11 जुलाई 2021 को रहेगा पुष्‍य नक्षत्र, इन 10 बातों से जानिए इसका महत्व

Pushya Nakshatra
अनिरुद्ध जोशी| पुनः संशोधित शनिवार, 10 जुलाई 2021 (12:12 IST)
के अनुसार 11 जुलाई 2021, रविवार रहेगा। इसी समय से आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। रविवार के दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह वर्ष का पहला और आखिरी रवि पुष्य योग रहेगा। रवि पुष्य का योग धन और करियर के लिए शुभ होता है। आओ जानते हैं पुष्य नक्षत्र का महत्व।


पुष्य नक्षत्र समय : रविवार, 11 जुलाई 05:30:48 से 26:22:17 ( रात्रि 2 बजकर 22 मिनट 17 सेकंड तक)।

1. नक्षत्र 27 होते हैं और पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहते हैं। ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को मंगलकर्ता, वृद्धिकर्ता एवं आनंद कर्ता कहा गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को आठवां नक्षत्र माना गया है. ये नक्षत्र जब गुरुवार और रविवार के दिन होता है तो महायोग बनाता है।
2. यदि पुष्य नक्षत्र सोमवार को आए तो उसे सोम पुष्‍य, मंगलवार को आए तो उसे भौम पुष्य, बुधवार को आए तो बुध पुष्य, गुरुवार को आए तो गुरु पुष्य, शुक्र को आए तो शुक्र पुष्‍य, शनि को आए तो शनि पुष्‍य और रवि को आए तो रवि पुष्‍य नक्षत्र कहते हैं। इनमें से गुरु पुष्‍य, शनि पुष्‍य और रवि पुष्य नक्षत्र सबसे उत्तम बताए गए हैं। सभी का फल अलग-अलग होता है। बुधवार और शुक्रवार के दिन पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र उत्पातकारी भी माने गए हैं। अत: इस दिन कोई भी शुभ या मंगल कार्य ना करें और ना ही कोई वस्तु खरीदें। यह नक्षत्र सप्ताह के विभिन्न वारों के साथ मिलकर विशेष योग बनाता है।
3. पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं जो चिरस्थायित्व प्रदान करते हैं और इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जिसका कारक सोना है। इसी मान्यता अनुसार इस दिन खरीदा गया सोना शुभ और स्थायी माना जाता है। पुष्य नक्षत्र पर गुरु, शनि और चंद्र का प्रभाव होता है तो ऐसे में स्वर्ण, लोहा और चांदी की वस्तुएं खरीदी जा सकती है।

4. पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जो सदैव शुभ कर्मों में प्रवृत्ति करने वाले, ज्ञान वृद्धि एवं विवेक दाता हैं तथा इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि शनि हैं जिसे 'स्थावर' भी कहते हैं जिसका अर्थ होता है स्थिरता। इसी से इस नक्षत्र में किए गए कार्य चिरस्थायी होते हैं। अत: शनि पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई वस्तु चीर काल तक फल देने वाली और स्थायी रूप से विद्यमान रहती है। इस नक्षत्र में सोने के अलावा वाहन, भवन और भूमि खरीदना भी शुभ होता है।
5. शनिवार के दिन पुष्य नक्षत्र योग होने से इस दिन शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव से त्रस्त लोगों का शनि आराधना का विशेष फल प्राप्त होगा। शनिदेव को प्रसन्न् करने के लिए यह दिन सबसे अच्छा माना जाता है। जो व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती या ढैया से परेशान हैं उन्हें इस दिन कुछ खास उपाय करके शनि को प्रसन्न् करने का प्रयास करना चाहिए। इस दिन कालसर्पदोष से भी मुक्ति पाई जा सकती है। साथ ही इस किए गए धर्म-कर्म से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी।

6. वैसे तो हर 27 दिन में पुष्य नक्षत्र का योग बनता है परंतु दीपावली पूर्व आने वाला पुष्य नक्षत्र सबसे अधिक शुभ माना जाता है। यह शनि की कृपा दिलाने वाला योग है।

7. पीपल के पेड़ को पुष्य नक्षत्र का प्रतीक माना जाता है इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग अपने घर के खाली हिस्से में पीपल का वृक्ष लगाकर उसकी पूजा करते हैं जिससे उनके जीवन में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
8. पुष्य नक्षत्र में सोना, चांदी, बर्तन खरीदना शुभ होता है। इस नक्षत्र में वाहन, भवन, भूमि और बहीखाते खरीदना भी शुभ होता है। इस दिन मंदिर निर्माण, घर निर्माण आदि काम भी प्रारंभ करना शुभ हैं। इस नक्षत्र में शिल्प, चित्रकला और पुस्तक खरीदना उत्तम माना जाता है।

9. इस दिन पूजा या उपवास करने से जीवन के हर एक क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है। इस दिन दाल, खिचड़ी, चावल, बेसन, कड़ी, बूंदी की लड्डू आदि का सेवन भी किय जाता है और यथाशक्ति दान भी कर सकते हैं।
10. इस दिन से नए कार्यों की शुरुआत करें, जैसे ज्ञान या विद्या आरम्भ करना, कुछ नया सीखना, दुकान खोलना, लेखक हैं तो कुछ नया लिखना आदि। इसके अलावा पुष्य नक्षत्र में दिव्य औषधियों को लाकर उनकी सिद्धि की जाती है। इस दिन कुंडली में विद्यमान दूषित सूर्य के दुष्प्रभाव को घटाया जा सकता है।



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