो मुझे संगीत का साथ इस समय में भी मिलता रहा।

संतूर को शत् तंत्री वीणा भी कहा जाता है। लेकिन ऐसा क्यों हो जाता है कि यह संतूर का पर्याय शिवकुमार शर्मा का परिवार ही कहलाता है क्या कोई और संतूर के जगत में बड़ा नाम नहीं हुआ है।
जहां इसे संस्कृत में शत् तंत्री वीणा कहा जाता है यानी कि 100 तारों वाली वीणा यह जम्मू कश्मीर का एक वाक्य है जो सूफी संगीत में साथ में बजाया जाने वाला वाक्य है मेरे परिवार मैं संतूर की दुनिया में बहुत काम किया है। लेकिन साथ में बजाए जाने वाले इस वाद्य को मेरे पिता ने शास्त्रीय संगीत की दुनिया में लाया। इस पर राग रागिनी या बजाई जो कि लोग सोच भी नहीं सकते थे।

इसी संतूर को जम्मू कश्मीर से निकालकर मुंबई लाया और फिल्म संगीत की दुनिया से जुड़ा और फिर मैं आया मैंने थोड़े बहुत जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेरे कोलैबोरेशन हुए है वहां पर संतूर बजाया। शायद इसी वजह से ऐसा हो गया कि संतूर का नाम हमारे परिवार से जुड़ गया। हालांकि ऐसा मैं नहीं मानता और भी कई लोग हैं जो संतूर बजाते हो, बहुत अच्छा बजाते हैं। लेकिन इतना ही कह सकता हूं। शायद मेरे पिछले जन्म के कोई पुण्य रहे होंगे तभी संतूर मेरी जिंदगी में और मैं संतूर की दुनिया में हूं।

आपके लिए संतूर क्या है?
संतूर मेरे लिए बहते हुए पानी की कलकल है। मेरे लिए संतूर पहाड़ों में खूबसूरती में बसी हुई आवाज़ है। बचपन में मैं जब भी कश्मीर जाता था तो वहां की खूबसूरती और संतूर मुझे हमेशा जुड़े हुए लगते थे। संतूर मेरे लिए योग है। आप अभ्यास करते हैं और फिर एक ऐसे स्तर पर पहुंच जाते हैं। जहां यह आपके लिए योग मंत्र हो जाता है और फिर आप इसी मंत्र के जरिए अपने आगे की जिंदगी जीते जाते हैं संतूर मेरे लिए मेडिटेशन भी है। मैं रोज संतूर के साथ हूं तो संतूर लोगों तक मेरे अपने दिल के भाव पहुंचाने के लिए एक भाषा का भी काम करता है।

आपके घर में आप है पिताजी भी संतूर वादक हैं तो आप लोग बातें करते हैं यह संतूर के जरिए एक दूसरे से वार्तालाप करते हैं।
(हंसते हुए) नहीं - नहीं हम आम लोगों जैसे बातें भी करते हैं और सिर्फ संतूर की बात नहीं करते हैं। अभी हाल फिलहाल तो इसलिए दुखी हो गए थे क्योंकि आईपीएल को कैंसिल कर दिया गया है। हम हमारे घर में सभी लोग क्रिकेट को बहुत पसंद करते हैं तो सारा काम धाम खत्म करते थे और शाम को आईपीएल के लिए बैठ जाया करते थे। लेकिन अब वो नहीं होने वाला है तो हम बहुत दुखी हैं।

वैसे आपको एक मजेदार बात बताता हूं। मेरा बेटा अभिनव जो कि अभी 7 साल का है। वह भी धीरे-धीरे संतूर की तरफ बढ़ रहा है। वह भी संतूर बजाना सीख रहा है। मैं अपने बचपन की बात कहूं तो मैंने सब तरीके का संगीत सुना शास्त्रीय संगीत सुना तो अंतरराष्ट्रीय स्तर का संगीत भी सुना। इन दोनों तरीके के संगीत ने मुझे अपने जीवन में बहुत मदद की है। अब संगीत जैसी बात अपने बेटे पर थोप नहीं सकता। बच्चा खुद ब खुद चलकर आए और संगीत को चुन ले तो बात अलग है तो अब देखते हैं आगे आने वाले दिनों में वह किस तरीके से संतूर को आगे बढ़ाता है या कोई और संगीत चुनता है।

आपके पिताजी पंडित शिवकुमार शर्मा और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया क्या इन्हें कभी आने वाले दिनों में सुनना मिलेगा?
बिल्कुल एक और गाना है जिसे सोनू निगम ने गाया है और उसमें इन दोनों को आप सुन सकेंगे। पिताजी ने संतूर वादन किया है और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जी ने बांसुरी बजाई है और वह भी बहुत बेहतरीन गाना बना है। एक और गाना है जो उस्ताद राशिद खान साहब ने गाया है और रावण की जो थीम है वह उसमें मेरी अपनी आवाज है।




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