Sun transit in Gemini : मिथुन संक्रांति क्या है, महत्व और मुहूर्त के साथ जानिए 12 राशियों पर शुभ-अशुभ असर

: सूर्यदेव 15 जून, 2022 गुरुवार को मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। मिथुन राशि में परिवर्तन को मिथुन संक्रांति कहते हैं। आइए जानते हैं, क्या होती है मिथुन संक्रांति और 12 राशियों पर क्या होगा इसका असर...

Mithun sankranti 2022 : सूर्य का गोचर 15 जून 2022, बुधवार को दोपहर 11 बजकर 58 मिनट पर मिथुन राशि में होगा जहां वह 16 जुलाई 2022 तक रहेगा और इसके बाद कर्क राशि में प्रवेश कर जाएगा।
मेष राशि : आपकी राशि में सूर्य का गोचर तीसरे भाव में होगा। इस गोचर के चलते घर-परिवार के सदस्यों के साथ आपका मतभेद बढ़ेगा। परिवार में सभी की सेहत का ध्यान रखना होगा। कार्यक्षेत्र में सतर्क रहने की जरूरत है।

वृषभ राशि : आपकी राशि में सूर्य का गोचर दूसरे भाव में होगा जिसके चलते संपत्ति को लेकर गृह कलह बढ़ सकता है। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। व्यापारियों को निवेश से लाभ होगा। परिवार में सभी की सेहत का ध्यान रखना होगा।

मिथुन राशि : आपकी राशि के लग्न भाव में गोचर आपके स्वभाव में बदलाव करेगा। आक्रमकता बढ़ सकती है, जिसके चलते दांपत्य जीवन में तनाव देखने को मिलेगा। साझेदारी के व्यापार में भी सतर्क रहने की जरूरत है। आपको अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होगा। नौकरी में मिलाजुला समय रहेगा।
कर्क राशि : आपकी राशि के द्वादश भाव में सूर्य का गोचर लंबी यात्रा का योग बनाएगा। कार्यक्षेत्र में आपके शत्रु परास्त होंगे। कोर्ट-कचहरी में चल रहा मामला सुलझ सकता है। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखना होगा।

सिंह राशि : आपकी राशि के एकादश भाव में सूर्य का गोचर आपनी आमदानी में वृद्धि करेगा। आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। आपसी रिश्‍ते मजबूत होंगे। नौकरी में प्रमोशन मिलेगा। जिद्दीपन छोड़कर परिवार की खुशियों पर ध्यान दें।


कन्या राशि : आपकी राशि के दशम भाव में सूर्य का गोचर नौकरी और व्यापार में उन्नति के अवसर पैदा करेगा। करियर में भी सफलता मिलेगी। हालांकि आपको परिवार के सदस्यों के प्रति विनम्र और सहयोग वाला भाव रखने की जरूरत है। फालतू बातों में समय बर्बाद न करें।

तुला राशि : आपकी राशि के नवम भाव में सूर्य का गोचर भाग्य को जागृत करेगा। यानी आपको नौकरी और व्यापार में भाग्य और पिता का साथ मिलेगा। आप धार्मिक कार्यों में रुचि लेंगे। यात्रा से लाभ होगा। परिवार से संबंध को बनाएं रखें।

वृश्‍चिक राशि : आपकी राशि के अष्टम भाव में सूर्य का गोचर सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है। आर्थिक नुकसान भी उठान पड़ सकता है। कार्य क्षेत्र में सतर्कता और कड़ी मेहनत से कार्य करने की जरूरत है। घटना दुर्घटना से बचना होगा।

धनु राशि : आपकी राशि के सप्तम भाव में सूर्य का गोचर करेगा। यदि आप विवाहित हैं हैं तो जीवनसाथी के साथ सुखद समय गुजरेगा। साझेदारी का व्यापार कर रहे हैं तो लाभ होगा। करियर में सफलता मिलेगी। हालांकि यदि आप क्रोध या अहंकार का प्रदर्शन करते हैं तो स्थिति बिगड़ जाएगी।

मकर राशि : आपकी राशि के छठे भाव में सूर्य का गोचर शत्रु और रोग पर विजय दिलाएगी। कोर्ट-कचहरी के मामले और कर्ज से मुक्ति के योग बन रहे हैं। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

कुंभ राशि : आपकी राशि के पंचम भाव में सूर्य का गोचर जीवनसाथी और संतान पक्ष की ओर से परेशानी खड़ी कर सकता है। दोनों की सेहत का ध्यान रखना होगा। शिक्षा में भी रुकावट आ सकती है। आपको भी अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा।

मीन राशि : आपकी राशि के चतुर्थ भाव में सूर्य का गोचर घर-परिवार में कुछ वाद-विवाद पैदा कर सकता है। माता की सेहत का ध्यान रखना होगा। व्यापार में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नौकरी में स्थानांतरण के योग बन रहे हैं। सोच समझकर ही आगे बढ़ें।

आओ जानते हैं क्या महत्व है इस संक्रांति का।

1. ओड़िसा में मिथुन संक्रांति का महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य से अच्‍छी फसल के लिए बारिश की मनोकामना करते हैं।

2. 15 जून को सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में जब प्रवेश करेंगे तो सभी नक्षत्रों में राशियों की दिशा भी बदल जाएगी। इस बदलाव को बड़ा माना जाता है। सूर्य जब कृतिका नक्षत्र से रोहिणी नक्षत्र में आते हैं तो बारिश की संभावना बनती है। रोहिणी से अब मृगशिरा में प्रवेश करेंगे।

3. मिथुन राशि में मृगशिरा नक्षत्र के 2 चरण, आद्रा, पुनर्वसु के 3 चरण रहते हैं। मिथुन संक्रांति के दौरान पुष्य और अष्लेषा नक्षत्र रहेंगे।

4. मिथुन संक्रांति के बाद से ही वर्षा ऋतु की विधिवत रूप से शुरुआत हो जाती है।

5. इस दिन भगवान सूर्यदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन स्नान और दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। सूर्य को अर्घ्य देने से मिलता है धन, संपदा, सौभाग्य और आरोग्य का शुभ वरदान....


6. मिथुन संक्रांति को रज पर्व भी कहा जाता है। इस दिन कई जगहों पर व्रत भी रखा जाता है।

7. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सिलबट्टे को दूध और पानी से पहले स्नान कराकर उसकी पूजा की जाती है।

8. ज्योतिषियों के अनुसार मि‍थुन संक्रांति के दौरान वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है इसीलिए सेहत का ध्यान रखना जरूरी होता है।



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