एलन मस्क के ख़िलाफ़ ट्विटर ने निकाला अपना आख़िरी हथियार- पॉइज़न पिल

BBC Hindi| पुनः संशोधित शनिवार, 16 अप्रैल 2022 (15:18 IST)
स्पेस-एक्स के संस्थापक और टेस्ला के सीईओ की नज़र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर टिक गई है। मस्क ट्विटर को खरीदने की खुलकर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ट्विटर का बोर्ड उन्हें रोकने के लिए अपने अंतिम विकल्प तक आ गया है।
कंपनी के बोर्ड ने एलन मस्क के जबरन अधिग्रहण (हॉस्टाइल टेकओवर) की कोशिशों से कंपनी को बचाने के लिए 'पॉइज़न पिल' का तरीक़ा अपनाया है।

'पॉइज़न पिल' किसी कंपनी को जबरन अधिग्रहण से बचाने का एक तरीक़ा है। यह एक सीमित अवधि की शेयरधारक अधिकार योजना है जो किसी को कंपनी में 15 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी खरीदने से रोकती है।

इसमें कंपनी कुछ छूट के साथ दूसरों को कंपनी के अतिरिक्त शेयर खरीदने की अनुमति दे देती है। इससे अधिग्रहण करने की कोशिश करनेवाले के शेयरों की क़ीमत कम हो जाती है और अधिग्रहण मुश्किल हो जाता है। साथ ही कंपनी का अधिग्रहण करने की कीमत बढ़ जाती है।
ट्विटर बोर्ड ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग को अपनी इस बचाव योजना के बारे में विस्तार से बता दिया है। एक बयान में कंपनी ने कहा है कि एलन मस्क के "ट्विटर के अधिग्रहण के अवांछित, गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव" के कारण इसकी ज़रूरत पड़ी।

किसी कंपनी के टेकओवर को जबरन तब माना जाता है जब कंपनी को उसके प्रबंधन की मर्ज़ी के बिना अधिग्रहित करने की कोशिश की जाए। ट्विटर के मामले में एक्ज़िटिव बोर्ड उसके प्रबंधन की भूमिका में है।
प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग के पूर्व वित्तीय अर्थशास्त्री जोश व्हाइट ने बीबीसी को बताया कि 'पॉइज़न पिल' किसी कंपनी को "जबरन अधिग्रहण से बचाने के लिए बचाव की आख़िरी कोशिश होती है। इसे परमाणु विकल्प की तरह देखा जाता है।"

जोश व्हाइट कहते हैं कि कंपनी के बोर्ड ने ये साफ़ कर दिया है कि "उन्हें नहीं लगता कि कंपनी के लिए इतना मूल्य काफ़ी नहीं है।"

एलन मस्क ने पहले ही ये स्पष्ट कर दिया है कि वो कंपनी के लिए इससे ऊंची क़ीमत पर बात नहीं करेंगे। इसके बाद बोर्ड ने 'पॉइज़न पिल' का तरीक़ा अपना लिया है।
हिस्सेदारी खरीदने से लेकर अधिग्रहण की कोशिश तक
एलन मस्क ने ट्विटर को लेकर पहला क़दम सोशल मीडिया पर एक वोटिंग करवाकर बढ़ाया था। उन्होंने ट्विटर पर लोगों से पूछा कि क्या वो इसमें एडिट बटन चाहते हैं?

वहीं, पिछले हफ़्ते एलन मस्क ने ट्विटर के सात करोड़ 35 लाख शेयर यानी 9।2 प्रतिशत की हिस्सेदारी ख़रीदने की जानकारी दी थी। इससे ट्विटर के शेयर में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई थी।
इसका मतलब ये है कि मस्क की संपत्ति भी बढ़ गई है और उनके पास ट्विटर के जो शेयर हैं उनकी क़ीमत अब 3 अरब डॉलर के बराबर पहुंच गई है।

मस्क के पास जितने शेयर हैं वो ट्विटर के संस्थापक जैक डोर्सी के शेयरों से चार गुना ज़्यादा है। डोर्सी ने पिछले साल नवंबर में ट्विटर का सीईओ पद छोड़ दिया था जिसके बाद ये ज़िम्मेदारी अब पराग अग्रवाल संभाल रहे हैं।

एलन मस्क के हिस्सेदारी खरीदने के बाद से ट्विटर और मस्क के बीच खींचतान चल रही है। ट्विटर ने एलन मस्क के बोर्ड में शामिल होने को लेकर भी संकेत दिए थे जिसकी एलन मस्क ने सार्वजनिक तौर पर पुष्टि नहीं की थी।
ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल ने मंगलवार को एक ट्वीट में कह दिया था, "हाल के हफ़्तों में एलन से जो बातें हुईं, उनसे हमें साफ़ पता चल गया कि वो हमारे बोर्ड का मान बढ़ाएंगे।"

मस्क ने बाद में जवाब में लिखा, "मैं आने वाले महीनों में ट्विटर में बड़े सुधार करने के लिए पराग और ट्विटर के साथ काम करने को लेकर आशान्वित हूँ।" हालांकि, मस्क ने बोर्ड में शामिल होने के बात स्वीकार नहीं की थी।
सऊदी प्रिंस से बहस
अब एलन मस्क साफ़ तौर पर कंपनी का अधिग्रहण करने का इरादा ज़ाहिर कर चुके हैं। इसके लिए ट्विटर के एक बड़े शेयर होल्डर सऊदी प्रिंस अलवलीद बिन तलाल से ट्विटर पर उनकी बहसबाजी भी हो गई है।

एलन मस्क ने गुरुवार को प्रिंस अलवलीद को एक बड़ा प्रस्ताव दिया था। उन्होंने सऊदी प्रिंस को ट्विटर खरीदने का प्रस्ताव दिया था जिसके लिए उन्होंने 41।39 अरब डॉलर (3।2 लाख करोड़ रुपये) नगद चुकाने की पेशकश की थी।
लेकिन, प्रिंस अलवलीद ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए ट्वीट किया, "मुझे नहीं लगता है कि एलन मस्क की ओर से दिया ऑफ़र ट्विटर (54।20 डॉलर) की विकास की संभावनाओं को देखते हुए इसके आंतरिक मूल्य के आसपास भी है। ट्विटर के लंबे समय से और सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक होने के नाते मैं और किंगडम होल्डिंग कंपनी इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं।"

अपने ऑफ़र में एलन मस्क ने कंपनी के एक शेयर का क़ीमत 54।20 डॉलर लगाई थी जिससे ट्विटर की कुल क़ीमत 43 अरब डॉलर बनती है। उनका कहना था कि इस सोशल मीडिया कंपनी में बहुत क्षमताएं और वो इसे खरीद सकते हैं।
लेकिन, प्रिंस अलवलीद के जवाब पर एलन मस्क भी चुप नहीं बैठे। उन्होंने शुक्रवार को ट्वीटर पर प्रिंस अलवलीद को टैग करते हुए सवाल किया, "दिलचस्प, सिर्फ़ दो सवाल, अगर मैं पूछ सकता हूं तो। ट्विटर का कितना हिस्सा किंगडम के पास है, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर? पत्रकारिता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर किंगडम के क्या विचार हैं।"

एलन मस्क ने ट्विटर को भी अपने ऑफ़र में कहा था कि कंपनी को एक निजी कंपनी के रूप में बदलने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि अगर उनका सबसे अच्छा और अंतिम प्रस्ताव भी खारिज किया जाता है तो वो शेयरधारक के तौर पर अपनी स्थिति पर विचार करेंगे।
उसके बाद शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक और पोल चलाया जिसमें उन्होंने पूछा, "ट्विटर को 54।20 डॉलर पर लेना शेयरधारक पर निर्भर होना चाहिए, ना कि बोर्ड पर।"

जोश व्हाइट का कहना है कि वह एलन मस्क की बातचीत की रणनीति से हैरान थे क्योंकि अगर उनका आख़िरी लक्ष्य कंपनी का अधिग्रहण करना है तो ये तरीक़ा सही नहीं है।

वो कहते हैं, "मुझे लगता था कि वो कंपनी के अधिग्रहण को लेकर वाकई गंभीर हैं। वो क़ीमत पर शुरुआत करेंगे और फिर बातचीत के लिए दरवाज़े खुले छोड़ देंगे।"
ट्विटर के बोर्ड द्वारा लागू क गई 'पॉइज़न पिल' योजना अगले साल 14 अप्रैल को ख़त्म हो जाएगी। मस्क के प्रस्ताव को लेकर ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल ने पहले कहा था कि कंपनी को इस प्रस्ताव से "बंधक नहीं बनाया जा रहा है।"

एलन मस्क कह चुके हैं कि ट्विटर अपने मंच पर अभिव्यक्ति की आज़ादी को सीमित कर रहा है। उनका पहला मकसद ट्विटर पर अभिव्यक्ति की आज़ादी को बढ़ाना है।
ब्लूमबर्ग के अनुसार एलन मस्क को अमेरिकी इंवेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली से मदद मिल रही है, वहीं, दो बैंकों गोल्डमैन सैश और जेपी मॉर्गन ट्विटर की मदद कर रहे हैं।

अब देखना है कि ट्विटर का 'पॉइज़न पिल' तरीक़ा कितना काम करता है और क्या ये एलन मस्क को रोक पाता है। अब ये देखना भी दिलचस्प हो गया है कि शह और मात का खेल बन चुके इस मामले में कौन बाज़ी मारता है।

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