वर्ष 2013 में कैसा होगा आपका भविष्य?

क्या नया साल 2013 आपको देगा चमकदार सफलता?

वर्ष
Author पं. सुरेन्द्र बिल्लौरे|
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मेष- अश्विनी भरणी और कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण के संयोग से मेष राशि का निर्माण हुआ है। इसके स्वामी मंगल हैं एवं मंगल को सेनानायक का पद प्राप्त है। इस राशि के जातक साहसी, अभिमानी और मित्रों से प्रेम रखने वाले होते हैं।

मेष राशि वालों के लिए यह वर्ष धन-प्रॉपर्टी के साथ भौतिक सुख-समृद्धि वाला रहेगा। इस वर्ष कुछ नए लोग जुड़ेंगे एवं अतिव्ययता से परेशानी का सामना करना पड़ेगा। छोटे विचार वालों से बचना होगा। धर्म-पुण्य के कार्य में विघ्न आएंगे। अतिलोभ की वृत्ति उभर कर सामने आएगी। अत: सोच-समझ कर कार्य करें। नौकरी में संकट का सामना करना पड़ेगा। पारिवारिक क्लेश रहेगा। भागीदारी वाले कार्य सावधानी से करें। नाना-मामा पक्ष से संतोष मिलेगा। पेट की परेशानी आ सकती है। स्त्रियों को भी यह वर्ष मनोवांछित फल देगा। कुछ समय पति पक्ष से असंतोष की स्थिति बनेगी। विद्यार्थी, कृषक लाभान्वित होंगे।

राजनीति एवं नौकरी वालों के लिए यह वर्ष मध्यम रहेगा। व्यापारी के लिए भी सफल वर्ष रहेगा। इस वर्ष में मेष राशि वालों ने राहु-केतु ग्रह के जाप एवं शांति पूजन करना चाहिए।

वृषभ- वृषभ राशि कृतिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी और मृगाशिरा नक्षत्र के प्रथम और द्वितीय चरणों के संयोग से बनी है। इसका राशि स्वामी शुक्र है। मंत्रीमंडल में इसे मंत्री का पद प्राप्त है। इस राशि का जातक यदि कृष्ण पक्ष में जन्म ले तो उसे दमा इत्यादि होने की संभावना रहती है। इस राशि के जातक स्वभाव से गंभीर और विनम्रशील होते है।
वृषभ राशि वाले जातको के लिए यह वर्ष उमंग, उत्साह वाला रहेगा। परोपकार, वात्सल्य भाव का प्रादुर्भाव होगा। विशिष्ट कार्य सिद्धि के साथ आत्मबल बढे़गा। वर्ष में शारीरिक कष्ट, दुख के साथ जीवनसाथी से कुछ वियोग के योग बनेंगे। इस वर्ष नि:संतान को संतान प्राप्ति के योग है। जून से अचल सम्पति के प्रति चिंता व नवीन स्थायी काम के योग बनेंगे। सामाजिक व आर्थिक सम्मान में बढ़ोतरी होगी। विद्यार्थी एवं राजनैतिक व्यक्ति को सफलता मिलेगी। व्यापारियों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। वर्ष में शिव आराधना के साथ राहु-केतु की शांति लाभदायक रहेगी।
मिथुन- मिथुन राशि मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय-चतुर्थ चरण, आर्द्रा नक्षत्र और पुनर्वसु के तीन चरणों के संयोग से बनी है। मिथुन राशि के स्वामी बुध है। बुध का पद युवराज का है। मिथुन राशि के जातक स्थिर बुद्धि के नहीं होते हैं। विषय में आसक्त होते हैं। प्राय: 30 वर्ष की उम्र के बाद इस राशि वालों का भाग्योदय होता है। बेईमानी से धन कमाना इन्हें रास नहीं आता। सामाजिक प्रतिष्ठा की चाहत हमेशा रहती है।
मिथुन राशि वालों के लिए यह वर्ष शुभाशुभ, पीड़ा तथा कर्ज की स्थिति वाला रहेगा। खर्च पर संयम करना पड़ेगा। संबंधियों से उदासीनता प्राप्त होगी। कुटुंब में मतभेद के योग बनते हैं। भूमि-भवन एवं भौतिक साधनों पर अधिक खर्च होगा। पत्नी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। जून से पुराने कार्य पूर्ण करने का अवसर रहेगा। मन में उत्साह, बल, बुद्धि का परिवर्तन होगा। अच्छे विचार से संतान का सुख प्राप्त होगा। न्यायिक उलझनों से मुक्ति मिलेगी। रोगादि से राहत प्राप्त होगी। विविध कार्य से आर्थिक स्थिति सुधरेगी। व्यापारी, कृषक एवं राजनैतिक सफलता मिलेगी। नौकरी में तकलीफ रहेगी। इस वर्ष गुरु जाप एवं दान-पूजन करने से लाभ मिलेगा।

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